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मुंबई: बिजली संकट के हालात, 74 हजार करोड़ के पार बकाया बिल और कोयले की भीषण कमी से गहराया संकट

Sun, 03 Oct 2021 01:44 PM IST
अजय सिंह डिजिटल ब्यूरो, मुंबई।
डिजिटल ब्यूरो, मुंबई। Published by: अजय सिंह Updated Sun, 03 Oct 2021 01:44 PM IST
सार

महाराष्ट्र में कोयले की आपूर्ति कम होने से ताप बिद्युत संयंत्र में बिजली का उत्पादन काफी कम हो गया है।

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power crisis in Mumbai outstanding bills beyond 74 thousand crores and acute shortage of coal deepens the crisis
बिजली संकट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की आर्थिक राजधानी में कुछ ऐसे हालत बनते दिखाई दे रहे हैं जिससे महाराष्ट्र और मुंबई पर बिजली संकट के काले बादल मंडराने लगे हैं। एक तरफ कोयले के भीषण संकट और दूसरी तरफ बकाया 74 हजार करोड़ से अधिक बिल की वसूली नहीं होने से घाटे में चल रही सरकारी महावितरण कंपनी बुरे दौर से गुजर रही है।

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महावितरण कंपनी के चेयरमैन विजय सिंहल ने बताया कि राज्य के लिए आवश्यक 18 हजार मेगावॉट की मांग पूरी करने के लिए बाहर से खरीदना पड़ रहा है। हालांकि सिंघल बाकाया बिल को बड़ी समस्या नहीं मानते। लेकिन महावितरण के घाटे में होने और ताप संयंत्र में कम बिजली के उत्पादन से राज्य में बत्तीगुल होने की चर्चा है। वहीं, बकाया बिलों के मामले में ऊर्जा मंत्री नितिन राऊत पूर्ववर्ती देवेन्द्र फडणवीस सरकार को दोषी ठहराते हैं। उनका कहना है कि पिछली सरकार ने बिलों की वसूली नहीं की जिससे यह स्थिति बनी है। पिछले साल ऊर्जा विभाग को दिए गए प्रजेंटेंशन में बताया गया था कि महावितरण कंपनी की आर्थिक हालत खराब है। वहीं, ताप विद्युत संयंत्र को लेकर राज्य के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत बताते हैं कि केवल महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में यह संकट है। राज्य में पहले प्रतिदिन 80 रैक कोयले की जरूरत पड़ती थी। अब बहुत कम कोयला मिल पा रहा है। राउत ने दावा किया कि मुंबई में अंधेरा नही होने देंगे।
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चुनिंदा उद्योगपति ले रहे हैं सालाना 1200 करोड़ की सब्सिडी
महाराष्ट्र की सरकारी बिजली कंपनी लगातार घाटे में है। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा उद्योगों को हर साल 1200 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। वेस्टर्न महाराष्ट्र स्टील मैनुफैक्चरिंग एसोसिएशन ने सब्सिडी तत्काल रोकने की मांग की है। दरअसल, साल 2016 से विदर्भ, मराठवाडा सहित अन्य पिछड़े जिलों में उद्योग लगाने के लिए सरकार सब्सिडी देती है। लेकिन सब्सिडी के नियम व शर्त ऐसे हैं जिससे इसका लाभ चंद उद्योगपति ही ले रहे हैं। शिकायतकर्ता एडवोकेट विनोद सिंह कहते हैं कि कुल सब्सिडी में से महज 15 उद्योगपति 65 प्रतिशत लाभ ले रहे हैं। हालांकि, सब्सिडी को लेकर विजय सिंघल की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित हुई है। उन्होंने बताया कि जल्दी ही रिपोर्ट देंगे। लेकिन, इसी बीच फिर से सब्सिडी बहाल करने से बवाल शुरू हो गया है।

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