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Punjab Election 2022: क्या केजरीवाल दिल्ली छोड़कर पंजाब जाएंगे, आप सीएम चेहरे के लिए जनता से सुझाव क्यों मांग रही है
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पंजाब में प्रचार करते अरविंद केजरीवाल
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का सीएम उम्मीदवार कौन होगा इसे लेकर पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नया दांव चला। गुरुवार को उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की तरफ से अगले हफ्ते सीएम चेहरे का एलान कर दिया जाएगा। लेकिन सीएम का चेहरा कौन होगा, यह जनता तय करेगी। इसके लिए एक फोन नंबर जारी किया गया है। 17 नवंबर तक लोगों को इस पर राय देनी होगी। इस दौरान केजरीवाल ने कहा कि लोगों को संदेह है कि अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री की दौड़ में होंगे लेकिन वह इसमें शामिल नहीं हैं।हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान यह बात सामने आई थी कि केजरीवाल खुद पंजाब का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं और तब पार्टी ने मुख्यमंत्री के चेहरे का एलान नहीं किया था। कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कुछ ऐसा ही दावा किया कि 2017 में केजरीवाल पंजाब आने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन तब कुमार विश्वास ने पोल खोल दी तो कदम खींच लिए थे। तो क्या यह माना जाए कि यदि सर्वे में लोगों ने अपनी पसंद केजरीवाल को बता दी तो वे दिल्ली छोड़कर पंजाब का सीएम बनने को तैयार हो जाएंगे?
राहुल गांधी छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और पंजाब के सीएम चरनजीत सिंह चन्नी (बाएं से दूसरे)
- फोटो :
अमर उजाला
पंजाब में सीएम पद के लिए पसंदीदा चेहरा कौन?
पंजाब चुनाव को लेकर हाल ही में हुए एबीपी न्यूज सी वोटर सर्वे के सर्वे में मौजूदा पंजाब सीएम चरणजीत सिंह चन्नी सबसे आगे हैं। लेकिन उनके बाद दूसरे नंबर आम आदमी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर है। सर्वे के मुताबिक, पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को 29 फीसदी सीएम पद के तौर पर पसंद करते हैं जबकि आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान को 23 फीसदी लोग सीएम पद के लिए पसंदीदा चेहरा मानते हैं।
वहीं सीएम पद के लिए केजरीवाल तीसरे नंबर पर है। इसलिए सियासी हलकों में यही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि क्या, यदि पंजाब की जनता ने केजरीवाल को अपनी पहली पसंद बता दी तो, वे पंजाब जाने को तैयार होंगे?
पंजाब चुनाव को लेकर हाल ही में हुए एबीपी न्यूज सी वोटर सर्वे के सर्वे में मौजूदा पंजाब सीएम चरणजीत सिंह चन्नी सबसे आगे हैं। लेकिन उनके बाद दूसरे नंबर आम आदमी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर है। सर्वे के मुताबिक, पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को 29 फीसदी सीएम पद के तौर पर पसंद करते हैं जबकि आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान को 23 फीसदी लोग सीएम पद के लिए पसंदीदा चेहरा मानते हैं।
वहीं सीएम पद के लिए केजरीवाल तीसरे नंबर पर है। इसलिए सियासी हलकों में यही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि क्या, यदि पंजाब की जनता ने केजरीवाल को अपनी पहली पसंद बता दी तो, वे पंजाब जाने को तैयार होंगे?
पंजाब चुनाव 2022: अरविंद केजरीवाल
- फोटो :
PTI (File Photo)
दिल्ली छोड़ने को तैयार नहीं केजरीवाल
यही सवाल पिछले साल दिसंबर में एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में जब केजरीवाल से पूछा गया था तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पंजाब विधानसभा चुनाव जीत रही है, लेकिन वह दिल्ली नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि वे दिल्ली के बेटे हैं, दिल्ली में रहेंगे। उनके मुताबिक, मुझे दिल्ली से अपार प्यार मिला है। मैं दिल्ली में ही रहूंगा।
सीएम चेहरे के लिए पार्टी जनता से क्यों मांग रही सुझाव?
पंजाब के चुनावी सर्वे से जुड़े एक राजनीतिक पर्यवेक्षक का कहना है कि जनता से सीएम चेहरे के लिए सुझाव मांगने का यह तरीका आम आदमी पार्टी का पुराना और प्रचलित हथकंडा है। पार्टी इस बहाने खुद को लोकतांत्रिक दिखाने की कोशिश करती है और पार्टी को चर्चा में ले कर आती है, करना वही है जो अरविंद केजरीवाल तय कर चुके हैं। जैसे 2013 में उन्हें कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनानी थी और उन्हें कांग्रेस का समर्थन मिल भी गया था, लेकिन पार्टी ने जनता से सुझाव मांगने का आडंबर किया।
2013 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में 28 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को 31 और कांग्रेस को आठ। भाजपा ने बहुमत नहीं होने पर सरकार बनाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को बिना शर्त समर्थन देने का एलान किया।
यही सवाल पिछले साल दिसंबर में एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में जब केजरीवाल से पूछा गया था तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पंजाब विधानसभा चुनाव जीत रही है, लेकिन वह दिल्ली नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि वे दिल्ली के बेटे हैं, दिल्ली में रहेंगे। उनके मुताबिक, मुझे दिल्ली से अपार प्यार मिला है। मैं दिल्ली में ही रहूंगा।
सीएम चेहरे के लिए पार्टी जनता से क्यों मांग रही सुझाव?
