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नागरिकता बिल: राष्ट्रपति की मंजूरी से बना कानून, तीन देशों के अल्पसंख्यक शरणार्थी बनेंगे 'भारतीय'

Fri, 13 Dec 2019 11:32 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 13 Dec 2019 11:32 AM IST
सार

  • 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए अल्पसंख्यक अब अवैध घुसपैठिए नहीं
  • पूर्वोत्तर में जारी भारी हिंसा के बीच गुरुवार देर रात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी
  • गजट प्रकाशन के साथ ही लागू हो गया नया कानून, इससे नागरिकता अधिनियम 1955 में होगा बदलाव

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President Ram Nath Kovind gives his assent to The Citizenship Amendment Act 2019
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

विस्तार

पूर्वोत्तर में जारी भारी हिंसा के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा से पास होने के अगले ही दिन नागरिकता संशोधन बिल-2019 को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही यह कानून बन गया और पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता साफ हो गया। विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद सरकार ने सोमवार को लोकसभा और बुधवार को राज्यसभा में यह बिल पास करवा लिया था।

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बृहस्पतिवार देर रात जारी अधिसूचना के मुताबिक यह कानून गजट प्रकाशन के साथ ही लागू हो गया। नया कानून नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव करेगा। इसके तहत 31 दिसंबर, 2014 तक धर्म के आधार पर प्रताड़ना के चलते पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को अवैध घुसपैठिया नहीं माना जाएगा, बल्कि उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी।
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मौजूदा कानून के मुताबिक किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल यहां में रहना अनिवार्य था। नए कानून में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह अवधि घटाकर छह साल कर दी गई है। मौजूदा कानून के तहत भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती थी और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने के प्रावधान था।

अदालत जाने की तैयारी में कांग्रेस

कांग्रेस इस विधेयक के विरोध में अदालत जाने की तैयारी कर रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा में विधेयक का भारी विरोध करने वाले कपिल सिब्बल से जब पूछा गया कि क्या वह इसे अदालत में चुनौती देंगे तो उन्होंने कहा कि देखेंगे।

वहीं अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि विधेयक को अदालत में चुनौती देने की संभावना है। पी चिंदबरम ने भी ट्वीट करके विधेयक को अदालत में चुनौती देने के संकेत दिए हैं।

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