पंजाब में कांग्रेस ने जारी की 23 उम्मीदवारों की तीसरी सूची, 17 सीटों पर घमासान जारी
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पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का दावा करने वाली कांग्रेस अभी तक पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं तय कर पाई है। पंजाब की तीसरी सूची जारी होने के बाद भी 17 सीटों पर घमासान मचा है। पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू के अभी तक पार्टी में शामिल न होने के कारण अमृतसर ईस्ट पर उम्मीदवारी घोषित नहीं हुई है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि बाकी सीटों का भी जल्द ही ऐलान किया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनाव की तारीखें घोषित होने से पहले पहली सूची जारी कर कांग्रेस की परपाटी को तोड़ा था। ऐसा माना जा रहा था कि तीसरी सूची में शेष सभी 40 उम्मीदवारों की घोषणा हो जाएगी। 17 सीटों पर सहमति न बनने और घमासान के चलते के चलते पार्टी ने मजबूरन बृहस्पतिवार को 23 उम्मीदवार घोषित कर दिए।
सिद्धू ने अभी तक कांग्रेस का हाथ नहीं थामा है
अमरिंदर सिंह बादलों को घेरने की बात तो कह रहे हैं लेकिन हाईप्रोफाइल सीएम प्रकाश सिंह बादल की लंबी विधानसभा और उपमुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की जलालाबाद सीट पर अभी तक उम्मीदवार तय होने से परेशानी बढनी तय है। जो उम्मीदवार इनके खिलाफ उतरेगा उसे मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के खिलाफ पर्याप्त समय पार्टी को देना होगा। जबकि मुख्यमंत्री के खिलाफ आम आदमी पार्टी दिल्ली से विधायक रहे जरनैल सिंह को उनके मुकाबले मैदान में उतार चुकी है। पूर्व सांसद जगरूप सिंह के बेटे जत्थेदार गुरमीत सिंह खुडिया मुख्यमंत्री के खिलाफ कांग्रेस से टिकट मांग रहे हैं लेकिन उनके नाम पर सहमति नहीं बनी है।
कांग्रेस ने अमृतसर ईस्ट विधानसभा सीट नवजोत सिंह सिद्धू के लिए आवंटित कर दी है लेकिन सिद्धू ने अभी तक कांग्रेस का हाथ नहीं थामा है। कैप्टन बार-बार यही कह रहे हैं सिद्धू जल्द पार्टी में शामिल हो जाएंगे। पार्टी हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह की उम्मीदवारी भी तय नहीं कर सकी है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी भी पंजाब विधानसभा में दावेदारी ठोंक रहे हैं। मनीष लुधियाना ईस्ट से चुनाव लडना चाहते हैं। मनीष की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी सहमति नहीं दिख रही है। कुछ का तर्क है कि मनीष के चुनाव लडने से आसपास की कुछ सीटों पर भी प्रभाव पड़ेगा। जबकि कैप्टन समर्थक नहीं चाहते हैं कि किसी भारी भरकम नाम को पंजाब से जोड़कर भविष्य में विवाद को जन्म दिया जाए।