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डॉक्टर बनेंगे साथी: पुडुचेरी का टीबी मॉडल अपनाएगा देश; प्रत्येक MBBS छात्र को गोद लेने होंगे परिवार

Sat, 05 Jul 2025 07:19 AM IST
दीपक कुमार शर्मा परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 05 Jul 2025 07:19 AM IST
सार

फैमिली अडॉप्शन प्रोग्राम के तहत मेडिकल छात्र तीन से पांच परिवार को गोद लेकर तीन साल तक नियमित संपर्क में है। इस बीच टीबी की जांच के साथ संक्रमित रोगी मिलने पर उसके उपचार में सहायता भी कर रहे हैं।

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Puducherry became first state in country to take important step towards TB elimination
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

देश में तपेदिक (टीबी) उन्मूलन की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए पुडुचेरी पहला राज्य बन गया है, जहां मेडिकल छात्रों को फैमिली अडॉप्शन प्रोग्राम के तहत टीबी मरीजों से सीधे जोड़ा जा रहा है। इस मॉडल के तहत मेडिकल छात्र तीन से पांच परिवार को गोद लेकर तीन साल तक नियमित संपर्क में है। इस बीच टीबी की जांच के साथ संक्रमित रोगी मिलने पर उसके उपचार में सहायता भी कर रहे हैं। अब पुडुचेरी के मॉडल की सफलता को देखते हुए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) देश के बाकी राज्यों में भी इसी तरह की पहल करने जा रहा है।

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आंकड़े बताते हैं कि पुडुचेरी में 2015 की तुलना में 2024 तक टीबी संक्रमण के नए मामलों में करीब 59 फीसदी की गिरावट आई है। बीते साल 2024 में यहां 3,366 लोग टीबी संक्रमित पाए गए। हालांकि यहां के अस्पतालों में आसपास के राज्यों से भी मरीज आते हैं, जिसके चलते यहां टीबी की मृत्यु दर बाकी हिस्सों की तुलना में करीब 10 फीसदी है। साल 2024 में आधे से ज्यादा टीबी मौत बाहरी राज्यों से आए मरीजों की हुई हैं।
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दो हजार छात्र हर साल परिवार ले रहे गोद
पुडुचेरी के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. कविता वासुदेवन ने बताया कि यह पहल एनएमसी की ओर से अनिवार्य किए गए पाठ्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें छात्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य से जोड़ने पर जोर दिया है। यह कार्यक्रम छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देने के साथ समुदाय में टीबी की रोकथाम में भी मददगार होगा। उन्होंने बताया कि पुडुचेरी में करीब कुल 10 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें दो हजार से ज्यादा एमबीबीएस सीटें मौजूद हैं। यानी एक साल में दो हजार एमबीबीएस छात्र करीब 10 हजार परिवारों को गोद ले रहे हैं और गैर संचारी और संचारी रोगों पर लगातार निगरानी रख रहे हैं।

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मेडिकल कॉलेजों तक आसानी से पहुंच रहे नमूने
प्रोफेसर डॉ. आनंद ने बताया कि टीबी संक्रमण से मुक्त होने के लिए ज्यादा से ज्यादा जांच करना जरूरी है। अगर एमबीबीएस छात्र फील्ड में जाकर परिवारों को गोद लेते हैं और उन परिवारों में जांच करते हैं तो इससे न सिर्फ कम समय में बड़ी आबादी तक पहुंचा जा सकता है बल्कि टीबी बैक्टीरिया पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। डॉ. आनंद ने बताया कि उनके यहां हर दिन 15 से 20 नमूने लेकर एमबीबीएस छात्र आते हैं और जांच में संक्रमित मिलने वाले रोगी को उपचार पर जोर देते हैं। इससे टीबी को लेकर सामाजिक कुरीतियों को भी खत्म किया जा सकता है। यही कारण है कि पुडुचेरी का यह मॉडल देशभर के मेडिकल कॉलेजों के लिए एक आदर्श बन सकता है, जहां डॉक्टर केवल अस्पतालों तक सीमित न रहकर समुदाय के सक्रिय साथी बनें।

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