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Hindi News ›   India News ›   Puttaparthi: rulers should introspect daily, see if there is any bad quality in them, CJI Ramana said a big thing

CJI NV Ramana: देश के शासक रोज करें आत्म निरीक्षण, देखें कि उनमें कोई दुर्गुण तो नहीं, सीजेआई रमण ने कही बड़ी बात  

Mon, 22 Nov 2021 06:49 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, पुट्टपर्थी
पीटीआई, पुट्टपर्थी Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 22 Nov 2021 06:49 PM IST
सार

जस्टिस रमण ने कहा कि रामायण व महाभारत को उद्धृत करते हुए जस्टिस रमण ने कहा कि इनमें राजा के 14 दुर्गुण बताए गए हैं, शासकों को उनसे बचना चाहिए।

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Puttaparthi: rulers should introspect daily, see if there is any bad quality in them, CJI Ramana said a big thing
चीफ जस्टिस एनवी रमण - फोटो : ANI

विस्तार

देश के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण ने सोमवार को कहा कि शासकों को रोज इस बात का आत्म निरीक्षण करना चाहिए कि क्या उनके द्वारा लिए गए निर्णय अच्छे हैं। उन्हें यह भी जांचना चाहिए कि उनमें कोई दुर्गुण तो नहीं है।

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आंध्रप्रदेश के अनंतपुरमु जिले के पुट्टपर्थी में श्री सत्य साईं इंस्टीट्यूट आफ हायर लर्निंग के 40 वें दीक्षांत समारोह में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रमण ने यह बात कही। रामायण व महाभारत को उद्धृत करते हुए जस्टिस रमण ने कहा कि इनमें राजा के 14 दुर्गुण बताए गए हैं, शासकों को उनसे बचना चाहिए।
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सीजेआई ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में सभी शासकों को रोज अपना नियमित काम शुरू करने से पहले यह आत्म विश्लेषण करना चाहिए कि उनमें कोई बुराई तो नहीं है। लोकतंत्र में उचित शासन की जरूरत है और वह जनता की जरूरतों के मुताबिक होना चाहिए। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस रमण ने कहा कि यहां कई बुद्धिमान लोग हैं और वे विश्व में और देशभर में हो रहे घटनाक्रमों को देख रहे हैं। 
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चीफ जस्टिस रमण ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है। सरकार ने जो भी फैसला लिया है, उसका फायदा उन्हें मिलना चाहिए। उनकी इच्छा है कि देश का सारा तंत्र स्वतंत्र और ईमानदार होना चाहिए। उसका मकसद जनता की सेवा होना चाहिए। सत्य साईं बाबा भी अक्सर यही बात कहा करते थे। 

 दुर्भाग्य से आधुनिक शिक्षा प्रणाली का ध्यान केवल उपयोगितावादी कार्यों पर है। यह प्रणाली विद्यार्थियों को नैतिक व आध्यात्मिक कार्यों के प्रति प्रवृत्त नहीं करती, जिनसे छात्र के चरित्र का निर्माण होता है। ये प्रवत्तियां ही उनमें सामाजिक चेतना व जिम्मेदारी की भावना पैदा करती हैं। 


सत्य साईं के दर्शन का सौभाग्य मिला
जस्टिस रमण ने कहा, 'मुझे बाबा के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। मैंने हमेशा उनकी ज्ञान की बातों को अपने साथ रखा। बाबा से बड़ा कोई गुरु नहीं है। सत्य साईं का अर्थ है प्रेम, सेवा, त्याग। बाबा ने हमें नेक मार्ग दिखाया है। यह 'वसुधैव कुटुम्बकम' के हमारे संस्कार में निहित है। बाबा का जीवन सभी के लिए प्रेरणादायी होना चाहिए।'

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