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Hindi News ›   India News ›   President Kovind given assent to Fugitive Economic Offenders Act 2018

अमल में आया भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून, मोदी-माल्या जैसे अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

Sun, 05 Aug 2018 07:46 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sun, 05 Aug 2018 07:46 PM IST
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President Kovind given assent to Fugitive Economic Offenders Act 2018

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून, 2018 पर मुहर लगा दी है। नए कानून के जरिये नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे बड़े आर्थिक अपराधियों को देश छोड़कर भागने और कानून से बच निकलने से रोका जा सकेगा।

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नए कानून के तहत अधिकृत विशेष अदालत को किसी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उसकी बेनामी व अन्य संपत्ति जब्त करने का अधिकार होगा। जब्त करने के आदेश की तारीख से सभी संपत्तियों का अधिकार केंद्र सरकार के पास चला जाएगा। लोकसभा ने इस विधेयक को 19 जुलाई, जबकि राज्यसभा ने 25 जुलाई को इस विधेयक को पारित कर दिया था। 
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कानून के तहत न्यूनतम 100 करोड़ रुपये की सीमा को उचित ठहराते हुए वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में कहा था कि इसका मकसद बड़े अपराधियों को देश छोड़कर भागने से रोकना और पकड़ना है। अदालतों में मामले बढ़ाना नहीं है। कानून के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जांच एजेंसी का काम करेगा। उन्होंने कहा था कि जब्त संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर अभी फैसला नहीं किया गया है। 
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किसे माना जाता है भगोड़ा आर्थिक अपराधी

अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ 100 करोड़ रुपये या अधिक के आर्थिक अपराधों में शामिल होने पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया हो। वह व्यक्ति मुकदमे से बचने के लिए देश छोड़कर फरार हो गया हो, तो उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी माना जाता है।   

तीन और बिल को भी मिली मंजूरी

राष्ट्रपति कोविंद ने निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट (संशोधन) अधिनियम-2018, स्टेट बैंक (रिपील-एमेंडमेंट) अधिनियम-2018 और विशेष राहत (संशोधन) अधिनियम-2018 को भी मंजूरी दी। निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट (संशोधन) अधिनियम-2018 के तहत कोर्ट चेक बाउंस के मामलों में आदेश दे सकता है कि चेक जारी करने वाला आहर्ता को अंतरिम मुआवजे के तौर पर राशि का 20 फीसदी भुगतान करे।


स्टेट बैंक (रिपील-एमेंडमेंट) अधिनियम-2018 दो पुराने कानूनों स्टेट बैंक ऑफ (अनुषंगी बैंक) अधिनियम-1959 और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद कानून-1956 की जगह लेगा, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम-1955 में संशोधन करेगा।

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