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पंजाब सरकार ने स्कूल के बच्चों से कहा-कैफिन और कोकीन है समान

Sun, 29 Jul 2018 05:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 29 Jul 2018 05:19 PM IST
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punjab govt to school students: caefine and cocane is equal
कैफीन-कोकेन बराबर
देश के खुशहाल राज्यों में एक पंजाब ड्रग्स की समस्या से जूझ रहा है। पंजाब सरकार बड़े पैमाने पर लोगों को ड्रग्स के चंगुल से निकालने और इस कारोबार के जाल को पूरी तरह से खत्म करने में जुटी है। इसी कड़ी में पंजाब सरकार स्कूल के बच्चों में ड्रग्स से होने वाले नुकसान को लेकर जागरुकता फैलाने की पहल की है। पंजाब स्कूल एजूकेशन बोर्ड (पीएसईबी) ने कक्षा बारहवीं के विज्ञान पाठ्यक्रम में ड्रग्स की लिस्ट और इसके नुकसान से जुड़ी जानकारी को शामिल किया है। दिलचस्प बात ये है कि ड्रग्स की लिस्ट में कैफीन को भी चिन्हित कर दिया गया है।
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बारहवीं की पाठ्य पुस्तक के इस अध्याय में कैफीन को नारकोटिक्स, कोकीन और हेरोईन के बराबर खतरनाक बताया गया है। छात्रों को ये समझाने की कोशिश की गई है कि कैफीन की भी लत लग जाती है इसलिए ये किसी ड्रग्स से कम नहीं । लम्बे समय तक भारी मात्रा में कैफीन का सेवन करने से उसका असर कोकीन जैसा होता है और यह शरीर को नुकसान पहुंचाता है। सिरदर्द, नींद ना आना, अवसाद और चिंता जैसी बीमारियां ज्यादा कैफीन लेने से होती हैं।
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पंजाब शिक्षा मंत्रालय जहां इस कदम को सही और ज्ञानवर्धक बता रहा है वहीं चिकित्सक इसे गलत ठहरा रहे हैं। दरअसल डाक्टरों का मानना है कि कैफीन की खुराक सामान्यत: चाय और कॉफी से ली जाती है। और अगर कैफीन भी ड्रग्स की सूची में डालते हैं तो कोकीन और हेरोईन जैसे घातक ड्रग्स को आप चाय, कॉफी की तरह सामान्य घोषित कर कम भयावह बता देते हैं। चाहे मंशा कैफीन से होने वाले नुकसान को भी बताना क्यों ना हो लेकिन ये वैज्ञानिक दृष्टि से भी ठीक नहीं है। 
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पंजाब के  सरकारी अस्पताल और कॉलेज के प्रोफेसर और मनोचिकित्सक डॉक्टर अजीत सिदाना ने कहा कि कैफीन को नारकोटिक्स की सूची में रखना बिल्कुल गलत है। डॉक्टर सिदाना ने कहा- ' मेरे बीस साल की मेडिकल प्रैक्टिस में मैंने एक भी कैफीन की लत वाले मरीज को नहीं देखा तो कैफीन को आप ड्रग्स कैसे कह सकते हैं'।

इस पाठ्यक्रम में शिक्षकों ने भी कई कमी चिन्हित की हैं, उनके मुताबिक विद्यार्थियों को आधी-अधूरी जानकारी देने के फायदे कम और नुकसान ज्यादा हैं। ड्रग्स से जुड़े अध्याय में नशे से होने वाली शारीरिक और सामाजिक पतन के बारे में नहीं बताया गया है। जानकारी को सिर्फ लिखित रखा गया है, इसमें एक भी तस्वीर का उपयोग नहीं किया गया है जिसकी वजह से यह अध्याय बच्चों के लिए रोचक होने के बजाए बोझिल बन गया है। 


बहरहाल पंजाब सरकार ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि आगे पाठ्यक्रम में और सुधार किया जायेगा । इसके लिए इस विषय के जानकार और चिकित्सकों की राय भी ली जाएगी।   

 

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