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ये हैं वो खूबियां, जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े संविधान को बनाया नायाब

Tue, 26 Nov 2019 04:56 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 26 Nov 2019 04:56 AM IST
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qualities of Indian Constitution which make it unique in the world
संविधान दिवस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

संविधान भारत का सर्वोच्च विधान है। यह दुनिया का न सिर्फ सबसे लंबा हस्तलिखित दस्तावेज है, बल्कि इसके निर्माताओं ने कई देशों की उन अच्छाइयों को भी इसके भीतर समेटा, जिससे भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में मजबूत बन सके।

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26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को मंजूरी दी थी। आज उस मंजूरी के 70 साल पूरे हो गए हैं। चार साल पहले यानी 26 नवंबर 2015 को भारत सरकार ने संविधान दिवस मनाने की आधिकारिक शुरुआत की थी। इस अवसर पर यहां पेश हैं, इस ऐतिहासिक दस्तावेज की वो विशेषताएं जो हर नागरिक से सीधे जुड़ी हैं। साथ ही जानिए वो अनछूए-अनजाने पहलू, जिन्होंने बनाया भारतीय संविधान को नायाब।

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दुनिया का सबसे लंबा संविधान

भारत का संविधान दुनिया में सबसे बड़ा और विस्तृत है। जब इसे लागू किया गया था, तब इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। इसमें कुल शब्दों की संख्या करीब 1,45,000 थी। फिलहाल इसमें प्रस्तावना के साथ 25 भाग, 12 अनुसूचियां और 448 अनुच्छेद हैं। संविधान लागू होने के करीब 70 साल बाद इसमें 108 संशोधन हो चुके हैं।

एक साथ लचीला और कठोर

ऐसा इसलिए क्योंकि संविधान के कुछ प्रावधानों को संसद में सामान्य बहुमत से संशोधित किया जा सकता है जबकि कुछ प्रावधानों में बदलाव के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत के साथ कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडल की अनुमति भी जरूरी है।

संघीय स्वरूप

संविधान में भारत को 'राज्यों के संघ' के रूप में परिभाषित किया गया है। इसका मतलब है कि भारतीय संघ इसके घटकों के बीच किसी अनुबंध का नतीजा नहीं है और वे इससे बाहर नहीं निकल सकते।

मूल अधिकार और मूल कर्तव्य

संविधान में देश के नागरिकों के लिए मूल अधिकारों की विस्तृत व्याख्या (अनुच्छेद 12-35) की गई है, जिन्हें किसी भी कानून द्वारा छीना या कमजोर नहीं किया जा सकता। इसी तरह, अनुच्छेद 51ए में नागरिकों के 11 कर्तव्यों का प्रावधान है।  

धर्मनिरपेक्षता

शुरुआत में धर्मनिरपेक्षता शब्द संविधान का हिस्सा नहीं था। 42वें संशोधन द्वारा इसे संविधान की प्रस्तावना में जोड़ा गया।

स्वतंत्र न्यायपालिका

अनुच्छेद 76 में न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं। इसका मकसद यह है कि शासन-व्यवस्था संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हो। न्यायपालिका नागरिकों के मूल अधिकारों और अन्य अधिकारों के संरक्षक के रूप में भी काम करती है।

एकल नागरिकता

भारतीय संविधान ने हमें एकल नागरिकता दी है। अनुच्छेद 5-11 में प्रावधान है कि अलग-अलग राज्यों के निवासियों को अलग से नागरिकता नहीं लेनी होती। न ही किसी अन्य देश का नागरिक होते हुए भारत की नागरिकता हासिल की जा सकती है।

आपातकालीन उपबंध

आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए संविधान में आपातकालीन अधिकारों का प्रावधान किया गया है। सैन्य विद्रोह, विदेशी आक्रमण और राज्यों में संवैधानिक संकट (अनुच्छेद 352-360) के हालात में राष्ट्रपति आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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