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प्रधानमंत्री का जन्मदिन: भाजपा 'ब्रांड मोदी' को भुनाने की कोशिश में, उनके भरोसे ही पार्टी की नैया पार

Wed, 15 Sep 2021 07:11 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Wed, 15 Sep 2021 07:11 PM IST
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 71वां जन्मदिन 17 सितंबर को है।  एक प्रशासक के रूप में उनके सार्वजनिक जीवन के 20 साल सात अक्तूबर को पूरे हो रहे हैं। प्रधानमंत्री के जन्मदिन और उनके 20 साल के सार्वजनिक जीवन को खास बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बड़े समारोह की तैयारी की है, लेकिन 'ब्रांड मोदी' को भुनाने की भाजपा की यह योजना विपक्ष को नागवार गुजर रही है। 
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PM's birthday: BJP trying to capitalize on 'Brand Modi', in view of coming elections Opposition says celebration when people suffering
पीएम मोदी - फोटो : Twitter@bjp4india

विस्तार

2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगभग भारतीय जनता पार्टी के सभी प्रमुख राजनीतिक अभियानों की धुरी और चेहरा रहे हैं। सभी प्रमुख सामाजिक कल्याण योजनाओं पर उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। पहले पार्टी उनके जन्मदिन को "सेवा सप्ताह" के रूप में मनाती रही है लेकिन इस साल अभियान को "सेवा और समर्पण अभियान" के रूप में विस्तार दिया गया है। 17 सितंबर से सात अक्तूबर तक यह अभियान चलेगा। 17 सितंबर से यह अभियान इसलिए शुरू हो रहा है क्योंकि इस दिन पीएम का जन्मदिन है और सात अक्तूबर 2001 को वे पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। इसलिए सात अक्तूबर को अभियान का समापन हो रहा है।



पांच राज्यों में चुनाव के मद्देनदर यह काफी अहम
पार्टी का कार्यक्रम 'सेवा और समर्पण अभियान' ऐसे समय में होने वाला है जब मोदी और उनकी सरकार को कोरोना की पहली लहर में प्रवासी संकट, दूसरी लहर के कुप्रबंधन और महंगाई को लेकर कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। लेकिन भाजपा अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस कार्यक्रम को बहुत अहम मान रही है।


कोरोना महामारी की दूसरी लहर के गुजर जाने के बाद 75 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज मिलने से पार्टी को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन को लेकर आयोजित कार्यक्रम से पार्टी के चुनावी अभियान को नया रूप देने में मदद मिलेगी। पार्टी को विश्वास है कि इससे भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जा सकेगा। पार्टी मान रही है कि इन चुनावों के साथ निकट भविष्य के सभी चुनावों पर यूपी के नतीजों का सीधा प्रभाव पड़ेगा। ऐसी  स्थिति में 'ब्रांड मोदी' जितना मजबूत होगा, भाजपा को चुनाव में उतनी ही आसानी होगी।

विपक्षी नेताओं ने कस तंज
हालांकि विपक्षी नेता इन जश्न से उत्साहित नहीं हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक अखबार से कहा यह केवल मोदी और उनकी सरकार की बढ़ती अलोकप्रियता और विधानसभा चुनाव से पहले खुद को बचाने के लिए भाजपा की बेचैनी को दर्शाता है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, "मार्गदर्शक मंडल में जाने के लिए चार साल और बचे हैं। मोदी स्वस्थ रहें। भाजपा में, 75 वर्ष से अधिक आयु के नेता आमतौर पर पार्टी से सेवानिवृत्त माने जाते हैं। 

