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Delhi: राष्ट्रपति भवन में विज्ञान पुरस्कारों का अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति ने प्रदान किए विज्ञान रत्न पुरस्कार
Thu, 22 Aug 2024 04:37 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 22 Aug 2024 04:37 PM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को प्रसिद्ध जैव रसायनज्ञ और बेंगलुरू में मौजूद भारतीय विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक गोविंदराजन पद्मनाभन को भारत के सर्वोच्च विज्ञान पुरस्कार - विज्ञान रत्न पुरस्कार - से सम्मानित किया।
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राष्ट्रपति भवन में विज्ञान पुरस्कारों का अलंकरण समारोह
- फोटो : PTI
विस्तार
राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडपम में आयोजित विज्ञान पुरस्कारों का अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 13 विज्ञान श्री पुरस्कार, 18 विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और एक विज्ञान टीम पुरस्कार भी प्रदान किए। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रसिद्ध जैव रसायनज्ञ और बेंगलुरू में मौजूद भारतीय विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक गोविंदराजन पद्मनाभन को भारत के सर्वोच्च विज्ञान पुरस्कार - विज्ञान रत्न पुरस्कार - से सम्मानित किया।
जैव रसायनज्ञ गोविंदराजन पद्मनाभन सम्मानित
बता दें कि प्रो. गोविंदराजन पद्मनाभन को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आजीवन उपलब्धि और योगदान के लिए विज्ञान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रो. गोविंदराजन पद्मनाभन भारत में आणविक जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान में अग्रणी हैं।
चंद्रयान-3 की टीम विज्ञान टीम पुरस्कार से सम्मानित
इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चंद्रयान-3 टीम को विज्ञान टीम पुरस्कार सम्मानित किया। ये पुरस्कार चंद्रयान-3 मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी. वीरमुथुवेल ने राष्ट्रपति के हाथों प्राप्त किया।
इन्हें मिला विज्ञान श्री पुरस्कार
बता दें कि पिछले साल सरकार ने सभी मौजूदा विज्ञान पुरस्कारों को खत्म करने के बाद इन नए पुरस्कारों - राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार - की शुरुआत की थी। सभी पुरस्कार विजेताओं को अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए एक पदक और प्रशस्ति पत्र दिया गया।
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जैव रसायनज्ञ गोविंदराजन पद्मनाभन सम्मानित
बता दें कि प्रो. गोविंदराजन पद्मनाभन को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आजीवन उपलब्धि और योगदान के लिए विज्ञान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रो. गोविंदराजन पद्मनाभन भारत में आणविक जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान में अग्रणी हैं।
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President Droupadi Murmu presents Vigyan Ratna Award to Prof. Govindarajan Padmanabhan for lifetime achievement and contributions in the field of Science and Technology. Prof. Padmanabhan is a pioneer in molecular biology and biotechnology research in India. pic.twitter.com/NyMbP0cFrK
विज्ञापन विज्ञापन— President of India (@rashtrapatibhvn) August 22, 2024
चंद्रयान-3 की टीम विज्ञान टीम पुरस्कार से सम्मानित
इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चंद्रयान-3 टीम को विज्ञान टीम पुरस्कार सम्मानित किया। ये पुरस्कार चंद्रयान-3 मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी. वीरमुथुवेल ने राष्ट्रपति के हाथों प्राप्त किया।
President Droupadi Murmu presents Vigyan Team Award to Team Chandrayaan-3 in the field of Space Science and Technology. The successful completion of the Chandrayaan-3 mission is one of the greatest scientific achievements in the nation and represents contributions in different… pic.twitter.com/apBsfeH9sc
— President of India (@rashtrapatibhvn) August 22, 2024
इन्हें मिला विज्ञान श्री पुरस्कार
- अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम, निदेशक, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बंगलूरू
- आनंदधर्मकृष्णन सी, निदेशक, राष्ट्रीय अंतःविषय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम
- आवेश कुमार त्यागी, निदेशक, रसायन विज्ञान समूह, भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान
- सैयद वजीह अहमद नकवी, प्रोफेसर, सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ
- उमेश वार्ष्णेय, जीवविज्ञानी, भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरू
- जयंत भालचंद्र उदगांवकर, प्रोफेसर, भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्था, पुणे
- संजय बिहारी, निदेशक, श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी
- आदिमूर्ति आदि, प्रोफेसर, आईआईटी-कानपुर
- राहुल मुखर्जी, आईआईएम-कोलकाता
- नबा कुमार मंडल, भौतिक विज्ञानी, साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स
- लक्ष्मणन मुथुस्वामी, भारतीदासन विश्वविद्यालय, तिरुचिरापल्ली
- रोहित श्रीवास्तव, प्रोफेसर, आईआईटी बॉम्बे
बता दें कि पिछले साल सरकार ने सभी मौजूदा विज्ञान पुरस्कारों को खत्म करने के बाद इन नए पुरस्कारों - राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार - की शुरुआत की थी। सभी पुरस्कार विजेताओं को अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए एक पदक और प्रशस्ति पत्र दिया गया।