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सुप्रीम कोर्ट में ईडी: संजय चंद्रा की पत्नी भाग सकती हैं विदेश, तिहाड़ में सूचनाएं भेजने की भी वही मास्टरमाइंड 

Wed, 18 May 2022 10:52 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 18 May 2022 10:52 PM IST
सार

एएसजी ने कहा कि प्रीति जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं और एजेंसी पैसे और विदेशी संपत्ति के ठिकाना का पता नहीं लगा सकी है।

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Preeti Chandra is flight risk, mastermind of conspiracy in passing info inside Tihar: ED to SC
यूनिटेक एमडी संजय चंद्रा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में तिहाड़ जेल में बंद यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर संजय चंद्रा की पत्नी प्रीति चंद्रा के देश छोड़कर भागने की बहुत संभावना है। ईडी ने कहा कि तिहाड़ जेल के अंदर सूचनाएं भेजने की साजिश की मास्टरमाइंड भी प्रीति ही है जहां उनके पति को रखा गया है। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने ईडी से प्रीति की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा, जिसमें निचली अदालत के समक्ष जमानत याचिका दायर करने की अनुमति मांगी गई थी।

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ईडी ने कहा, प्रीति के देश छोड़कर जाने की पूरी संभावना
ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने कहा कि प्रीति ने आवेदन उस समय दायर किया है जब सुप्रीम कोर्ट गर्मी की छुट्टियों में जाने की कगार पर है और उसके देश छोड़कर जाने की पूरी संभावना है। दीवान ने कहा, उन्हें सिर्फ संजय चंद्रा की पत्नी के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। उनके पास डोमिनिकन गणराज्य का पासपोर्ट है और वह त्रिकार समूह की प्रमुख हैं, जिसका संयुक्त अरब अमीरात और केमैन द्वीप जैसे कई जगहों में संचालन है। विधि अधिकारी ने कहा कि याचिका को निचली अदालत में जाने की अनुमति देने से जांच खतरे में पड़ जाएगी क्योंकि एजेंसी मामले में बहुत महत्वपूर्ण मोड़ पर है। 
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माधवी दीवान ने कहा कि उन्होंने (प्रीति) गवाह को प्रभावित करने की कोशिश की, देश से भागने की कोशिश की, उसने संपत्ति का निपटान किया था और तिहाड़ जेल में बंद अपने पति को जानकारी देने की साजिश की मास्टरमाइंड है। एएसजी ने कहा कि अदालत ने पहले ऐसे मामलों में जमानत रद्द कर दी थी और बताया कि त्रिकार समूह, जिसका नाम उसके बच्चों के नाम पर रखा गया है, उसका संचालन उन देशों में है जो अनुबंधित पक्ष नहीं हैं जानकारी हासिल करने के लिए पत्र जारी नहीं किया जा सकता है।
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पैसे और विदेशी संपत्ति का पता नहीं लगा सकी ईडी 
दीवान ने कहा, वह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं और एजेंसी पैसे और विदेशी संपत्ति के ठिकाना का पता नहीं लगा सकी है। दीवान ने कहा कि यह एजेंसी के लिए एक बड़ी बाधा रही है। प्रीति की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि वह पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में हैं और उसके बाद से ईडी ने उन्हें कभी भी जांच के लिए नहीं बुलाया। वे पहले के हलफनामों पर भरोसा करते रहे हैं लेकिन तथ्य यह है कि जमानत के लिए आवेदन करना मेरा वैधानिक अधिकार है। चूंकि यह अदालत मामले की जांच कर रही है, इसलिए मैंने इस अदालत की अनुमति मांगी थी। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत मेरे अधिकारों को जमानत के लिए आवेदन करने से नहीं छीना जा सकता है। पीठ ने कहा कि वह याचिका का निपटारा नहीं कर रही है और ईडी से याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

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