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तारीफ: मुस्लिम महिलाओं के लिए भरण-पोषण के फैसले की उपराष्ट्रपति ने की सराहना, कहा- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम
Thu, 11 Jul 2024 05:49 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा झा
Updated Thu, 11 Jul 2024 05:49 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट के मुस्लिम महिलाओं के लिए भरण-पोषण के फैसले की जगदीप धनखड़ ने सराहना की।
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उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण को फैसले की उपराष्ट्रपति और राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने सराहना की। उन्होंने इस फैसले को बड़ा कदम बताते हुए कहा कि सहायता धर्म से परे न्यायसंगत होनी चाहिए।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जिसमें मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण की मांग कर सकती हैं। इस मामले पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धर्म तटस्थ प्रावधान सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होता है, फिर चाहे महिला का धर्म कोई भी हो। पीठ ने कहा कि
राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को मुस्लिम महिलाओं के लिए भरण-पोषण पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की सराहना करते हुए इसे "बड़ा कदम" बताया और कहा कि सहायता धर्म से परे न्यायसंगत होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाया था कि एक मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण मांग सकती है और कहा कि "धर्म तटस्थ" प्रावधान सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होता है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। यदि मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम कानून के तहत विवाहित हैं और तलाकशुदा हैं, तो सीआरपीसी की धारा 125 के साथ-साथ मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधान भी लागू होंगे।
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वहीं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की राज्यसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि "कल ही आपने सुप्रीम कोर्ट का एक बेहतरीन फैसला देखा होगा। इस पर सार्वजनिक मंच पर बहस हो रही है।" उन्होंने एक उद्योग निकाय के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, "सहायता सभी के लिए न्यायसंगत, समान होनी चाहिए, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। यह एक बड़ा कदम है।"
बता दें कि इस मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के पास विकल्प है कि वे दोनों कानूनों में से किसी एक या दोनों कानूनों के तहत उपाय की मांग करें। पीठ ने कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि 1986 का अधिनियम सीआरपीसी की धारा 125 का उल्लंघन नहीं करता है, बल्कि उक्त प्रावधान के अतिरिक्त है।"
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बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जिसमें मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण की मांग कर सकती हैं। इस मामले पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धर्म तटस्थ प्रावधान सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होता है, फिर चाहे महिला का धर्म कोई भी हो। पीठ ने कहा कि
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राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को मुस्लिम महिलाओं के लिए भरण-पोषण पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की सराहना करते हुए इसे "बड़ा कदम" बताया और कहा कि सहायता धर्म से परे न्यायसंगत होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाया था कि एक मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण मांग सकती है और कहा कि "धर्म तटस्थ" प्रावधान सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होता है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। यदि मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम कानून के तहत विवाहित हैं और तलाकशुदा हैं, तो सीआरपीसी की धारा 125 के साथ-साथ मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधान भी लागू होंगे।
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वहीं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की राज्यसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि "कल ही आपने सुप्रीम कोर्ट का एक बेहतरीन फैसला देखा होगा। इस पर सार्वजनिक मंच पर बहस हो रही है।" उन्होंने एक उद्योग निकाय के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, "सहायता सभी के लिए न्यायसंगत, समान होनी चाहिए, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। यह एक बड़ा कदम है।"
बता दें कि इस मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के पास विकल्प है कि वे दोनों कानूनों में से किसी एक या दोनों कानूनों के तहत उपाय की मांग करें। पीठ ने कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि 1986 का अधिनियम सीआरपीसी की धारा 125 का उल्लंघन नहीं करता है, बल्कि उक्त प्रावधान के अतिरिक्त है।"