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रोहिंग्या मुस्लिमों की समस्या राजनयिक स्तर पर सुलझाई जा सकती है, SC दखल न दे: केंद्र

Mon, 19 Mar 2018 08:58 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 19 Mar 2018 08:58 PM IST
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Problems of Rohingya Muslims can be resolved at a diplomatic level says government on SC

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या राजनयिक स्तर पर सुलझाई जा सकती है। यह काम कार्यपालिका का है और अदालत को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर दायर याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के लिए नौ अप्रैल की तारीख तय की है। 

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एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर काम चल रहा है। राजनयिक स्तर पर हो रहे काम को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। सरकार में उच्च स्तर पर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कैंपों में रह रहे शरणार्थियों की स्थिति से भलीभांति अवगत है। इस मामले पर कोर्ट को अंतरिम आदेश पारित नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे म्यांमार और बांग्लादेश से राजनयिक संबंध प्रभावित होंगे। 
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रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर दायर याचिकाओं का विरोध करते हुए मेहता ने कहा कि पीठ को इस तरह की याचिकाओं पर विचार नहीं करना चाहिए। उसे यह देखने की जरूरत है कि देश को अस्थिर करने की कौन कोशिश कर रहा है। डेमोग्राफी में बदलाव की कोशिश कौन कर रहा है। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को मूल सुविधाओं से वंचित रखने का आरोप बेबुनियाद है। 
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उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रह रहे देश के नागरिक हो या शरणार्थी, किसी के साथ भेदभाव नहीं जाता है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के आधार पर याचिकाएं दायर की जाती है। किसी को यह नहीं मालूम कि किसके हितों का संरक्षण हो रहा है। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि देश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है। 

उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं से महरूम रखा जा रहा है। यहां तक कि उन्हें पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा अदालत को इस संबंध में कोई निर्देश पारित करना चाहिए। लेकिन पीठ ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार के दावे के विपरीत कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किया जाएगा हम अंतरिम आदेश पारित नहीं कर सकते। 


वहीं इससे पहले रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर दाखिल एक अन्य याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर और राजस्थान के कैंपों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। वास्तव में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने कहा कि कैंपों में लोग दयनीय स्थिति में रह रहे हैं। उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दी जा रही हैं।

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