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Centre: संसद अधिनियम 1959 में बदलाव की तैयारी, लाभ के पद के चलते सांसदों के अयोग्य होने की बाध्यता होगी खत्म
Sun, 17 Nov 2024 03:45 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Sun, 17 Nov 2024 03:45 PM IST
सार
Office of profit: सरकार एक नया कानून लाने की योजना बना रही है। जिसके तहत लाभ के पद को लेकर सांसदों की अयोग्यता न तय की जा सके। इसके लिए कलराज मिश्र की अध्यक्षता वाली एक संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिश के आधार पर केंद्रीय विधि मंत्रालय ने संसद अधिनियम 2024 का मसौदा पेश किया है।
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संसद भवन
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्र सरकार ने संसद अधिनियम (अयोग्यता निवारण) 1959 में बदलाव की तैयारी की है। सरकार इस कानून में शामिल लाभ के पद के चलते सांसदों को अयोग्य ठहराने की बाध्यता समाप्त करने को लेकर काम कर रही है। बताया जा रहा है कि इसके बजाय सरकार एक नया कानून लाने की योजना बना रही है। जिसके तहत लाभ के पद को लेकर सांसदों की अयोग्यता न तय की जा सके।
केंद्रीय विधि मंत्रालय ने 16वीं लोकसभा में कलराज मिश्र की अध्यक्षता वाली लाभ के पदों को लेकर बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति (जेसीओपी) की ओर से की गई सिफारिशों के आधार पर संसद (अयोग्यता निवारण) विधेयक 2024 का मसौदा तैयार किया है। इसमें संसद अधिनियम (अयोग्यता निवारण) 1959 की धारा तीन को खत्म करके लाभ के पदों की सूची को हटाना है। इसमें मौजूदा अधिनियम और कुछ अन्य कानूनों के बीच टकराव को दूर करने का भी प्रस्ताव है।
नए विधेयक में कुछ मामलों में अयोग्यता के अस्थायी निलंबन से संबंधित मौजूदा कानून की धारा 4 को हटाने का भी प्रस्ताव है। इसकी जगह पर केंद्र सरकार को अधिसूचना जारी करके अनुसूची में संशोधन करने का अधिकार दिया गया है। विधेयक को लेकर मंत्रालय के विधायी विभाग ने जनता से राय भी मांगी है।
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इसमें यह भी कहा गया है कि संसद (अयोग्यता निवारण) अधिनियम, 1959 को इसलिए बनाया गया था कि सरकार के अधीन लाभ के कुछ पद धारकों को संसद सदस्य बनने या चुने जाने के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। हालांकि अधिनियम में उन पदों को भी शामिल किया गया है जिनसे धारक को अयोग्यता नहीं होगी तथा उन पदों की गणना भी की गई है, जिनके धारक को अयोग्यता होगी।
16वीं लोकसभा के दौरान जेसीओपी ने कानून की व्यापक समीक्षा की और एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने विधि मंत्रालय द्वारा वर्तमान कानून के अप्रचलित तथ्यों को ध्यान में रखने पर जोर दिया था। समिति ने कहा था कि लाभ के पद शब्द की एक सही परिभाषा बनाई जाए। इसमें भाषा और प्रारूप को सरल बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया।
समिति ने सिफारिश की थी कि स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन, दीन दयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल योजना और अन्य कार्यक्रमों जैसे विभिन्न प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों में नामित सदस्यों को अयोग्यता से बचाया जाना चाहिए।
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केंद्रीय विधि मंत्रालय ने 16वीं लोकसभा में कलराज मिश्र की अध्यक्षता वाली लाभ के पदों को लेकर बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति (जेसीओपी) की ओर से की गई सिफारिशों के आधार पर संसद (अयोग्यता निवारण) विधेयक 2024 का मसौदा तैयार किया है। इसमें संसद अधिनियम (अयोग्यता निवारण) 1959 की धारा तीन को खत्म करके लाभ के पदों की सूची को हटाना है। इसमें मौजूदा अधिनियम और कुछ अन्य कानूनों के बीच टकराव को दूर करने का भी प्रस्ताव है।
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नए विधेयक में कुछ मामलों में अयोग्यता के अस्थायी निलंबन से संबंधित मौजूदा कानून की धारा 4 को हटाने का भी प्रस्ताव है। इसकी जगह पर केंद्र सरकार को अधिसूचना जारी करके अनुसूची में संशोधन करने का अधिकार दिया गया है। विधेयक को लेकर मंत्रालय के विधायी विभाग ने जनता से राय भी मांगी है।
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इसमें यह भी कहा गया है कि संसद (अयोग्यता निवारण) अधिनियम, 1959 को इसलिए बनाया गया था कि सरकार के अधीन लाभ के कुछ पद धारकों को संसद सदस्य बनने या चुने जाने के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। हालांकि अधिनियम में उन पदों को भी शामिल किया गया है जिनसे धारक को अयोग्यता नहीं होगी तथा उन पदों की गणना भी की गई है, जिनके धारक को अयोग्यता होगी।
16वीं लोकसभा के दौरान जेसीओपी ने कानून की व्यापक समीक्षा की और एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने विधि मंत्रालय द्वारा वर्तमान कानून के अप्रचलित तथ्यों को ध्यान में रखने पर जोर दिया था। समिति ने कहा था कि लाभ के पद शब्द की एक सही परिभाषा बनाई जाए। इसमें भाषा और प्रारूप को सरल बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया।
समिति ने सिफारिश की थी कि स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन, दीन दयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल योजना और अन्य कार्यक्रमों जैसे विभिन्न प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों में नामित सदस्यों को अयोग्यता से बचाया जाना चाहिए।