पंजाब के चुनावी सर्वे से जुड़े एक राजनीतिक पर्यवेक्षक का कहना है कि जनता से सीएम चेहरे के लिए सुझाव मांगने का यह तरीका आम आदमी पार्टी का पुराना और प्रचलित हथकंडा है। पार्टी इस बहाने खुद को लोकतांत्रिक दिखाने की कोशिश करती है और पार्टी को चर्चा में ले कर आती है, करना वही है जो अरविंद केजरीवाल तय कर चुके हैं। जैसे 2013 में उन्हें कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनानी थी और उन्हें कांग्रेस का समर्थन मिल भी गया था, लेकिन पार्टी ने जनता से सुझाव मांगने का आडंबर किया।
2013 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में 28 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को 31 और कांग्रेस को आठ। भाजपा ने बहुमत नहीं होने पर सरकार बनाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को बिना शर्त समर्थन देने का एलान किया।
अरविंद केजरीवाल
- फोटो :
ANI
राजनीतिक पर्यवेक्षक जनता से सीएम चेहरे के लिए जनता से सुझाव मांगने के कुछ फायदे बता रहे हैं।
1-आम आदमी पार्टी में होगा वही जो अरविंद केजरीवाल तय करेंगे, लेकिन जनता से पसंद पूछने पर उनका काम आसान हो सकता है। बताया जा रहा है कि आप पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए आंदोलनकारी किसान नेताओं में से भी सिख मुख्यमंत्री का चेहरा तलाश रही है।
2-यह पार्टी के चुनाव प्रचार का भी तरीका हो सकता है। केजरीवाल के इस लोकतांत्रिक कदम की राज्य में चर्चा होगी और वे वोटर्स का ध्यान खींच सकते हैं।
3-पार्टी कुछ समय तक नाम की घोषणा करने से बच सकती है।
4-पार्टी में चल रहे अंतर्विरोध और कलह को कुछ समय तक टाला जा सकता है।
5-पंजाब में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भगवंत सिंह मान को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की मांग लगातार उठा रहे हैं। बताया जाता है कि खुद मान भी यही चाहते हैं क्योंकि वे पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता की हैसियत रखते हैं और अभी चुनाव प्रचार के दौरान उनकी रैलियों में सबसे ज्यादा भीड़ इकट्ठी हो रही है। लेकिन कथित तौर पर उनके शराब पीने की आदत को लेकर कुछ लोग उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में सही पसंद नहीं मानते हैं और उन्हें लेकर पार्टी में कुछ विरोध भी है। लेकिन इतना माना जा रहा है कि भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाने पर पार्टी के अंदर जबरदस्त बगावत हो सकती है।
1-आम आदमी पार्टी में होगा वही जो अरविंद केजरीवाल तय करेंगे, लेकिन जनता से पसंद पूछने पर उनका काम आसान हो सकता है। बताया जा रहा है कि आप पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए आंदोलनकारी किसान नेताओं में से भी सिख मुख्यमंत्री का चेहरा तलाश रही है।
2-यह पार्टी के चुनाव प्रचार का भी तरीका हो सकता है। केजरीवाल के इस लोकतांत्रिक कदम की राज्य में चर्चा होगी और वे वोटर्स का ध्यान खींच सकते हैं।
3-पार्टी कुछ समय तक नाम की घोषणा करने से बच सकती है।
4-पार्टी में चल रहे अंतर्विरोध और कलह को कुछ समय तक टाला जा सकता है।
5-पंजाब में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भगवंत सिंह मान को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की मांग लगातार उठा रहे हैं। बताया जाता है कि खुद मान भी यही चाहते हैं क्योंकि वे पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता की हैसियत रखते हैं और अभी चुनाव प्रचार के दौरान उनकी रैलियों में सबसे ज्यादा भीड़ इकट्ठी हो रही है। लेकिन कथित तौर पर उनके शराब पीने की आदत को लेकर कुछ लोग उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में सही पसंद नहीं मानते हैं और उन्हें लेकर पार्टी में कुछ विरोध भी है। लेकिन इतना माना जा रहा है कि भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाने पर पार्टी के अंदर जबरदस्त बगावत हो सकती है।
भगवंत सिंह मान
- फोटो :
सोशल मीडिया
क्या मान को मिलेगा मौका?
