कोयले की कमी से बिजली संकट: स्थायी हल की तलाश में सरकार, विद्युत और रेल मंत्री ने ऊर्जा संयंत्रों तक आपूर्ति को सुधारने पर की चर्चा
ऊर्जा और रेल मंत्रालयों ने मोटे तौर पर इस समस्या के पीछे आपूर्ति शृंखला में व्यवधान को चिह्नित किया और इसे दूर करने के लिए आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर सहमति जताई है। ऊर्जा संयंत्रों तक कोयले की निर्बधा आपूर्ति के लिए रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेन और रेकों का इस्तेमाल शुरू किया है।
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ऊर्जा संयंत्रों में बार-बार कोयले की कमी की वजह से बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति बन रही है। केंद्र सरकार इस समस्या का स्थायी हल तलाशने में जुटी है। इसी कवायद के तहत सोमवार को केंद्रीय विद्युत मंत्री आरके सिंह और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली में बैठक की।
इस दौरान बिजली की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए त्वरित और दीर्घावधिक रणनीतियों पर चर्चा की गई। दोनों मंत्रालयों ने मोटे तौर पर इस समस्या के पीछे आपूर्ति शृंखला में व्यवधान को चिह्नित किया और इसे दूर करने के लिए आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर सहमति जताई है।
विद्युत मंत्री सिंह ने सभी हितधारकों से बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए साथ काम करने का अनुरोध करते हुए विद्युत उत्पादन कंपनियों से कहा कि कोयला आपूर्ति में रसद संबंधी बाधाओं से निपटने के लिए रेल मंत्रालय की योजना के तहत ज्यादा फ्रेट रेक (मालढुलाई के डब्बे) खरीदने का सुझाव दिया। वहीं, रेल मंत्री ने ऊर्जा संयंत्रों को भेजे जाने वाले कोयले को लदने व उतारने के मामले में परिचालन दक्षता को बढ़ाने, रेक हिस्सेदारी में बढ़ोतरी करने और रसद संबंधी मुद्दों के समाधान पर जोर दिया। बैठक में विद्युत मंत्रालय के सचिव आलोक कुमार, कोयला मंत्रालय के सचिव एके जैन सहित दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इनके अलावा कोयला व बिजली से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के प्रबंधन से जुड़े अधिकारी व मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए।
रेल मंत्रालय ने इस तरह टाला बिजली संकट
- कोयला ट्रेनों की आवाजाही को प्राथमिकता देकर आवागमन में 12 से 36 फीसदी समय बचाया।
- 1 से 10 अप्रैल की तुलना में बीते पांच दिनों में ट्रेनों की औसत लीड में सात फीसदी की बढोतरी की गई।
- रेक की लोडिंग के समय में भी 10 फीसदी कम समय लगाया गया।
रेलवे ने तैनात किए अतिरिक्त रेक
ऊर्जा संयंत्रों तक कोयले की निर्बध आपूर्ति के लिए रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेन और रैकों का इस्तेमाल शुरू किया है। इस संबंध में रेल मंत्रालय ने आंकड़े जारी कर बताया कि कोयले की ढुलाई में तेजी लाई गई है। सितंबर 2021 से मार्च 2022 के दौरान औसत से 32 फीसदी ज्यादा कोयले की ढुलाई की गई। वहीं, मौजूदा ऊर्जा संकट के मद्देनजर 22 अप्रैल के बाद ऊर्जा संयंत्रों को कोयला ढुलाई में भी 10 फीसदी वृद्धि की गई है।
कोयला ढुलाई में 11.1 करोड़ टन की वृद्धि
2021-22 के दौरान रेलवे ने कोयला ढुलाई में 11.1 करोड़ टन की रिकॉर्ड वृद्धि की है। 2020-21 में कुल 54.2 करोड़ टन कोयले की ढुलाई की गई, जबकि 2021-22 में 65.3 करोड़ टन कोयले की ढुलाई की।