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प्रियंका गांधी आई हैं, कांग्रेस में नई रोशनी लाई हैं

Wed, 23 Jan 2019 03:03 PM IST
अमर शर्मा शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 23 Jan 2019 03:03 PM IST
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priyanka gandhi becomes eastern up congress incharge ahead of lok sabha elections 2019
priyanka gandhi - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस पार्टी ने करीब 10 साल से बचा कर रखे प्रियंका गांधी के तुरुप के पत्ते को चल दिया है। प्रियंका गांधी बतौर महासचिव सक्रिय राजनीति में आई हैं और अब कांग्रेस में नई रोशनी लाई हैं। नई रोशनी इसलिए लाई हैं, क्योंकि उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार दिया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक चुनौतियां काफी जटिल हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहीं से हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय चुनाव क्षेत्र बनारस भी इसमें आता है। माना जा रहा है कि प्रियंका को राजनीति में उतारकर कांग्रेस पार्टी ने विरोधियों के लिए कड़ी चुनौती दे दी है। प्रियंका के साथ-साथ कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी महासचिव बनाकर उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा है।
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ऐसा पहली बार हो रहा है कि जब कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में एक से अधिक प्रभारी को मैदान में उतारा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार प्रियंका के पास तो पश्चिमी का ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास है। गुलाम नबी आजाद को उत्तर प्रदेश के प्रभार से मुक्त करके उन्हें हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है। 
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प्रियंका के आने का असर

प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में उतरने का असर पड़ना तय है। प्रियंका में लोग उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अक्स देखते हैं। फिलवक्त प्रियंका विदेश में हैं और फरवरी के सप्ताह में अपना कामकाज संभालेंगी। बेबाक बयान, सहज शैली और संतुलित बयान देने में माहिर प्रियंका का युवाओं में भी क्रेज है। वह कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को अच्छी तरह समझती हैं और इसमें होने वाले तमाम बदलावों को लेकर सक्रिय भी रही हैं। 
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2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी ने अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार करते हुए विरोधियों के लिए कड़ी मुश्किल खड़ी कर दी थी। यहां तक कि बनारस से चुनाव लड़ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी रक्षात्मक लाइन लेनी पड़ गई थी। प्रियंका भले ही सक्रिय राजनीति में नहीं रही हैं, वह राजनीति की समझ रखती हैं। पिछले दस-बारह साल से वह कांग्रेस पार्टी के नेताओं, महासचिवों के लगातार संपर्क में रही हैं। 

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी प्रियंका ने पर्दे के पीछे से रहकर अहम भूमिका निभाई थी। वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सबसे विश्वसनीय और करीबी सलाहकार भी हैं। खास बात यह है कि प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस के नेताओं, कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल सकता है।

2019 में प्रियंका लड़ सकती हैं चुनाव

प्रियंका गांधी 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं। वह रायबरेली या फिर किसी अन्य सीट से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता अभी इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं। केंद्र सरकार में सत्ता का रास्ता भी उत्तर प्रदेश से होकर आता है। 

एनडीए 2014 में राज्य से 73 सीटें जीतने में सफल रहा था। समाजवादी पार्टी को पांच और कांग्रेस को केवल रायबरेली, अमेठी में सफलता मिली थी। जबकि बसपा का खाता तक नहीं खुला था। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार की राजनीतिक चुनौतियां 2014 से कहीं कम जटिल नहीं है। इसलिए कांग्रेस प्रियंका को चुनाव लड़ाकर विरोधियों के साथ राजनीतिक समीकरण को बदलने की पूरी कोशिश करेगी। 

कांग्रेसियों ने किया स्वागत, भाजपा ने बताया परिवारवाद

priyanka gandhi becomes eastern up congress incharge ahead of lok sabha elections 2019
priyanka gandhi - फोटो : social media
प्रियंका गांधी के राजनीति में आने, उन्हें महासचिव बनाने का कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने स्वागत किया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रियंका गांधी के रूप में राजनीति का दो युवा चेहरा दे दिया है। यह वहां गरीबों, कमजोर और सबकी विचारधारा को लेकर आगे बढ़ेंगे। राहुल ने कहा कि जो उत्तर प्रदेश को चाहिए, वह कांग्रेस पार्टी देगी। 

मोतीलाल बोरा, संजय निरुपम, गुलाम नबी आजाद, शीला दीक्षित समेत तमाम नेताओं ने इसे सही दिशा में लिया गया कदम बताया है। राजीव शुक्ला ने कहा कि प्रियंका गांधी राजनीति में आई हैं और भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया से साफ है कि उनकी घबराहट बढ़ गई है। एनसीपी की सुप्रिया सुले ने प्रियंका गांधी को महासचिव बनाने का स्वागत किया है। 

वहीं भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा ने इसे परिवारवाद की राजनीति बताया है। सांबित पात्रा के अनुसार जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, कांग्रेस पार्टी प्रियंका गांधी को आगे लेकर आती है। सांबित ने कहा कि कांग्रेस एक परिवार की पार्टी है और परिवारवाद तक सिमट गई है।

काफी समय से होती रही है मांग- प्रियंका लाओ

प्रियंका लाओ, कांग्रेस बचाओ की मांग बड़ी पुरानी है। यह मांग कांग्रेस के कार्यकर्ता 2009 के लोकसभा चुनाव से लगातार करते रहे हैं। कहा जा रहा है कि प्रियंका के राजनीति में उतरने से भाजपा, समाजवादी-बसपा गठबंधन के नेताओं पर काफी दबाव बढ़ जाएगा।

इसके लिए कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रियंका लाओ, कांग्रेस बचाओ का नारा तक लगाते रहे हैं। खास बात यह है कि प्रियंका को प्रस्तावित लोकसभा चुनाव 2019 से करीब दो महीने पहले सक्रिय राजनीति में लाने की घोषणा की गई है। 

प्रियंका उस समय राजनीति में आई हैं, जब यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी का स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ऊपर काम का बोझ है और उन्हें एक विश्वसनीय सहयोगी की जरुरत है। इससे यह भी साफ हो गया है कि प्रियंका न केवल उत्तर प्रदेश में बल्कि अब देश के अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस के स्टार प्रचारक के तौर पर भूमिका निभा सकती हैं।
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