Rwanda Genocide: रवांडा नरसंहार की 30वीं बरसी पर रोशनी से जगमगाई कुतुब मीनार, भारत ने ऐसे दिखाई एकजुटता
रवांडा में हुए नरसंहार में करीब आठ लाख लोगों ने अपनी जांन गंवाई थी। इस घटना की 30वीं बरसी पर भारत ने अफ्रीकी देश के साथ एकजुटता दिखाते हुए कुतुब मीनार को रोशनी से जगमग किया।
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रवांडा के लोगों के साथ एकजुटता दिखाते हुए भारत ने रवांडा नरसंहार की 30वीं बरसी पर कुतुब मीनार को रोशन किया। मीनार को रवांडा के झंडे के रंग में जगमग किया गया। बता दें कि रवांडा में 1994 में 100 दिन तक चले नरसंहार में करीब करीब आठ लाख ने अपनी जान गंवाई थी। इसे इतिहास के सबसे भीषण नरसंहारों में गिना जाता है।
विदेश मंत्रालय ने साझा की पोस्ट
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि रवांडा के लोगों के साथ एकजुटता दिखाते हुए भारत द्वारा कुतुब मीनार को रवांडा के झंडे के रंगो से रोशन किया गया। उन्होंने कहा कि आर्थिक संबंधों के सचिव दम्मू रवि ने 30वें स्मरणोत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने रोशनी में नहाई कुतुब मीनार की और रवांडा की राजधानी किगाली में पुष्पांजलि अर्पित करते हुए आर्थिक संबंधओं के सचिव रवि की एक तस्वीर भी साझा की। इससे पहले विदेश मंत्रालय द्वारा शनिवार को बताया गया था कि साल अप्रैल को रवांडा की यात्रा के दौरान रवि 30वें स्मरणोत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
"In solidarity with the people of Rwanda, India lit up the Qutub Minar today, marking the UN International Day of Reflection on the 1994 Genocide against the Tutsi in Rwanda. Secy (ER) Dammu Ravi represented India at the 30th commemoration of the genocide today in Kigali," tweets… pic.twitter.com/wOwbON8kkE
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) April 7, 2024
2017 में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी गए थे रवांडा
फरवरी 2017 में रवांडा की यात्रा के दौरान तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किगाली नरसंहार स्मारक पर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी थी। इस दौरान अंसारी ने नरसंहार के दौरान मारे गए लोगों की याद में बनाए गए स्मारक को अदम्य राष्ट्रीय भावना का प्रमाण बताया था।
रवांडा नरसंहार में मारे गए थे आठ लाख लोग
छह अप्रैल 1994 की रात को रवांडा के राष्ट्रपति जुवेनल हब्यारिमाना की हत्या के साथ ही सात अप्रैल से नरसंहार का सिलसिला शुरू हो गया था। करीब 100 दिनों तक तुत्सी समुदाय के लोगों का नरसंहार किया गया। बताया जाता है कि इस नरसंहार में आठ लाख लोग मारे गए थे। इस नरसंहार की याद में यूनाइटेड नेशन ने 7 अप्रैल को इंटरनेशनल डे ऑफ रिफ्लेक्शन घोषित किया था।