फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Pre-monsoon rains less than half this year

इस साल आधे से भी कम हुई प्री-मानसून बारिश, सात साल के बाद सबसे कम

Mon, 03 Jun 2019 06:20 AM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Mon, 03 Jun 2019 06:20 AM IST
विज्ञापन
Pre-monsoon rains less than half this year
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
एक ओर जहां रोज रिकॉर्ड तोड़ पारे और लू ने आमजन को हलकान कर रखा है तो दूसरी ओर प्री-मानसून ने भी देश को निराश कर दिया है। भारत में मार्च से मई माह के बीच होने वाली प्री-मानसून बारिश सात साल बाद सबसे कमजोर रही है। इस साल अब तक प्री-मानसून के दौरान सिर्फ 99 एमएम पानी ही बरसा है जबकि पिछले साल 212 एमएम बारिश हुई थी। 
विज्ञापन


इससे पहले देखें तो 2012 सबसे सूखा साल रहा था, जब महज 90.5 एमएम प्री-मानसून बारिश हुई। वहीं 2009 में भी प्री-मानसून दहाई के आंकड़े में ही सिमट गया था। गौरतलब है कि 2009 में कई राज्यों को सूखे का सामना करना पड़ा था।
विज्ञापन


दक्षिण ने बढ़ाई चिंता

प्री-मानसून काल में इस साल दक्षिण के राज्यो में 49 फीसदी तक कम बारिश हुई है, जिसने ज्यादा चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्रवार देखें तो मराठवाड़ा-विदर्भ, कोंकण-गोवा, गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी में प्री-मानसून सबसे कमजोर रहा है। साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरी कर्नाटक, तेलंगाना, रायलसीमा में भी पानी कम ही बरसा। जानकार मानते हैं कि प्री-मानसून बारिश खेती, भूजल भरण और जमीन में नमी को बरकरार रखने के लिए जरूरी होती है। इसके अभाव में पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


करीब आधे भारत में सूखे का पूर्वानुमान

आईआईटी गांधीनगर ने इस साल अपने पूर्वानुमान में कहा है कि देश के 40 फीसदी से ज्यादा हिस्से में इस साल सूखे की मार पड़ सकती है। इसकी बड़ी वजह कमजोर प्री-मानसून को बताया जा रहा है। देशभर में करीब 61 फीसदी हिस्से में प्री-मानसून का स्तर कम या अत्यंत कम रहा है। केवल 24 फीसदी हिस्से में ही सामान्य बारिश हुई है। 


‘अतीत में हुए शोध इशारा करते हैं कि पिछली शताब्दी में पश्चिमी भारत में प्री-मानसून सीजन में होने वाली बारिश में लगातार कमी आई है। ऐसा मानसून के पैटर्न में बदलाव में आने के कारण हो रहा है। हालांकि, पूरे भारत में ऐसा नहीं दिखाई दिया है। प्री-मानसून सीजन में होने वाली बारिश खेती के लिए अत्यधिक आवश्यक होती है। इससे भूजल का स्तर कायम रहता है और मिट्टी में नमी बनी रहती है।’

पुलक गुहाठाकुर्ता, क्लाईमेट एप्लीकेशन एंड यूजर इंटरफेस प्रमुख, आईएमडी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed