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राफेल: राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण में मचा घमासान- दोनों ने एक दूसरे से मांगा इस्तीफा
Sun, 06 Jan 2019 07:25 PM IST
आसिम खान
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Sun, 06 Jan 2019 07:25 PM IST
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रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को एक लाख करोड़ रुपये का सरकारी ऑर्डर देने के मामले में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर संसद में ‘झूठ’ बोलने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि वह सदन में अपने बयान के समर्थन में या तो दस्तावेज पेश करें या इस्तीफा दें।
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राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए सीतारमण ने कहा, यह शर्म की बात है कि आईएनसी इंडिया के अध्यक्ष झूठ फैला रहे हैं और देश को देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि एचएएल ने 26570.8 करोड़ (2014 से 2018 के बीच) के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं जबकि 73000 करोड़ का अनुबंध पाइपलाइन में है। क्या झूठ फैलाने के आरोप में राहुल गांधी देश और संसद से माफी मांगेंगे और इस्तीफा देंगे?
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It's a shame that the president of @INCIndia is spreading lies nd
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misleading the country.HAL has signed contracts worth 26570.8Cr (Between 2014 & 2018) nd contracts worth 73000Cr are in the pipeline.Will @RahulGandhi apologise to the country from the floor of the house nd resign? pic.twitter.com/PRWEMFUjml — NSitharamanOffice (@nsitharamanoffc) January 6, 2019
बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को एक लाख करोड़ रुपये का सरकारी ऑर्डर देने के मामले में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर संसद में ‘झूठ’ बोलने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि वह सदन में अपने बयान के समर्थन में या तो दस्तावेज पेश करें या इस्तीफा दें। गांधी ने सरकार पर निशाना तब साधा है जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ‘‘एचएएल के पास एक लाख करोड़ रुपये में से एक भी रुपया नहीं आया है। दावे के विपरीत अब तक एक भी ऑर्डर पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं।’’
मीडिया रिपोर्ट में अपने दावे के समर्थन में एचएएल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी को उद्धृत किया गया है। गांधी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ‘‘जिस रिपोर्ट का आप हवाला दे रहे हैं उसे पूरा पढ़ें।’’ रक्षा मंत्री ने ट्विटर पर उस मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि उन्होंने संसद में यह नहीं कहा है कि एचएएल को दिए गए ऑर्डर पर हस्ताक्षर हो गए हैं। रिपोर्ट के साथ ट्वीट किया, ‘‘ बहरहाल, लोकसभा का रिकॉर्ड दिखाता है कि सीतारमण ने यह दावा नहीं किया कि ऑर्डर पर हस्ताक्षर हो गए हैं और कहा कि उनपर काम चल रहा है।’’
सीतारमण का जवाब कांग्रेस अध्यक्ष के उस हमले के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था,‘‘ जब आप झूठ बोलते हैं, तो उसके समर्थन में आपको और झूठ बोलने पड़ते हैं। राफेल पर प्रधानमंत्री के झूठ का बचाव करने के लिए रक्षा मंत्री ने संसद में झूठ बोला।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कल रक्षा मंत्री संसद में एचएएल को एक लाख करोड़ रुपये का ऑर्डर देने का दस्तावेज पेश करें या इस्तीफा दें।’’ सीतारमण के दफ्तर ने बाद में ट्वीट किया, ‘‘ प्रिय श्री राहुल गांधी, ऐसा लगता है कि आपको ए बी सी... से शुरू करने की वास्तव में जरूरत है। आपके जैसे लोग जिनपर जनता को गुमराह करने का भूत सवार है, वह लेख को पढ़े बिना ही उससे उद्धृत कर देते हैं।’’
रक्षा मंत्री के कार्यालय ने गांधी पर ‘झूठ’ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि एचएएल ने 2014 से 2018 के बीच 26,570.8 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं और 73,000 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर होने हैं। उनके दफ्तर ने कहा, ‘‘ क्या राहुल गांधी सदन के पटल से देश से माफी मांगेंगे और इस्तीफा देंगे?’’
कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा रही है कि उसने फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदे के तहत एचएएल को ऑफसेट अनुबंध से वंचित कर दिया। सरकार इन आरोपों का खंडन किया है।
उधर, भाजपा नीत राजग सरकार ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उसने अपने शासनकाल में एचएएल की मदद नहीं की और सरकार अब रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम को मजबूत कर रही है। गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने ‘सूट-बूट’ वाले दोस्तों की मदद करने के लिए एचएएल को कमजोर किया है।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने रविवार को ट्वीट किया, ‘‘झूठ बोलने वाली रक्षा मंत्री के झूठ का पर्दाफाश हो गया। रक्षा मंत्री ने दावा किया था कि एचएएल को एक लाख करोड़ रुपये की खरीद के ऑर्डर दिए गए हैं। एचएएल का कहना है कि उसे एक पैसा तक नहीं मिला क्योंकि एक भी ऑर्डर पर हस्ताक्षर नहीं किए गए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पहली बार, एचएएल वेतन देने के लिए 1000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने को मजबूर है।’’