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जबरन और धोखाधड़ी वाले धर्मांतरण पर स्थायी प्रतिबंध होना चाहिए: प्रहलाद सिंह पटेल
Wed, 30 Dec 2020 06:42 AM IST
देव कश्यप
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 30 Dec 2020 06:42 AM IST
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प्रहलाद सिंह पटेल (फाइल फोटो)
- फोटो : twitter
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने मंगलवार को कहा कि जबरन या धोखेबाजी वाले धर्मांतरण और लव जिहाद के खिलाफ सख्त और स्थायी कानून की जरूरत है।
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धर्म स्वतंत्रता (धार्मिक स्वतंत्रता) अध्यादेश, 2020 के बारे में बात करते हुए पटेल ने कहा कि 'भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार शुरू से कह रही है कि भ्रम, भय से धर्म बदलने की साजिश, लालच, और धोखाधड़ी को स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। मंगलवार को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने लव जिहाद के खिलाफ एक कानून को मंजूरी दे दी है।'
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'एक आम सहमति है। जब चीजें बातचीत के माध्यम से हल नहीं होती हैं, तो यह स्वाभाविक है कि कानून बनाना होगा। चर्चा दशकों से चल रही है। आजादी के बाद से, समाज में धर्मांतरण को लेकर लगातार बहस होती रही है।' अगर लोगों से पूछा जाता है, तो वे भी इस कानून का पक्ष लेंगे। विपक्ष द्वारा कानून के माध्यम से एक समुदाय को लक्षित करने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर, पटेल ने कहा कि उनकी पार्टी ने 'लव-जिहाद' शब्द गढ़ा नहीं है।
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'जब ये चीजें शुरू होती हैं, तो ऐसा करने वालों के मन में डर होता है। मुझे लगता है कि डर होना चाहिए। अगर आप इसे धोखे से करते हैं, अगर आप इसे किसी साजिश के तहत करते हैं, तो आपको डरना चाहिए।'
विशेष रूप से, मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश -2020 में, 10 साल की सजा और धोखे से या जबरन धर्म परिवर्तित करने या लव जिहाद करने पर एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। मध्यप्रदेश से पहले, कई अन्य भाजपा शासित राज्यों ने विपक्षी दलों की लगातार आलोचना के साथ ऐसे कानूनों को मंजूरी दी है।
पटेल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा भारतीय जनता पार्टी पर लगाए गए आरोप पर भी बात की, जिसमें उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य की संस्कृति को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है।
पटेल ने जवाब देते हुए कहा कि 'सबसे पहले, बंगाल में कानून का कोई नियम नहीं है। लोकतांत्रिक मूल्य नहीं हैं, यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। दूसरा, जब वह संस्कृति के बारे में बात करती हैं, तो उनकी संस्कृति क्या है - राजा राममोहन रॉय, महर्षि अरविंद, विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस , खुदीराम बोस? वह किस संस्कृति की बात कर रही हैं? वह प्रधानमंत्री के निमंत्रण के बाद विश्वभारती विश्वविद्यालय नहीं गईं थीं, फिर यह राज्य और केंद्र के बीच संबंधों को नष्ट करना है। ममता बनर्जी के शब्दों पर कौन भरोसा करेगा? जनता की राय उनके खिलाफ है, उन्हें इसे स्वीकार करना चाहिए। मेरा मानना है कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान होनी चाहिए। लेकिन, आज डर और हिंसा के अलावा कुछ नहीं है।'