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Prakram Divas: लाल किले में होेने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे पीएम मोदी, भारत पर्व का करेंगे शुभारंभ
Tue, 23 Jan 2024 05:27 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 23 Jan 2024 05:27 AM IST
सार
भारत सरकार ने यह दिन सुभाष चंद्र बोस के नाम समर्पित किया है। सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी को हुआ था। उनकी जयंती के मौके पर हर साल पराक्रम दिवस मनाकर नेता जी को याद किया जाता है और आजादी के लिए उनके योगदान के लिए नमन करते हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत के स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्र बोस की जयंती को हर वर्ष पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन साहस को प्रणाम करने का है। पराक्रम दिवस के अवसर पर लाल किले पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगें, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे। बता दें, 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने एलान किया था कि अब से हर वर्ष 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी यहां से भारत पर्व का भी शुभारंभ करेंगे, जो 23 से 31 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। 26 मंत्रालय और विभाग इसमें शामिल होंगे। कार्यक्रम लाल किले के सामने राम लीला मैदान और माधव दास पार्क में होगा।
23 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं पराक्रम दिवस
भारत सरकार ने यह दिन सुभाष चंद्र बोस के नाम समर्पित किया है। सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी को हुआ था। उनकी जयंती के मौके पर हर साल पराक्रम दिवस मनाकर नेता जी को याद किया जाता है और आजादी के लिए उनके योगदान के लिए नमन करते हैं।
पराक्रम दिवस के रूप में ही क्यों मनाते हैं बोस की जंयती?
सुभाष चंद्र बोस की जयंती पराक्रम दिवस के तौर पर मनाने की भी वजह है। बोस का संपूर्ण जीवन हर युवा और भारतीय के लिए आदर्श है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए बोस इंग्लैंड पढ़ने गए लेकिन देश की आजादी के लिए प्रशासनिक सेवा का परित्याग कर स्वदेश लौट आए। यहां उन्होंने आजाद भारत की मांग करते हुए आजाद हिंद सरकार और आजाद हिंद फौज का गठन किया। इतना ही नहीं उन्होंने खुद का आजाद हिंद बैंक स्थापित किया, जिसे 10 देशों का समर्थन मिला। उन्होंने भारत की आजादी की जंग विदेशों तक पहुंचा दी।
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23 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं पराक्रम दिवस
भारत सरकार ने यह दिन सुभाष चंद्र बोस के नाम समर्पित किया है। सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी को हुआ था। उनकी जयंती के मौके पर हर साल पराक्रम दिवस मनाकर नेता जी को याद किया जाता है और आजादी के लिए उनके योगदान के लिए नमन करते हैं।
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पराक्रम दिवस के रूप में ही क्यों मनाते हैं बोस की जंयती?
सुभाष चंद्र बोस की जयंती पराक्रम दिवस के तौर पर मनाने की भी वजह है। बोस का संपूर्ण जीवन हर युवा और भारतीय के लिए आदर्श है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए बोस इंग्लैंड पढ़ने गए लेकिन देश की आजादी के लिए प्रशासनिक सेवा का परित्याग कर स्वदेश लौट आए। यहां उन्होंने आजाद भारत की मांग करते हुए आजाद हिंद सरकार और आजाद हिंद फौज का गठन किया। इतना ही नहीं उन्होंने खुद का आजाद हिंद बैंक स्थापित किया, जिसे 10 देशों का समर्थन मिला। उन्होंने भारत की आजादी की जंग विदेशों तक पहुंचा दी।
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