घर में होगा शौचालय तो काजी पढ़ेंगे निकाह
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उर्दू में एक कहावत है, मियां बीबी राजी तो क्या करेगा काजी लेकिन अब वह दिन लद गए। अगर आप मुस्लिम हैं और निकाह करना चाहते हैं तो आपके घर में शौचालय होना अनिवार्य होगा। अगर दूल्हे के घर पर शौचालय नहीं होगा तो काजी उसके सपनों पर पानी फेर सकता है और निकाह कराने से इनकार कर सकता है।
यह बात गुवाहाटी में स्वच्छता विषय पर असम सम्मेलन-2017 में जमायत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कही। मदनी ने कहा, यह निर्णय मुस्लिम परंपराओं के तहत तन और मन की सफाई आपस में जुड़े हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
सबसे जरूरी है कि घर परिवार और समाज में स्वच्छ वातावरण हो। इसके लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। स्वच्छता को बनाए रखने के संकल्प को ध्यान में रखते हुए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में यह निर्णय लिया गया है कि जिन घरों में शौचालय नहीं होंगे, उन घरों के लड़कों की निकाह नहीं पढ़ी जाएगी। निकाह पढ़ने से पहले लड़के वालों को काजी या मौलाना को बताना होगा कि उनके घर में शौचालय है।
स्वच्छता अभियान के लिए असम कर रहा कारगर उपाय
इस मौके पर असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा, इसी साल 2 अक्टूबर तक असम को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में लगातार मेहनत की जा रही है। अब तक राज्य में 5.60 लाख शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है और जल्द ही बाकी बना लिए जाएंगे।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने में असम की जनता उनके साथ है। इस मौके पर स्वच्छता अभियान के अग्रणी और परमार्थ निकेतन के प्रमुख चिन्मयानंद सरस्वती ने शौचालय से देवालय की ओर का मंत्र दिया।
उन्होंने कहा, अब समय बदल गया है। समय के साथ-साथ हमें भी बदलना होगा, तभी स्वच्छ भारत बना पाएंगे। उन्होंने पहले शौचालय, फिर विद्यालय और उसके बाद देवालय का नया नारा दिया।