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President Murmu: राष्ट्रपति मुर्मू ने दी सलाह, सतत विकास हासिल करने के लिए दूसरों को आदिवासियों से सीखना चाहिए
Tue, 13 Jun 2023 12:36 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 13 Jun 2023 12:36 AM IST
सार
राष्ट्रपति भवन में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने शिक्षा के महत्व पर ज्यादा जोर देते हुए उन्हें प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (फाइल फोटो)।
- फोटो : Twitter/President Of India
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विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि आदिवासियों ने मातृभूमि और इसकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा की रक्षा के लिए बहुत सारे बलिदान दिए हैं। साथ ही उन्होंने अन्य लोगों से सतत विकास हासिल करने के लिए उनके उदाहरण से सीखने की अपील की।
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राष्ट्रपति भवन में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने शिक्षा के महत्व पर ज्यादा जोर देते हुए उन्हें प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
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राष्ट्रपति भवन ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ने सभी 75 पीवीटीजी के प्रतिनिधियों से एक साथ मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि उनमें से कई पहली बार अपने गांवों से बाहर निकले हैं।उन्होंने पीवीटीजी समुदाय का समर्थन करने के लिए सरकार के प्रयासों जैसे एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में आरक्षित सीटों के प्रावधान और राष्ट्रीय फैलोशिप और विदेशी छात्रवृत्ति योजना पर प्रकाश डाला। राष्ट्रपति मुर्मू ने पीवीटीजी महिलाओं को जनजातीय महिला सशक्तिकरण योजना सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
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बयान में कहा गया, "राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों ने मातृभूमि और इसकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा की रक्षा के लिए बहुत बलिदान दिया है। सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम सभी आदिवासी समाज से सीख सकते हैं।"
जनजातीय उप-योजना के महत्व पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 41 मंत्रालय और विभाग अपने बजट का एक हिस्सा पीवीटीजी सहित जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए आवंटित करते हैं। उन्होंने पीवीटीजी के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री पीवीटीजी विकास मिशन के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त की। राष्ट्रपति मुर्मू ने 2047 तक सिसिकल सेल एनीमिया रोग (असामान्य हीमोग्लोबिन के कारण होने वाली रक्त की एक आनुवंशिक विकार) को खत्म करने के लिए मौजूदा बजट में घोषित अभियान के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए पद्म पुरस्कार प्रदान करने वाले आदिवासी समुदायों के प्रतिभाशाली व्यक्तियों की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा, यह सभी नागरिकों, विशेष रूप से पीवीटीजी सहित आदिवासी लोगों का कर्तव्य और महत्वाकांक्षा है कि वे अपनी पहचान बनाए रखते हुए और अपने अस्तित्व की रक्षा करते हुए उनका विकास सुनिश्चित करें।
भारत में विशेष रूप से 75 कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की पहचान की गई है, जो देश में सबसे अधिक वंचित और कमजोर आबादी में से हैं। इन पीवीटीजी की पहचान सामाजिक आर्थिक स्थिति, सांस्कृतिक विशिष्टता, भौगोलिक अलगाव और प्रौद्योगिकी के पूर्व-कृषि स्तर जैसे विशिष्ट मानदंडों के आधार पर की जाती है। सरकार उनकी विशिष्ट पहचान की रक्षा करने और उनकी सेहत सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान और लक्षित कल्याणकारी उपाय प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य उन्हें शोषण से बचाना है।