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राष्ट्रपति ने जताई चिंता, कहा- नोटबंदी से आ सकती है अस्थायी मंदी

Fri, 06 Jan 2017 09:34 AM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
एजेंसी/ नई दिल्ली Updated Fri, 06 Jan 2017 09:34 AM IST
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 President says demonetisation drive may temporarily slow down economy
फाइल फोटो
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नोटबंदी के बाद देश के आर्थिक माहौल में अस्थायी मंदी की आहट महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बृहस्पतिवार को आगाह किया कि इससे गरीबों को हो रही परेशानियां दूर करने के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है। 
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राष्ट्रपति भवन से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये राज्यपालों और उपराज्यपालों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि काला धन और भ्रष्टाचार मिटाने के लिए किए गए नोटबंदी के फैसले से अस्थायी मंदी भी आ सकती है। उन्होंने कहा, ‘हम सभी को गरीबों की पीड़ा दूर करने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है जिन्हें इस लड़ाई में लंबे समय तक झेलना पड़ सकता है।’ हालांकि उन्होंने गरीबी उन्मूलन और गरीबों को उनका हक दिलाने के लिए की गई इस पहल की सराहना की लेकिन कहा कि गरीब इतने लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकते। 
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उन्होंने कहा, ‘गरीबों को तत्काल राहत पहुंचाने की जरूरत है ताकि वे भी देश से भुखमरी, बेरोजगारी और शोषण खत्म करने के लिए चलाई गई इस राष्ट्रव्यापी मुहिम में सक्रिय भागीदारी कर सकें। प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में की गई पैकेज की घोषणा उन्हें थोडी़ राहत देगी।’ इस मौके पर उन्होंने इस साल सात राज्यों में होने वाले चुनाव तथा पांच राज्यों में घोषित चुनाव तारीखों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की प्रक्रिया ने दुनियाभर में हमारे लोकतंत्र को सबसे आकर्षक बनाया है। चुनाव राजनीतिक माहौल के प्रति लोगों की धारणाओं, मूल्यों और भरोसे को जाहिर करता है।’ 
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'तीखी बहस से बिगड़ सकता है समाज का सांप्रदायिक सौहार्द'

 President says demonetisation drive may temporarily slow down economy
फाइल फोटो

राष्ट्रपति ने चुनाव के दौरान प्रतिस्पर्धी लोकप्रियता, चुनावी तिकड़म और वोट बैंक की राजनीति के प्रति सचेत करते हुए कहा कि तीखी बहस से समाज का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है। अलग-अलग समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखना जरूरी है। कई बार निहित स्वार्थ के कारण भी सौहार्द की परख की जाती है। सांप्रदायिक ताकतें अपना सिर उठा सकती हैं। ऐसे किसी चुनौतीपूर्ण हालात से निपटने के लिए सख्ती से कानून का पालन करना होगा।

उन्होंने कहा कि राज्यपालों और उपराज्यपालों को जनता का भरपूर सम्मान मिलता है और वे सामाजिक तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘आपसे संवाद और आपके बहुमूल्य सुझाव इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।’

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