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Puri Jagannath: जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की मरम्मत का काम पूरा, सरकार की मंजूरी के बाद होगी रत्नों की गिनती

Tue, 08 Jul 2025 10:19 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 08 Jul 2025 10:19 AM IST
सार

भगवान जगन्नाथ के रत्नों की पिछली सूची 1978 में बनाई गई थी। मंदिर के सूत्रों ने बताया कि उस सूची के अनुसार मंदिर में 128 किलोग्राम सोना और 200 किलोग्राम से अधिक चांदी है।

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Puri Jagannath temple Ratna Bhandar repair work complete inventory after odisha government nod
भगवान जगन्नाथ मंदिर , पुरी - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय पुरातत्व संस्थान ने पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की मरम्मत का काम पूरा कर लिया है। रत्नों की गिनती और उनकी सूची बनाने का काम राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद किया जाएगा। श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरबिंद पधी और पुरातत्व संस्थान के प्रमुख पुरातत्ववेता डीबी गरनायक ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। भारतीय पुरातत्व संस्थान ही 12वीं सदी के पुरी जगन्नाथ मंदिर का संरक्षक है। 
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95 दिनों में पूरा हुआ काम
श्री जगन्नाथ मंदिर का बाहरी चैंबर भगवान की पूजा और त्योहारों पर इस्तेमाल होने वाले रत्नों को रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वहीं सबसे ज्यादा महंगे और सोने-चांदी और हीरे के आभूषण अंदरुनी चैंबर में रखे जाते हैं। अंदरुनी चैंबर बीते 46 वर्षों से नहीं खोला गया था। बीते साल अंदरुनी चैंबर की मरम्मत और उसमें रखे हीरे जेवरात की गिनती के लिए इसे खोला गया। आईएएस अधिकारी और मंदिर के प्रमुख प्रशासक अरबिंद पधी ने बताया कि मंदिर के अंदरुनी चैंबर की मरम्मत और पुनिर्माण का काम पुरातत्व संस्थान ने किया, जिसमें 95 दिनों का समय लगा। करीब 80 लोगों की टीम ने भगवान के खजाने को संरक्षित किया। 
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रत्न भंडार में साल 1978 की सूची के अनुसार, 128 किलो सोना
पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर राज्य सरकार के विधि विभाग के अधीन काम करता है। पिछले साल जुलाई में जब रत्न भंडार को खोला गया था, तब लोहे की पेटियों और अलमारियों में रखे आभूषण और अन्य कीमती सामान को दो चरणों में मंदिर के अंदर अस्थायी स्ट्रांग रूम में स्थानांतरित किया गया था। पधी ने कहा कि रत्न भंडार की मरम्मत पूरी हो जाने के बाद जल्द ही आभूषणों को रत्न भंडार के अंदर ले जाया जाएगा। भगवान जगन्नाथ के रत्नों की पिछली सूची 1978 में बनाई गई थी। मंदिर के सूत्रों ने बताया कि उस सूची के अनुसार मंदिर में 128 किलोग्राम सोना और 200 किलोग्राम से अधिक चांदी है। उन्होंने कहा कि कुछ आभूषणों पर सोने की परत चढ़ी हुई है और उस समय उनका वजन नहीं किया गया था।
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पधी ने कहा कि रत्न भंडार की मरम्मत और संरक्षण का काम राज्य सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया गया। उन्होंने कहा, 'भगवान की कृपा से 8 जुलाई को देवताओं के नीलाद्रि बिजे से पहले मरम्मत का काम पूरा हो गया।' नीलाद्रि बिजे अनुष्ठान का मतलब है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा के साथ मंदिर के गर्भ गृह में वापस लौटते हैं। जो रथ यात्रा उत्सव के समापन का प्रतीक है। 

रत्न भंडार में किया गया सुधार
पुरातत्व विभाग के अधिकारी गरनायक ने कहा कि 'रत्न भंडार के आंतरिक और बाहरी कक्षों में कुल 520 क्षतिग्रस्त पत्थर के ब्लॉक को बदला गया। ये पिछले कुछ वर्षों में खराब हो गए थे। साथ ही अब फर्श पर ग्रेनाइट के पत्थर लगाए गए हैं। इसके अलावा, संरचना में 15 क्षतिग्रस्त बीमों को स्टेनलेस स्टील की बीमों से बदल दिया गया है। जीर्णोद्धार कार्य पूरी तरह से पारंपरिक सूखी चिनाई पद्धति से किया गया है।'

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