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Prashant Bhushan Case: प्रशांत भूषण से माफी मंगवाने में असफल रहा सुप्रीम कोर्ट
Wed, 26 Aug 2020 05:05 AM IST
संजीव कुमार झा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 26 Aug 2020 05:05 AM IST
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Prashant Bhushan
- फोटो : पीटीआई
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सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को वकील प्रशांत भूषण से उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट और न्यायाधीशों के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर माफी मंगवाने में सफल नहीं हो सका। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अवमानना में दोषी ठहराए गए भूषण की सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए अफसोस जताया कि जजों की निंदा की जाती है। उनके परिवारवालों को अपमानित किया जाता है। और वह बोल तक नहीं सकते।
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जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि यहां सवाल सिस्टम का है। अगर हम एक-दूसरे को तबाह करने लगे तो इस संस्थान के प्रति लोग कैसे आस्था रखेंगे। आपको नम्र होने की जरूरत है। आपको देखना चाहिए कि अदालत क्या कर रही है और क्यों कर रही है? सिर्फ हमला नहीं करना चाहिए। हम अपने बचाव या सफाई के लिए प्रेस में नहीं जा सकते।
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वहीं भूषण इस बात पर अड़े रहे कि उनके द्वारा की गई टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला नहीं था। भूषण के वकील राजीव धवन ने कहा कि अदालत को घोर आलोचना का सामना करने के लिए बड़ा दिल दिखाना चाहिए। अदालत को स्टेट्समैनशिप का परिचय देते हुए बिना किसी दंड या चेतावनी या वकालत पर पाबंदी लगाए, इस मामले को खत्म कर देना चाहिए। भविष्य में थोड़ा संयमित रहने के सामान्य संदेश देकर इस मामले को विराम दिया जाना चाहिए।
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मंगलवार को सुनवाई की शुरुआत में पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा कि इस मामले में क्या किया जा सकता है। पीठ ने अटॉर्नी जनरल को सुझाव देने के लिए कहा। जिस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा, मेरे पास पूर्व जजों द्वारा सुप्रीम के खिलाफ दिए गए बयान भी उपलब्ध है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों की भी सूची है जिन्होंने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात कही गई है।
अटॉर्नी जनरल ने सुझाव दिया कि भूषण को अपने बयान वापस लेने दिया जाए। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अदालत को भूषण को चेतावनी देके इस मामले को बंद कर देना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि हमने भूषण को तीन दिनों का वक्त इसीलिए दिया था। पीठ ने कहा, आखिर इससे क्या होगा? अगर किसी व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास न हो और वह बार-बार उसे दोहराएं।
कोर्ट ने भूषण द्वारा अयोध्या मामले का निपटारा करने वाले जजों के खिलाफ टिप्पणी का भी हवाला दिवा। इनमें से एक जज(जस्टिस रंजन गोगई) सेवानिवृत्त हो गए हैं लेकिन चार अब भी वर्तमान में जज हैं। उन्होंने किस पर हमला नहीं किया, सेवानिवृत्त जज हो या वर्तमान जज।