पंजाब में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री के चेहरे पर अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'भगवंत मान हमारे बहुत प्यार हैं, मेरे छोटे भाई हैं, आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं। हम भी कमरे में बैठकर कह रहे थे कि भगवंत मान को बना देते हैं लेकिन इन्होंने कहा कि नहीं जनता से पूछना चाहिए। जानकार यह भी मानते हैं कि हो सकता है कि जनता से सीएम चेहरे के लिए सुझाव मांगने की केजरीवाल की रणनीति भगवंत मान के लिए समर्थन जुटाने की हो।
मान के लिए फोन आने शुरू
आप के पंजाब सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल के नंबर जारी करते ही जनता ने सीएम चेहरे के लिए अपने पसंदीदा उम्मीदवार का नाम बताना शुरू कर दिया है और इसमें मान का नाम सबसे पहले लिया जा रहा है और अब तक उनके लिए सैंकड़ों फोन आ चुके हैं।
चुनाव से पहले सीएम चेहरे की घोषणा से पार्टी को कितना फायदा?
2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने मुख्यमंत्री के चेहरे का एलान नहीं किया था। तब माना गया कि इस वजह से पार्टी को खामियाजा उठाना पड़ा और पार्टी को उम्मीद से बहुत कम सीटें मिली थीं। केजरीवाल ने इस बार पिछली गलती से सबक लेते हुए काफी महीने पहले ही घोषणा कर दी थी कि उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार सिख समाज से होगा। लेकिन वह उम्मीदवार के नाम का एलान कब करेंगे यह सवाल पूछने पर केजरीवाल बार-बार इसे सही वक्त का बहाना देकर टाल देते थे।
पंजाब में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री के चेहरे पर अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'भगवंत मान हमारे बहुत प्यार हैं, मेरे छोटे भाई हैं, आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं। हम भी कमरे में बैठकर कह रहे थे कि भगवंत मान को बना देते हैं लेकिन इन्होंने कहा कि नहीं जनता से पूछना चाहिए। जानकार यह भी मानते हैं कि हो सकता है कि जनता से सीएम चेहरे के लिए सुझाव मांगने की केजरीवाल की रणनीति भगवंत मान के लिए समर्थन जुटाने की हो।
मान के लिए फोन आने शुरू
आप के पंजाब सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल के नंबर जारी करते ही जनता ने सीएम चेहरे के लिए अपने पसंदीदा उम्मीदवार का नाम बताना शुरू कर दिया है और इसमें मान का नाम सबसे पहले लिया जा रहा है और अब तक उनके लिए सैंकड़ों फोन आ चुके हैं।
चुनाव से पहले सीएम चेहरे की घोषणा से पार्टी को कितना फायदा?
2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने मुख्यमंत्री के चेहरे का एलान नहीं किया था। तब माना गया कि इस वजह से पार्टी को खामियाजा उठाना पड़ा और पार्टी को उम्मीद से बहुत कम सीटें मिली थीं। केजरीवाल ने इस बार पिछली गलती से सबक लेते हुए काफी महीने पहले ही घोषणा कर दी थी कि उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार सिख समाज से होगा। लेकिन वह उम्मीदवार के नाम का एलान कब करेंगे यह सवाल पूछने पर केजरीवाल बार-बार इसे सही वक्त का बहाना देकर टाल देते थे।
अरविंद केजरीवाल
- फोटो :
एएनआई
क्या इस बार फायदा मिल सकता है?
राजनीतिक पर्यवेक्षक के मुताबिक यदि पार्टी उस समय मुख्यमंत्री चेहरे के लिए किसी नाम की घोषणा कर देती तो जट सिख वोट बैंक का काफी फायदा मिलता। उस समय इस वोट बैंक का कुछ हिस्सा कांग्रेस को मिला था और कुछ आम आदमी पार्टी को। लेकिन इस बार पार्टी को इसका कोई फायदा नहीं मिलने वाला है, क्योंकि पांच साल बाद भी पार्टी ने प्रदेश में सशक्त नेतृत्व को नहीं उभरने दिया और इस बार भी पार्टी को वोट दिल्ली मॉडल और केजरीवाल के नाम पर ही मिलेंगे।
राजनीतिक पर्यवेक्षक के मुताबिक यदि पार्टी उस समय मुख्यमंत्री चेहरे के लिए किसी नाम की घोषणा कर देती तो जट सिख वोट बैंक का काफी फायदा मिलता। उस समय इस वोट बैंक का कुछ हिस्सा कांग्रेस को मिला था और कुछ आम आदमी पार्टी को। लेकिन इस बार पार्टी को इसका कोई फायदा नहीं मिलने वाला है, क्योंकि पांच साल बाद भी पार्टी ने प्रदेश में सशक्त नेतृत्व को नहीं उभरने दिया और इस बार भी पार्टी को वोट दिल्ली मॉडल और केजरीवाल के नाम पर ही मिलेंगे।