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भारतीय वायुसेना की शान ने रचा नया इतिहास: सूर्यकिरण टीम के 30 साल पूरे, बीदर में होगा भव्य समारोह

Sun, 24 May 2026 06:00 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 24 May 2026 06:00 AM IST
सार

भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम 26 मई को अपने 30 साल पूरे करने जा रही है। कर्नाटक के बीदर में विशेष समारोह आयोजित होगा। टीम ने अब तक देश-विदेश में 800 से ज्यादा हवाई शो किए हैं। आधुनिक हॉक मार्क-132 विमानों से लैस यह टीम भारतीय वायुसेना की ताकत और अनुशासन का प्रतीक बन चुकी है। 

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Pride of Indian Air Force Creates New History Suryakiran Team Completes 30 Years  Ceremony Held in Bidar
आसमान के सूरमाओं के 30 साल पूरे। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठित सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम अपने शानदार सफर के 30 साल पूरे करने जा रही है। देश और दुनिया के आसमान में अपनी हैरतअंगेज कलाबाजियों से पहचान बनाने वाली यह टीम 26 मई को कर्नाटक के बीदर एयरबेस में विशेष समारोह के साथ अपना स्थापना दिवस मनाएगी। वायुसेना की यह टीम पिछले तीन दशकों से भारतीय वायुसेना की ताकत, अनुशासन और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करती रही है। सूत्रों के अनुसार समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी हिस्सा ले सकते हैं और संभव है कि वह खुद विमान उड़ाते हुए नजर आएं।
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सूर्यकिरण टीम का सफर कैसे शुरू हुआ?
सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम का गठन 27 मई 1996 को कर्नाटक के बीदर स्थित एयरफोर्स स्टेशन में किया गया था। शुरुआत में टीम ने किरण मार्क-2 विमानों के साथ उड़ान भरना शुरू किया। इसके बाद सितंबर 1996 में कोयंबटूर में टीम ने अपना पहला सार्वजनिक हवाई प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। साल 2006 में इस टीम को औपचारिक रूप से 52 स्क्वाड्रन ‘शार्क्स’ के रूप में पहचान मिली। वायुसेना के लिए यह टीम केवल प्रदर्शन का हिस्सा नहीं रही, बल्कि देश की हवाई ताकत और पेशेवर क्षमता का प्रतीक बन गई।
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आधुनिक विमानों ने टीम की ताकत को कैसे बढ़ाया?
साल 2015 में सूर्यकिरण टीम ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए आधुनिक हॉक मार्क-132 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया। इन विमानों के आने के बाद टीम की गति, संतुलन और प्रदर्शन क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिला। इन जेट विमानों की मदद से टीम और ज्यादा सटीक तथा जटिल हवाई करतब दिखाने लगी। यही कारण है कि सूर्यकिरण टीम आज दुनिया की चुनिंदा बेहतरीन एरोबेटिक टीमों में गिनी जाती है।
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 देश-विदेश में सूर्यकिरण टीम ने कैसी पहचान बनाई?
बीते 30 वर्षों में सूर्यकिरण टीम 800 से अधिक हवाई शो कर चुकी है। चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, लाओस, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में टीम ने अपने प्रदर्शन से दुनिया को प्रभावित किया। हाल ही में चेन्नई तट पर हुए एयर शो को देखने रिकॉर्ड 17 लाख लोग पहुंचे थे। वहीं साल 2026 में टीम ने पहली बार हिमालयी क्षेत्र के आसमान में भी अपने करतब दिखाए। सूर्यकिरण टीम को भारतीय वायुसेना का “हवाई राजदूत” भी कहा जाता है क्योंकि यह टीम हर प्रदर्शन में देश की शक्ति और गौरव का संदेश देती है।
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