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जम्मू-कश्मीर: मोदी संग बैठक के लिए उतावले हो रहे 'गुपकार' नेताओं ने 'अनुच्छेद 370' को मान लिया है!

Sat, 19 Jun 2021 04:31 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 19 Jun 2021 04:31 PM IST
सार

महबूबा मुफ्ती की तरफ से कहा गया कि वे इस बैठक में शामिल होंगी। इसका क्या मतलब हुआ। अगर गुपकार के नेता पीएम की बैठक में शामिल हो रहे हैं तो उन्होंने 'अनुच्छेद 370' को समाप्त करने का समर्थन कर दिया है...

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Prime Minister Modi likely to meet Gupkar leaders and Jammu and Kashmir based political parties next week
शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : Agency

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में लंबे समय के बाद सियासी दलों की सक्रियता देखने को मिल रही है। जैसे ही उपराज्यपाल मनोज सिन्हा 'दिल्ली दरबार' में पहुंचते हैं तो जम्मू-कश्मीर के 'गुपकार' नेताओं में हलचल मच जाती है। हाल ही में मनोज सिन्हा दो बार दिल्ली आ चुके हैं। उन्होंने शुक्रवार को भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। खास बात है कि इस बैठक में एनएसए अजीत डोभाल, गृह सचिव, आईबी डायरेक्टर, रॉ चीफ और जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह के अलावा कई दूसरे अधिकारी मौजूद रहे। इसके थोड़ी देर बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के खेमे से यह बात बाहर निकल कर आई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर सकते हैं। यह बैठक जून के आखिर में संभावित है। कहा गया कि 'गुपकार' इस बैठक में भाग लेगा।

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जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा एवं राजनीतिक मामलों के विश्लेषक और प्रदेश भाजपा प्रवक्ता ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) कहते हैं, 'गुपकार' नेता इस बैठक के लिए उतावले हो रहे हैं, इसका मतलब उन्होंने 'अनुच्छेद 370' की समाप्ति को मान लिया है। प्रधानमंत्री के साथ अगर बैठक होती है, तो उसमें अमरनाथ यात्रा को लेकर चर्चा होगी। जम्मू-कश्मीर के विकास का खाका राजनीतिक दलों के सामने रखा जाएगा।
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बता दें कि पिछले सात-आठ माह से जम्मू-कश्मीर में 'गुपकार' समूह की राजनीतिक गतिविधियां देखने को नहीं मिल रही थीं। इस माह एकाएक वहां पर सक्रियता देखने को मिली है। 'गुपकार' समझौते में शामिल नेता अब खुलकर बोलने लगे हैं। 'नेशनल कांफ्रेंस' और 'पीडीपी', जम्मू-कश्मीर की परीसीमन प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं। हालांकि ये नेता यह बात भी कह रहे हैं कि केंद्र को कश्मीरियों का दिल जीतना है तो उन्हें वह सब कुछ लौटाना होगा जो पांच अगसत 2019 को कश्मीरियों से छीना गया है। इससे पहले 'गुपकार' समूह के नेता अनुच्छेद 370 को लेकर सरकार का बहिष्कार करने की मुद्रा में रहे हैं।

अब्दुल्ला का कहना था कि जब तक जम्मू-कश्मीर में पुरानी व्यवस्था यानी अनुच्छेद 370 की बहाली नहीं हो जाती है, तब तक वे केंद्र सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे। चूंकि अब जम्मू-कश्मीर में परीसीमन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए राजनीतिक दलों से बातचीत की जाएगी। 'नेशनल कॉन्फ्रेंस' और 'पीडीपी' जैसे दलों ने परीसीमन प्रक्रिया में शामिल होने का मन बना लिया है। सबसे पहले पीएजीडी के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला इसके लिए तैयार हुए थे। सूत्रों का कहना है कि गुपकार की ताजा बैठक इसलिए बुलाई गई थी, क्योंकि अब्दुल्ला, परीसीमन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए दूसरे सहयोगियों का मन जानना चाह रहे थे। अगर गुपकार के बाकी नेता इसके लिए तैयार नहीं होते तो अब्दुल्ला भी परीसीमन प्रक्रिया का बहिष्कार कर देते।

पिछले दिनों जब मनोज सिन्हा दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे, तो कथित तौर से गुपकार में शामिल नेताओं द्वारा यह अफवाह फैला दी गई कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर का विभाजन करने जा रही है। जम्मू को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की तैयारी हो रही है। हालांकि बाद में ऐसा कुछ नहीं हुआ।

प्रदेश भाजपा प्रवक्ता और ब्रिगेडियर (रिटा.) अनिल गुप्ता ने बताया, सबसे पहले यह देखें कि पीएम की बैठक की खबर कहां से आई है। दिल्ली में अधिकारिक तौर किसी ने यह बात नहीं की है। पीडीपी से यह खबर बाहर निकली है। महबूबा मुफ्ती की तरफ से कहा गया कि वे इस बैठक में शामिल होंगी। इसका क्या मतलब हुआ। अगर गुपकार के नेता पीएम की बैठक में शामिल हो रहे हैं तो उन्होंने 'अनुच्छेद 370' को समाप्त करने का समर्थन कर दिया है। इससे पहले तो वे यही कह रहे थे कि अनुच्छेद 370 को खत्म किए बिना वे बातचीत नहीं करेंगे। अब सरकार ने तो कह दिया है कि अनुच्छेद 370 को वापस नहीं लिया जाएगा।

वहीं प्रधानमंत्री के साथ अगर बैठक होती है तो दो मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। एक, अमरनाथ यात्रा का मुद्दा है। जम्मू से जुड़े कई धार्मिक संगठन जैसे विहिप, शिवसेना व बजरंग दल आदि यह मांग कर रहे हैं कि सुरक्षित यात्रा शुरू की जाए। सरकार ने इस पर फैसला नहीं लिया है। हो सकता है कि पीएम मोदी इस मामले में जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों से बात करें। उन्हें विश्वास में लेकर अमरनाथ यात्रा शुरू की जाए। दूसरा मुद्दा, जम्मू-कश्मीर के विकास को लेकर है। अभी वहां पर विकास के कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। आगे विकास को किस तरह से गति प्रदान की जाए, राजनीतिक दलों से इस सम्बंध में राय ली जा सकती है।

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