फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   profile of maulana badruddin ajmal

ओवैसी से भी बड़े खिलाड़ी हैं बदरुद्दीन अजमल

Thu, 07 Apr 2016 07:11 PM IST
हरेन्द्र सिंह मोरल/अमर उजाला, नई दिल्ली
हरेन्द्र सिंह मोरल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 07 Apr 2016 07:11 PM IST
विज्ञापन
profile of maulana badruddin ajmal

असम के विधानसभा चुनावों में बेशक राजनीतिक पंड़ित कांग्रेस और भाजपा में बराबरी की टककर की भविष्यवाणी कर रहे हों लेकिन हर किसी की निगाहें कांधे पर असमिया गमछा रखकर घूमते लंबी दाढ़ी वाले मौलाना पर ही टिकी हैं। ये मौलाना हैं इत्र का कारोबार करने वाले बदरुद्दीन अजमल। 

विज्ञापन


असम की राजनीति में उनकी हैसियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र दस बारह सालों के छोटे से राजनीतिक सफर में ही 18 विधायकों और तीन सांसदों के साथ राज्य की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन चुके हैं। 
विज्ञापन


कोई उन्हें मौजूदा चुनावों में किंगमेकर के रूप में देख रहा है तो काफी लोगों का मानना है कि इन चुनावों में बदरुद्दीन और बड़ी ताकत बन सकते हैं। कुछ लोगों की नजर में मौलाना राजनीति के मामले में मुस्लिमों के बीच जबरदस्त रूप से लोकप्रियता पा रहे असदुद्दीन ओवैसी से भी बड़े खिलाड़ी हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


साधारण कद काठी वाले बदरुद्दीन पहली नजर में किसी मदरसे के मौलाना की तरह ही महसूस होते हैं लेकिन ये उनकी शख्सियत का असली पहलू नहीं है, उन्होंने राज्य की राजनीति में तेजी से अपनी पहचान और पकड़ बनाई है।

2005 में पार्टी बनाकर एक साल में ही जीती दस सीटें

profile of maulana badruddin ajmal

पुरखों के दशकों पुराने इत्र के कारोबार को मजबूती से जमाने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा तो चंद सालों में ही तेजी से लोकप्रियता की सीढ़िया चढी। 2005 में पहली बार उन्होंने आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नाम से अपनी पार्टी बनाई और अगले ही साल 2006 के विधानसभा चुनावों में उतरे। 

राजनीतिक पंड़ित उस समय भौचक्के रह गए जब उन्होंने सबको चौंकाते हुए 126 सदस्यीय विधानसभा में से दस सीटें अपने नाम कर ली। मुंबई में पैदा हुए अजमल ने अपनी पढ़ाई उत्तर प्रदेश के देवबंद से की। पढ़ाई पूरी कर राज्य में वापस लौटने के साथ ही अजमल इस बात को अच्छी तरह भांप चुके थे कि 35 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले असम में आज भी यह कौम नेतृत्व विहीन है। 

मौलाना ने इस बात को समझा और मुसलमानों को गोलबंद किया। इसके लिए उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक दोनों रूप से अपनी पहचान बनाई। उन्होंने राज्य में कई मदरसों का निर्माण कराया तो कई शिक्षण संस्‍थानों की भी स्‍थापना की। 

मुस्लिमों से जुड़े हर मुद्दे पर वह मुखर होकर उनका पक्ष रखते और लड़ने मरने को तैयार रहते। उनका यह अंदाज राज्य के मुस्लिमों को खासा पसंद आया। बांग्लादेश से आए मुस्लिमों के प्रति उनका सख्त रवैये ने उन्हें गैर मुस्लिमों में भी लोकप्रिय बनाया। 

लोकसभा चुनावों में पाई सत्तारूढ़ कांग्रेस के बराबर सीटें

profile of maulana badruddin ajmal
badruddin ajmal - फोटो : badruddin ajmal

2006 में बेशक राज्य में असम में कांग्रेस की सरकार बनी लेकिन मौलाना बदरुद्दीन अजमल अपने लिए जगह बनाने में सफल रहे। इसके बाद अगले विधानसभा चुनावों में एक बार फिर मौलाना दमखम के साथ उतरे। 

यह उनकी शख्सियत का ही करिश्मा था कि 2011 के विधानसभा चुनावों में बदरुद्दीन की पार्टी एआईयूडीएफ ने राज्य में दो बार सरकार बना चुकी असम गण परिषद को पछाड़ते हुए 18 सीटें हासिल की। लोगों की आंखें उस समय हैरत में रह गई जब 55 साल की उम्र में राजनीति में उतरने वाले मौलाना बदरुद्दीन ने मोदी लहर के बीच हुए आम चुनावों में भी कांग्रेस के बराबर तीन सीटें जीतीं और वह खुद भी सांसद बने।

अल्पसंख्यक वोटों के दम पर मौलाना बदरुद्दीन ने जिस तेजी से असम की राजनीति में अपनी पहचान बनाई है उसे देखकर यह कहना गलत न होगा कि वह किंगमेकर की भूमिका में भी आ सकते हैं। वैसे भी असम की धरती राजनीतिक चमत्कारों की गवाह रही है, लोगों ने यहां असम गण परिषद का चमत्कारी उभार देखा है तो छात्र आंदोलन से राजनीतिक पार्टियों को सत्ता शिखर छूते भी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed