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Maharashtra: पुणे में मिले गिलियन-बैरे सिंड्रोम के 22 संदिग्ध मामले, जांच के लिए भेजे गए नमूने
Tue, 21 Jan 2025 06:10 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 21 Jan 2025 06:10 PM IST
सार
Guillain-Barre syndrome: गिलियन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें अचानक सुन्नता और मांसपेशियों में कमजोरी हो जाती है। इसके साथ ही इस बीमारी में अंगों में गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण भी होते हैं।
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हेल्थ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पुणे में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के 22 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। जिसके बाद पुणे नगर निगम के अधिकारियों ने मरीजों की विस्तृत जांच की है। अधिकारी ने बताया कि पुणे नगर निगम (पीएमसी) के स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के नमूने जांच के लिए आईसीएमआर-एनआईवी को भेजे हैं।
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इनमें से अधिकतर मामले शहर के सिंहगढ़ रोड इलाके से सामने आए। चिकित्सकों के अनुसार, गिलियन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें अचानक सुन्नता और मांसपेशियों में कमजोरी हो जाती है। इसके साथ ही इस बीमारी में अंगों में गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण भी होते हैं। अधिकांश संदिग्ध मरीजों की उम्र 12 से 30 वर्ष की बीच है। हालांकि 59 वर्षीय एक मरीज का मामला भी सामने आया है।
नागरिक स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख डॉ. नीना बोराडे ने बताया कि शहर के तीन से चार अस्पतालों में जीबीएस के 22 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। उन्होंने बताया, पिछले दो दिनों में गिलियन-बैरे सिंड्रोम के संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट सामने आई हैं। जिसके बाद हमने विस्तृत जांच शुरू कर दी है और एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया है।
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उन्होंने बताया कि हमने इन संदिग्ध मामलों के नमूने आगे की जांच के लिए आईसीएमआर-एनआईवी को भी भेजे हैं। उन्होंने बताया कि, जीवाणु और वायरल संक्रमण आम तौर पर जीबीएस का कारण बनते हैं क्योंकि वे रोगियों की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं।
डॉ. बोराडे ने बताया, यह सिंड्रोम बच्चों और युवाओं दोनों आयु वर्ग को हो सकता है। हालांकि, जीबीएस महामारी या वैश्विक महामारी का कारण नहीं बनेगा। उपचार के जरिये अधिकांश लोग इस स्थिति से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हमने एनआईवी के वैज्ञानिकों और महामारी विज्ञानियों सहित विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया है। मरीजों की विस्तृत निगरानी की जाएगी। अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
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नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इनमें से अधिकतर मामले शहर के सिंहगढ़ रोड इलाके से सामने आए। चिकित्सकों के अनुसार, गिलियन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें अचानक सुन्नता और मांसपेशियों में कमजोरी हो जाती है। इसके साथ ही इस बीमारी में अंगों में गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण भी होते हैं। अधिकांश संदिग्ध मरीजों की उम्र 12 से 30 वर्ष की बीच है। हालांकि 59 वर्षीय एक मरीज का मामला भी सामने आया है।
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नागरिक स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख डॉ. नीना बोराडे ने बताया कि शहर के तीन से चार अस्पतालों में जीबीएस के 22 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। उन्होंने बताया, पिछले दो दिनों में गिलियन-बैरे सिंड्रोम के संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट सामने आई हैं। जिसके बाद हमने विस्तृत जांच शुरू कर दी है और एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया है।
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उन्होंने बताया कि हमने इन संदिग्ध मामलों के नमूने आगे की जांच के लिए आईसीएमआर-एनआईवी को भी भेजे हैं। उन्होंने बताया कि, जीवाणु और वायरल संक्रमण आम तौर पर जीबीएस का कारण बनते हैं क्योंकि वे रोगियों की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं।
डॉ. बोराडे ने बताया, यह सिंड्रोम बच्चों और युवाओं दोनों आयु वर्ग को हो सकता है। हालांकि, जीबीएस महामारी या वैश्विक महामारी का कारण नहीं बनेगा। उपचार के जरिये अधिकांश लोग इस स्थिति से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हमने एनआईवी के वैज्ञानिकों और महामारी विज्ञानियों सहित विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया है। मरीजों की विस्तृत निगरानी की जाएगी। अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं है।