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प्रणब मुखर्जी ने विदेशी मीडिया को दी सलाह, कहा- पहले भारत में खुद घूमकर देखें तब तस्वीर पेश करें

Thu, 29 Aug 2019 01:22 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 29 Aug 2019 01:22 AM IST
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Pranab Mukherjee said to foreign media, Go around, see things  yourself to present picture of India
प्रणब मुखर्जी - फोटो : File Photo

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को विदेशी मीडिया को भारत की तस्वीर पेश करने से पहले सलाह देते हुए कहा कि पहले खुद देश में घूमें, लोगों से मिलें और खुद की नजर से चीजों को देखने के बाद भारत की तस्वीर पेश करें।

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विदेशी पत्रकारों को कलिंगा-एफसीसी पुरस्कार से सम्मानित करने से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा कि, लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका प्रहरी की है। उसे समाज के सिर्फ अच्छे-बुरे पक्ष को ही नहीं पेश करना चाहिए, बल्कि सकारात्मक बदलावों को भी जगह देनी चाहिए।
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मुखर्जी ने कहा, 'मैं आपसे अनुरोध करता हूं और आपको प्रोत्साहित करूंगा कि आप हमारे देश में घूमने, लोगों से मिलने और खुद चीजों को देखने के बाद भारत की एक तस्वीर पेश करें जो आपके जरिये ही दुनिया के सामने आती है।'

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पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया को खबरों में सकारात्मक चीजों का भी उल्लेख करना चाहिए। इस दौरान मुखर्जी ने वैश्विक मीडिया के लिए भारत और दक्षिण एशिया पर रिपोर्टिंग करने वाले मीडिया पेशेवरों को सम्मानित किया। दक्षिण एशिया के विदेशी संवाददाताओं के क्लब (फॉरेन कॉरेस्पांडेंट क्लब) में 700 से अधिक पत्रकार हैं। उनमें से अधिकांश विदेशी मीडिया संगठनों के लिए काम करते हैं।


अपने भाषण में पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि, मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, इसके पास बहुत ज्यादा शक्तियां है। क्योंकि यह अन्य तीन स्तंभों कार्यकारी, न्यायपालिका और विधायिका को जवाबदेह बनाने का प्रयास करता है। मीडिया जनता और लोक सेवकों के बीच मध्यस्थता का भी काम करता है। इसके पास जनता की राय को आकार देने की शक्ति है। इसमें सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने की भी शक्ति है, लेकिन यह यह भी सुनिश्चित करें कि इस शक्ति का दुरुपयोग न हो।


उनकी यह टिप्पणी कश्मीर के हालात पर हो रही मीडिया कवरेज पर बहस की पृष्ठभूमि से जुड़ी थी, जहां अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के बाद आंदोलन और संचार पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि मुखर्जी ने अपने भाषण में इसका कोई उल्लेख नहीं किया।

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