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उपराज्यपाल की बढ़ी ताकत: राष्ट्रपति ने दी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संशोधन विधेयक को मंजूरी
Sun, 28 Mar 2021 10:34 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sun, 28 Mar 2021 10:34 PM IST
सार
- राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब यह विधेयक अब कानून बन गया है।
- इससे दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियां और बढ़ गईं हैं।
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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद
- फोटो : ANI
विस्तार
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (संशोधन) विधेयक-2021 को रविवार को मंजूरी दे दी। विधेयक को हाल ही में संसद के बजट सत्र में मंजूरी दी गई थी। इसमें दिल्ली के उपराज्यपाल के अधिकार बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।
राज्यसभा में विधेयक पर बहस के दौरान जमकर हंगामा हुआ था। कांग्रेस सहित चार दलों ने विरोध करते हुए सदन की कार्रवाई से वॉकआउट किया था, लेकिन विधेयक के पक्ष में बहुमत होने के बाद उप सभापति ने उसे पास कर दिया था। इससे पहले 22 मार्च को ही बिल को लोकसभा में पास कर दिया गया था।
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भाजपा ने दिल्ली की जनता को धोखा दिया: केजरीवाल
लोकसभा से बिल पास होने के बाद मुख्यमंत्री ने इस पर प्रतिक्रया जाहिर करते हुए ट्विट किया था कि भाजपा ने दिल्ली की जनता को धोखा दिया है। जीतने वालों से शक्तियां छीनकर हारने वालों को दे दिया है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने विधेयक को लोकतंत्र की हत्या सरीखा बताया था।
बिल पास होने से होंगे ये बदलाव
विधेयक के कानून बनने से एक बार फिर दिल्ली सरकार को कोई भी नियम कानून या योजना लाने से पहले उपराज्यपाल की सहमति लेनी होगी। ऐसे में अगर कोई योजना लटकती है तो दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल आमने-सामने होंगे। आशंका जाहिर की जा रही है कि दिल्ली में 2018 से पहले की कहानी दोबारा दुहराई जाने वाली है। अगर सरकार और उपराज्याल के बीच मतभेद होगा तो योजनाएं लागू करना आसान नहीं होगा।
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President Ram Nath Kovind gives assent to National Capital Territory of Delhi (Amendment) Act 2021
— ANI (@ANI) March 28, 2021
बता दें, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (संशोधन) विधेयक-2021 को लोकसभा की मंजूरी के बाद गत बुधवार को राज्यसभा में भी पास कर दिया गया था। दिल्ली सरकार लगातार इस बिल का विरोध करती रही लेकिन उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने वाला यह विधेयक राज्यसभा से पास हो गया।
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राज्यसभा में विधेयक पर बहस के दौरान जमकर हंगामा हुआ था। कांग्रेस सहित चार दलों ने विरोध करते हुए सदन की कार्रवाई से वॉकआउट किया था, लेकिन विधेयक के पक्ष में बहुमत होने के बाद उप सभापति ने उसे पास कर दिया था। इससे पहले 22 मार्च को ही बिल को लोकसभा में पास कर दिया गया था।
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भाजपा ने दिल्ली की जनता को धोखा दिया: केजरीवाल
लोकसभा से बिल पास होने के बाद मुख्यमंत्री ने इस पर प्रतिक्रया जाहिर करते हुए ट्विट किया था कि भाजपा ने दिल्ली की जनता को धोखा दिया है। जीतने वालों से शक्तियां छीनकर हारने वालों को दे दिया है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने विधेयक को लोकतंत्र की हत्या सरीखा बताया था।
बिल पास होने से होंगे ये बदलाव
विधेयक के कानून बनने से एक बार फिर दिल्ली सरकार को कोई भी नियम कानून या योजना लाने से पहले उपराज्यपाल की सहमति लेनी होगी। ऐसे में अगर कोई योजना लटकती है तो दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल आमने-सामने होंगे। आशंका जाहिर की जा रही है कि दिल्ली में 2018 से पहले की कहानी दोबारा दुहराई जाने वाली है। अगर सरकार और उपराज्याल के बीच मतभेद होगा तो योजनाएं लागू करना आसान नहीं होगा।