वकील-कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने ट्वीट कर कहा है "इस सरकार ने अर्थव्यवस्था और नौकरियों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। अब यह हमारे सार्वजनिक क्षेत्र को अंबानी और अडानी जैसे अपने साथियों को सौंप रही है। स्नातक युवाओं में 64 फीसदी बेरोजगारी है। इसलिए मोदी का जन्मदिन बेरोजगार दिवस के तौर पर मनाना चाहिए।
 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'मैन वर्सेज वाइल्ड'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'मैन वर्सेज वाइल्ड' - फोटो : सोशल मीडिया
सभी विपक्षों का सफाया कर दिया
2014 में, मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा ने सभी विपक्षों का सफाया कर दिया और तीन दशकों में बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी बन गई। उन्होंने 26 मई 2014  को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। दिल्ली आने से पहले पहले  पीएम मोदी ने 2001 से 13 सालों तक अपने गृह राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। अटल बिहारी वाजपेयी के बाद वे दूसरे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री होंगे, जिन्होंने लगातार सात साल अपनी सरकार के पूरे कर लिए हैं।

लेकिन वाजपेयी सरकार के मुकाबले मोदी सरकार ज्यादा स्पष्ट बहुमत वाली मजबूत सरकार है और मोदी सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री माने जा रहे हैं। एक बार लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था-ही इज मोस्ट क्रिटिसाइज्ड मैन (सबसे ज्यादा आलोचना सहने वाले व्यक्ति), लेकिन फिर भी वे सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री और लोकप्रिय प्रधानमंत्री बने।

आम आदमी के सपनों को पूरा करें
नरेंद्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री के तौर पर प्रस्तावित करने वाले वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार वेद प्रताप वैदिक कहते हैं 'इस समय नरेंद्र मोदी देश के बेजोड़ नेता हैं। उनके मुकाबले देश में कोई नेता दिखाई नहीं देत है। वे व्यक्तिगत तौर पर काफी ईमानदार चरित्रवान व्यक्ति हैं लेकिन उनको प्रधानमंत्री के तौर पर जिन आशाओं के साथ हमने समर्पण किया था वो सात साल होने के बाद पूरी नहीं हुई। किसी राष्ट्र के उत्थान में शिक्षा और चिकित्सा बहुत अहम है, लेकिन इन दोनों क्षेत्रों में एक भी पत्ता नहीं हिला है। जो कमजोरियां चली आ रही थीं वे कायम हैं।

वे कहते हैं जो स्वर्णिम सपने हम देख रहे हैं, वादे सुनते हैं, कोई ठोस कदम उठें तो खुशी होगी। नरेंद्र मोदी के पास इतने शक्ति और अधिकार हैं उतने शायद देश के किसी भी प्रधानमंत्री के पास नहीं रहे। जन्मदिन के लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं, वे शतायु हों, लेकिन वे उन सपनों को साकार करें जिसकी बात वे प्रधानमंत्री पद पर आने के पहले किया करते थे।'  

सिर्फ नरेन्द्र मोदी की सरकार
साल 2014 के आम चुनाव में भाजपा को 282 सीटें मिली थीं। 2019 के चुनावों के वक्त जब बहुत से राजनीतिक विशेषज्ञ अपने-अपने कयास और भाजपा के गिरते ग्राफ की संभावना जता रहे थे,  तब पिछली बार से भी ज्यादा ताकत के साथ 303 सांसदों को लेकर मोदी ने वापसी की। वैस देखा जाए तो एनडीए की सरकार महज आंकड़ों के हिसाब से है, लेकिन असल में यह भाजपा की सरकार है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक इसे सिर्फ नरेन्द्र मोदी की सरकार कहा जाना चाहिए। अब तो भाजपा समेत ज्यादातर लोग मानते हैं कि इस सरकार में सारे निर्णय प्रधानमंत्री करते हैं। 

 

नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी (फाइल फोटो)
नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

दूसरा कोई आसपास नहीं
कुछ सर्वेक्षणों में इस बात का इशारा किया गया है कि मोदी सरकार की लोकप्रियता में कमी आई है। एक सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि उनकी लोकप्रियता रेटिंग पहले के 66 फीसदी से घटकर 24 फीसदी हो गई है। फिर भी कोई दूसरा राजनीतिक दल उसके आसपास नहीं है। देश की सबसे पुरानी पार्टी और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस अब सिर्फ़ नामभर के लिए है। वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी मानती हैं कि मोदी की लोकप्रियता में कमी विपक्षी एकता के लिए एक बड़ा अवसर होना चाहिए। पर ऐसा लगता तो नहीं है। निश्चित रूप से कांग्रेस के बिना ऐसा नहीं होगा, जो कि विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है।

