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Pune Porsche Case: 'छह आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध', अभियोजन पक्ष ने कहा- सबूतों से कर सकते हैं छेड़छाड़

Fri, 09 Aug 2024 03:50 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Fri, 09 Aug 2024 03:50 AM IST
सार

19 मई को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में पोर्श कार ने बाइक को टक्कर मार दी थी, हादसे में बाइक सवार दो आईटी इंजीनियरों की मौत हो गई थी। जिसके बाद पुलिस ने कथित रूप से शराब के नशे में कार चला रहे किशोर को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, किशोर के ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में पुलिस ने किशोर के माता-पिता और ससून अस्पताल के डॉक्टर सहित कर्मचारी की भी गिरफ्तारी की थी।
 

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Pune Porsche car crash case Prosecution opposes bail plea of six accused
पुणे पोर्श मामला - फोटो : PTI

विस्तार

पुणे पोर्श कार दुर्घटना मामले में आरोपी छह लोगों की जमानत याचिका पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यूएम मुधोलकर के समक्ष सुनवाई हो रही है। बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध किया। कहा कि उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करके न्यायपालिका के साथ खिलवाड़ किया है। यदि आरोपियों को जमानत दे दी गई तो वह सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे और गवाहों पर दबाव डालने की कोशिश करेंगे। 

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बता दें कि 19 मई को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में पोर्श कार ने बाइक को टक्कर मार दी थी, हादसे में बाइक सवार दो आईटी इंजीनियरों की मौत हो गई थी। जिसके बाद पुलिस ने कथित रूप से शराब के नशे में कार चला रहे किशोर को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, किशोर के ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में पुलिस ने किशोर के माता-पिता और ससून अस्पताल के डॉक्टर सहित कर्मचारी की भी गिरफ्तारी की थी। पुणे पुलिस ने हाल ही में सात आरोपियों के खिलाफ मामले में 900 पन्नों की चार्जशीट दायर की, जिसमें जमानत याचिका दायर करने वाले छह और ससून अस्पताल के कर्मचारी अतुल घाटकांबले शामिल थे। वहीं, मुख्य आरोपी नाबालिग के खिलाफ मामला फिलहाल किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष चल रहा है।
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मामले में वकील शिशिर हीरे को विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त किया गया है। जिन्होंने कोर्ट में दुर्घटना में शामिल किशोर के माता-पिता विशाल अग्रवाल, शिवानी अग्रवाल, ससून अस्पताल के फोरेंसिक विज्ञान विभाग के तत्कालीन प्रमुख अजय तावड़े की जमानत याचिका का विरोध किया। इसमें तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्रीहरि हल्नोर के साथ-साथ बिचौलिए अशपाक मकंदर और अमर गायकवाड़ भी शामिल थे।
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एयरबैग खुलने के बाद 110 किमी प्रति घंटा थी कार की गति
हीरे ने अदालत को बताया कि दोपहिया वाहन से टकराने और कार के एयरबैग खुलने के बाद कार की गति 110 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई थी, जिससे संकेत मिलता है कि टक्कर से पहले वाहन और भी अधिक गति से चलाया जा रहा था। हीरे ने हत्या के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को दी गई जमानत को रद्द कर दिया गया था। हीरे ने कहा कि आरोपियों को जमानत दे दी गई तो वह सबूतों के साथ फिर छेड़छाड़ करेंगे, जिस तरह किशोर के ब्लड सैंपल को बदलने की कोशिश की गई। 


पीड़ितों के अधिकार एक मूल्यवान चीज: हीरे
हीरे ने कहा, सबूतों के साथ छेड़छाड़ पीड़ितों के न्याय पाने के अधिकार को बाधित करती है। पीड़ितों के अधिकार एक मूल्यवान चीज हैं। समग्र रूप से समाज न्याय मांग रहा है। उन्होंने बचाव पक्ष के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) को अलग करने की जरूरत है। वहीं, मीडिया ट्रायल के कारण गिरफ्तारी होने की बचाव पक्ष की दलील पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि जांच पूरी व्यावसायिकता के साथ की जा रही है।

एसपीपी हीरे, जिनकी सहायता उनके सहयोगी अधिवक्ता सारथी पनारे ने की थी, शुक्रवार को अपनी दलील जारी रखेंगे।

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