राष्ट्रपति चुनाव: विपक्ष में दरार, JDU ने कहा- एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने में गुरेज नहीं
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मोदी सरकार और भाजपा राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष की एकजुटता में दरार डालने में सफल हो गई है। अभी तक भाजपा की ओर से कोई उम्मीदवार नहीं बताया गया है। मगर विपक्ष के कई दलों का मानना है कि अगर कोई बेहतर और सेक्यूलर चेहरे वाला उम्मीदवार का नाम सामने आता है। तो उस नाम पर सर्वसम्मति बनाई जा सकती है। मगर वामदल ने कांग्रेस को कह दिया है कि विपक्ष को राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एनडीए के उम्मीदवार पर सर्वसम्मति बनाने के बजाय चुनाव लड़ने पर ध्यान देना चाहिए। वामदलों ने जनता दल युनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल से इस मुद्दे पर समर्थन जुटाने की कोशिश की है। जदयू और राजद ने अभी वामदलों को कोई वायदा नहीं किया है।
बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने दिल्ली में जदयू नेताओं को कहा है कि अगर सरकार की ओर से कोई बेहतर उम्मीदवार आता है। तो उन्हें एनडीए के उम्मीदवार को समर्थन देने में कोई गुरेज नहीं है। वहीं कांग्रेस, एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस ने संकेत दिए है कि सरकार की ओर से अगर कोई बेहतर उम्मीदवार उतारा जाता है तो वे उसे अपना समर्थन दे सकता है। भले ही एनडीए की ओर से अभी तक नाम पर सस्पेंस है। मगर विपक्ष के सूत्रों का कहना है कि अगर सुषमा स्वराज का नाम एनडीए की ओर से बढ़ाया जाता है तो विपक्ष के कई दल उनको समर्थन करने के लिए तैयार थे।
दरअसल, कांग्रेस समेत कई दलों का मानना है कि राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए का पलड़ा भारी है। लिहाजा, किसी एक उम्मीदवार पर सर्वसम्मति होने की स्थिति में विपक्ष हारता हुआ नजर नहीं आएगा। मगर दूसरी तरफ वादमलों का कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा चाहे जो हो, विपक्ष को अपना उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए और सरकार के खिलाफ एकजुट नजर आना चाहिए। महात्मा गांधी के परपोते गोपाल कृष्ण गांधी को लेकर वामदल अडिग है।
माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कांग्रेस को कहा है कि जब सरकार के उम्मीदवार पर ही सहमति बनानी है तो आखिर क्यों विपक्ष की एकजुटता के लिए इतनी कसरत की। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को कहा कि संसद के अंदर और बाहर एकजुटता के लिए कांग्रेस को चाहिए कि वे आगे खड़े होकर भाजपा के उम्मीदवार का विरोध करें।
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर सर्वसम्मति बनाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बाकायदा मुलाकात की थी। उसके बाद कांग्रेस ने कलाम नाम पर सहमति जता दी थी। ज्यादातर दल कलाम के नाम पर सहमत थे। मगर उस समय भी वामदलों ने इसका विरोध किया था और उनके खिलाफ चुनाव में आजाद हिंद फौज से जुड़ी कैप्टन विजयलक्ष्मी सहगल को खड़ा कर दिया था।