कांग्रेस को साल  2014 और 2019 के चुनावों में उन 90 फीसदी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा जिसमें उसका मुकाबला सीधे भाजपा से था। वोट शेयर की बात करें तो 2014 में जहां भाजपा ने 88 फीसदी वोट हासिल किए वहीं कांग्रेस को महज 12 फीसदी वोट मिले। 2019 के चुनाव में वोट शेयर घटकर आठ फीसदी पर पहुंच गया। लेकिन अब भी कांग्रेस ही देश में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी पार्टी है। 

विपक्ष को कौन रोक रहा?
साल 2014 के आम चुनाव अभी दूर हैं,लेकिन इससे पहले 16 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसमें अगले साल सात राज्यों में वोट पड़ेंगें।  उनमें सबसे अहम और सबसे बड़ा राज्य  उत्तरप्रदेश है। इसके अलावा अगले साल फरवरी में उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में, फिर साल के आखिर में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं। जाहिर तौर पर इस चुनावों में भी मोदी ही चुनाव अभियान का हिस्सा होंगे।

नीरजा चौधरी कहती हैं विपक्षी एकजुटता कैसा रूप लेती है, यह इस पर निर्भर है कि आने वाले महीनों में क्या कुछ घटता है। अबसे लेकर 2024 के बीच कई राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। तस्वीर 2023 के अंत या 2024 की शुरुआत में ही साफ होगी। लेकिन विपक्ष को जमीन पर उतरने और गठबंधन बनाकर राज्यों में भाजपा का विकल्प बनाने से कोई चीज रोक नहीं रही है। पर आज पक्के तौर पर बस यही कहा जा सकता है कि विपक्ष अभी अनिश्चय की स्थिति में है और कांग्रेस इन्कार की मुद्रा में।

पीएम मोदी अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर
पीएम मोदी अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर - फोटो : ANI
अब तक कोई चुनाव नहीं हारे मोदी
2001 से 2014 तक गुजरात में रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर तीन कार्यकाल पूरा किया। दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। 2002, 2007 और 2012 में पार्टी उनके नेतृत्व में गुजरात में चुनाव लड़ी। पहली बार हुआ कि 2017 के चुनाव में जिसमें मुख्यमंत्री चेहरा मोदी नहीं थे तो पार्टी 99 सीटों पर खिसक गई। उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव वड़ोदरा और बनारस से लड़ा। बाद में वड़ोदरा सीट छोड़ दी और 2019 का चुनाव फिर बनारस से लड़े। पीएम मोदी अब तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं। 
 
2020 में ही वाजपेयी के कार्यकाल को पीछे छोड़ दिया
केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के सात साल पूरे हो गए। प्रधान मंत्री ने 13 अगस्त 2020 को ही अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को पीछे छोड़ते हुए सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गैर कांग्रेसी पीएम बन गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कुल मिलाकर 2,268 दिन का था। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह सभी कांग्रेस के प्रधानमंत्री रहे जो लंबे समय तक पद पर रहे।

सबसे लंबे वक्त तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम है। वह 16 साल तक 286 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे। दूसरे नंबर पर उनकी बेटी इंदिरा गांधी हैं जो 15 वर्ष 350 दिनों तक देश की प्रधानमंत्री रहीं। नेहरू और इंदिरा के बाद मनमोहन सिंह सबसे लंबे वक्त तक सेवा देने वाले तीसरे प्रधानमंत्री हैं। वह 10 साल 4 दिनों तक देश के प्रधानमंत्री रहें। वह 22 मई 2004 से 26 मई 2014 तक प्रधानमंत्री रहे।



 
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