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Hindi News ›   India News ›   Quadrantid Meteor Shower To Peak On January 3 and 4: When, Where To Watch In India news update

Meteor Shower: नए साल के स्वागत में लगेंगे चार चांद, आसमान में होगी तारों की बारिश; इस दिन दिखेगा ये खास नजारा

Fri, 03 Jan 2025 12:09 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 03 Jan 2025 12:09 PM IST
सार

उल्कापात यानी टूटते तारों की बारिश तब होती है जब पृथ्वी किसी धूमकेतु या क्षुद्रग्रह के छोड़े गए कणों से गुजरती है, तो ये कण वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और घर्षण के कारण जलने लगते हैं, जिससे आसमान में चमकती रोशनी की धारियां बनती हैं।

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Quadrantid Meteor Shower To Peak On January 3 and 4: When, Where To Watch In India news update
क्वाड्रेंटिड्स उल्कापात - फोटो : adobe stock

विस्तार

नए साल की शुरुआत हो चुकी है। मगर इसका शानदार स्वागत आज या कल एक खगोलीय नजारे के साथ होगी, क्योंकि क्वाड्रेंटिड्स (Quadrantids) नामक साल का पहला उल्कापात (meteor shower) तीन और चार जनवरी को अपने चरम पर पहुंचेगा।

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क्यों होता है उल्कापात?
उल्कापात तब होता है जब पृथ्वी किसी धूमकेतु या क्षुद्रग्रह के छोड़े गए कणों से गुजरती है, तो ये कण वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और घर्षण के कारण जलने लगते हैं, जिससे आसमान में चमकती रोशनी की धारियां बनती हैं। इसे लोग 'टूटते तारे' के रूप में पहचानते हैं। क्वाड्रंटिड्स फिलहाल सक्रिय हैं, जो 16 जनवरी तक जारी रहेंगे। 
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भारत में कब दिखेगा क्वाड्रेंटिड्स उल्कापात?
नासा के अनुसार, क्वाड्रेंटिड्स उल्का को उत्तरी गोलार्ध में सबसे अच्छी तरह से देखा जा सकता है, जिसका अर्थ है कि वे भारत में विशेष रूप से रात और सुबह के समय दिखाई देंगे। इस नक्षत्रीय घटना को देखने के लिए आपको शहर या स्ट्रीटलाइट्स से दूर एक अंधेरे स्थान पर जाना चाहिए, फिर अपनी पीठ के बल लेटकर अपने पैरों को उत्तर-पूर्व दिशा में रखें और ऊपर देखें।
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अंधेरे में 30 मिनट के अंदर आप इन उल्काओं को देखना शुरू कर देंगे। एकमात्र चुनौती यह है कि आपको धैर्य रखना होगा, क्योंकि यह उल्कापात सुबह तक जारी रहेगा। आपके पास इसे देखने के लिए पर्याप्त समय होगा। अगर किसी अंधेरी जगह पर जाना संभव नहीं है, तो आप पास के किसी प्लेनेटेरियम में भी जा सकते हैं जहां दूरबीनों का उपयोग करके खगोलीय घटना को देखा जा सकता है।

अधिकतम सक्रिय चार जनवरी को रात साढ़े आठ बजे के आसपास होने की उम्मीद है। यह रात और सुबह के समय तक जारी रह सकता है।

हर साल कुछ घंटों के लिए होते हैं सक्रिय
पृथ्वी जब सूरज के चारों ओर कई बार परिक्रमा करती है, तो यह उन मलबों से गुजरती है जो टूटे हुए धूमकेतुओं और कभी-कभी क्षुद्रग्रहों (Asteroid) द्वारा छोड़े गए होते हैं। हालांकि इस मायने में क्वाड्रेंटिड्स यूनिक हैं, क्योंकि वे हर साल केवल कुछ घंटों के लिए अपने चरम पर होते हैं, जबकि अधिकांश उल्कापात दो-दिन चरम तक चलता हैं। क्वाड्रेंटिड्स का स्रोत 2003 EH1 नामक क्षुद्रग्रह से छोड़ा गया मलबा है। नासा ने बताया कि यह कम समय का शावर चरम पर प्रति घंटे 60 से 200 उल्काओं के साथ दिखाई देगा।


किसने लाया था सामने?
क्वाड्रेंटिड्स का नाम अब प्रचलन से बाहर हो चुके नक्षत्र क्वाड्रांस म्यूरालिस के नाम पर रखा गया था, जिसे 1795 में फ्रांसीसी खगोलज्ञ जेरोम ललांडे ने प्रस्तुत किया था। क्वाड्रेंटिड्स का एक वैकल्पिक नाम बूटिड्स भी है, क्योंकि ये उल्कापिंड आधुनिक नक्षत्र बूट्स से उत्पन्न होते हुए दिखाई देते हैं। हालांकि, क्वाड्रेंटिड्स को पहली बार 1825 में देखा गया था। 

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