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राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अच्छे माहौल में हुई चर्चा, विपक्ष ने एक सुर में कृषि कानून वापस लेने को कहा

Fri, 05 Feb 2021 03:07 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 05 Feb 2021 03:07 AM IST
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President Ram Nath Kovind address Rajya Sabha discussion in good environment Opposition asked to withdraw agriculture bill 2020
Rajya Sabha - फोटो : iStock

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में बृहस्पतिवार को अच्छे माहौल में सार्थक चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने जहां किसानों के मुद्दे पर मोदी सरकार पर निशाना साधा, वहीं सरकार की ओर से पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किसान समेत सरकार की विभिन्न योजनाओं, नीतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सभी प्रधानमंत्रियों ने बेहतर काम किया, लेकिन नरेंद्र मोदी का तरीका अलग है। उन्होंने कहा कि हमें बहुमत खैरात में नहीं मिला है। विपक्ष की कानून वापसी की मांग उचित नहीं है।

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चर्चा के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के ठीक बाद दिग्विजय का नंबर आया तो सदन ठहाकों से गूंज उठा। हालांकि सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि इसमें जानबूझ कर कुछ नहीं है, व्यवस्था के तहत ही उनका नंबर आया है। इस दौरान हंसी-मजाक से सदन का माहौल हलका हो गया। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कृषि कानूनों को काला कानून बताते हुए सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि इस कानून से आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ेगी। विपक्षी सदस्यों ने किसान आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के लिए एक मिनट का मौन भी रखा।
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धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार किसानों को एमएसपी उपलब्ध कराने को वचनबद्ध है। विपक्ष ने साठ सालों से अधिक राज किया, लेकिन एमएसपी पर कानून नहीं बनाया। पीएम मोदी ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कीं। कृषि संबंधी कानून बनाया ताकि किसानों को एमएसपी मूल्य से डेढ़ गुना से अधिक दाम मिल सके। केंद्र ने जो कदम उठाए हैं उनसे सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास सुनिश्चित हुआ है।
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मनोनीत सांसद स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि 'सरकार ने जो कृषि कानून बनाए हैं, उनका उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों के बीच बड़े अंतर को दूर करना है।'

सिंधिया ने इमरजेंसी के लिए कांग्रेस पर हमला बोला
भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कृषि कानून और कोरोना प्रबंधन पर मोदी सरकार की जमकर तारीफ की। कहा कि योग्य नेतृत्व में देश महामारी से उबर गया है। इमरजेंसी का जिक्र करते हुए उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा, जब मैं उधर था तब भी गलत को गलत कहा और अब इधर से भी उसे गलत कह रहा हूं।

विपक्ष का वार, वाह महाराज वाह : दिग्विजय
सिंधिया के बाद कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का नंबर आया तो सदन में ठहाका गूंज उठा। इस पर सभापति ने कहा कि व्यवस्था के तहत ही उनका नंबर आया है। दिग्विजय ने कहा, सभापति महोदय मैं आपके माध्यम से सिंधिया जी को बधाई देना चाहता हूं। जितने अच्छे ढंग से वे यूपीए सरकार का पक्ष रखते थे उसी तरह आज भाजपा सरकार का पक्ष रखा है। आपको बधाई हो, वाह महाराज वाह। इस पर सिंधिया ने हाथ जोड़ते हुए दिग्विजय से कहा कि सब आपका ही आशीर्वाद है।

प्रजा की बात मानने से शासक छोटा नहीं हो जाता : हुड्डा
कांग्रेस सांसद दिपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार के साथ किसानों की बेनतीजा बातचीत के 11 राउंड हुए। अब तक 194 किसानों ने जान दी है, लेकिन सरकार की ओर से संवेदना का एक शब्द नहीं निकला। उन्होंने कहा कि अपनी प्रजा की बात मानने से किसी शासक की हार नहीं होती या छोटा नहीं हो जाता। सरकार बड़ा दिल दिखाते हुए किसान विरोधी कानून और मुकदमे वापस ले।

जहां जरूरत वहां करें आंखें लाल : राजद
राजद सांसद मनोज झा ने सरकार से किसानों का दर्द समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमने कभी पड़ोसी देशों के लिए ऐसा नहीं सुना। लाल आंखें वहां होनी चाहिए, लेकिन आंखें लाल कहां कर रहे हैं। किसान आपके अपने हैं। झा ने कहा कि संसद का भी वर्ग चरित्र बदल गया है। पहले सदन में किसान और किसानी से जुड़े सदस्य होते थे। तब अपने लोग भी सरकार के खिलाफ खड़े हो जाते थे। बिहार में एमएसपी 2006 में समाप्त किया गया था जिसके बाद वहां किसान मजदूर बनकर रह गया है।

कुछ तत्वों ने किसानों को बदनाम किया : देवगौड़ा
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा कि कुछ समाज विरोधी तत्वों ने किसान आंदोलन के नाम पर देश के अन्नदाताओं को बदनाम किया है। सरकार को किसानों के साथ बैठकर इस मामले का समाधान निकालना चाहिए।


टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि कृषि कानूनों को पारित कराने से पहले सरकार को इसे प्रवर समिति को भेजना चाहिए था। कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए नया विधेयक लाना चाहिए।

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