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Pune Porsche Case: पोर्श कार हादसे में पुणे पुलिस ने दाखिल की 900 पन्नों की चार्जशीट, SC में दायर करेगी SLP

Fri, 26 Jul 2024 10:06 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 26 Jul 2024 10:06 PM IST
सार

पुणे पुलिस ने 19 मई को कल्याणीनगर में हुई पोर्श कार हादसे में 900 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस हादसे में एक नाबालिग कार सवार ने अपनी लग्जरी कार को एक बाइक में टक्कर मार दी, जिससे सुबह 2:30 बजे के आसपास दो आईटी पेशेवर की मौत हो गई थी।

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Porsche car accident case: Pune Police files 900-page chargesheet
पुणे पोर्श मामला - फोटो : PTI

विस्तार

पुणे पुलिस ने पोर्श कार हादसे में करीब दो महीने बाद 900 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में शुरुआत में, किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ने घटना के तुरंत बाद एक रियल एस्टेट डेवलपर के बेटे को जमानत दे दी थी और उसे सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था। जिसकी कड़ी आलोचना के बाद, पुलिस ने फिर से जेजेबी से संपर्क किया, जिसके बाद संशोधित आदेश जारी हुआ, जिसके तहत आरोपी किशोर को पर्यवेक्षण गृह में भेज दिया गया।
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मामले में पुलिस ने इन लोगों को किया है गिरफ्तार
वहीं इस मामले में आरोपी के माता-पिता और अस्पताल के कर्मचारियों के अलावा, पुलिस ने घटना के संबंध में उसके दादा को भी हिरासत में लिया है। फिर कथित तौर पर मध्यस्थ के रूप में काम करने और आरोपी डॉक्टरों और किशोर के पिता के बीच वित्तीय लेनदेन में सहायता करने के आरोप में दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिहाई का आदेश दिया
मामले में 25 जून को, हादसे में शामिल नाबालिग को बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद पर्यवेक्षण गृह से रिहा कर दिया गया। तब तक आरोपी करीब 36 दिनों तक किशोर न्याय बोर्ड के निगरानी गृह में था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने नाबालिग को निगरानी गृह में भेजने के आदेश को अवैध माना था और इस बात पर जोर दिया कि किशोरों से संबंधित कानून का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय को हर चीज से ऊपर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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इस मामले में हाईकोर्ट ने अधिकारियों को नाबालिग को जमानत पर रिहा करने का निर्देश के साथ ही उसे किसी दादा-दादी के पास नहीं रखने का निर्देश दिया, जैसा कि 19 मई को मजिस्ट्रेट ने उसे जमानत देते हुए निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की दो न्यायाधीशों वाली पीठ ने नाबालिग को जमानत पर रिहा करते हुए कहा, हम कानून, किशोर न्याय अधिनियम के उद्देश्यों और उद्देश्यों से बंधे हैं और अपराध की गंभीरता या जघन्यता के बावजूद हमें उसे कानून के साथ संघर्षरत किसी भी बच्चे के रूप में मानना चाहिए।


राज्य सरकार ने पुणे पुलिस को सुप्रीम कोर्ट जाने की दी है अनुमति 
वहीं राज्य के गृह विभाग ने पुणे पुलिस को बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति दी। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शैलेश बलकावड़े के अनुसार हमने 26 जून को राज्य सरकार को एक आवेदन प्रस्तुत किया था जिसमें कहा गया था कि कुछ आधारों पर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने की आवश्यकता है। सरकार ने शनिवार को एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने की अपनी मंजूरी दे दी और हम जल्द ही सर्वोच्च न्यायालय में ऐसी याचिका दायर करेंगे।
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