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चिंताजनक: निगरानी वाले वन्यजीवों की आबादी पांच दशक में 73 फीसदी घटी, गिद्धों की प्रजातियों पर मंडरा रहा खतरा

Fri, 11 Oct 2024 04:08 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 11 Oct 2024 04:08 AM IST
सार

Wildlife: रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गिद्धों की तीन प्रजातियों में भी तेज गिरावट का पता चला है। इनकी आबादी 1992 से 2022 के बीच तेजी से घटी है। इनमें सफेद पूंछ वाले गिद्धों की आबादी में 67 फीसदी, भारतीय गिद्धों में 48 फीसदी और पतली चोंच वाले गिद्धों की आबादी में 89 फीसदी की गिरावट रही है।

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population of monitored wildlife has decreased by 73 percent in five decades, vulture species are in danger
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई

विस्तार

महज 50 साल में निगरानी वाले यानी जिन्हें संरक्षण की जरूरत है ऐसे वन्य जीवों की आबादी में 73 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की एक नई लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट 2024 में यह खुलासा हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह इन वन्य जीवों के प्राकृतिक आवासों को नुकसान जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण है।
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रिपोर्ट कहती हैं कि इस दौरान भारत में गिद्धों की तीन प्रजातियों में भी तेज गिरावट का पता चला है। इनकी आबादी 1992 से 2022 के बीच तेजी से घटी है। इनमें सफेद पूंछ वाले गिद्धों की आबादी में 67 फीसदी, भारतीय गिद्धों में 48 फीसदी और पतली चोंच वाले गिद्धों की आबादी में 89 फीसदी की गिरावट रही है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ भारत के महासचिव और सीईओ रवि सिंह के मुताबिक, यह रिपोर्ट प्रकृति, जलवायु और मानव कल्याण के अंतर्संबंधों के बारे में बताती है। अगले पांच साल में हम जो विकल्प और काम करेंगे,वे धरती के भविष्य के लिए अहम होंगे।
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मीठे पानी वाले वन्य जीव खतरे में
सबसे तेज गिरावट मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्रों (85 फीसदी) में दर्ज की गई है। इसके बाद स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों (69 फीसदी) और फिर समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों (56 फीसदी) का नंबर है। रिपोर्ट के मुताबिक,दुनिया भर में खासतौर पर खाद्य प्रणालियों से संचालित आवास की हानि और कमी वन्यजीव आबादी के लिए सबसे आम खतरा है। इसके बाद अतिशोषण, आक्रामक प्रजातियां और बीमारी हैं।
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देश में कुछ वन्यजीव आबादी स्थिर
भारत में कुछ वन्यजीव आबादी स्थिर हो गई है और इसमे सुधार दिखा है। यह काफी हद तक सक्रिय सरकारी पहल, प्रभावी आवास प्रबंधन, मजबूत वैज्ञानिक निगरानी और सामुदायिक जुड़ाव के साथ-साथ सार्वजनिक समर्थन की वजह से है। भारत दुनिया में बाघों की सबसे बड़ी आबादी का घर है। 2022 की गणना में कम से कम 3,682 बाघ दर्ज किए गए, जो 2018 में 2,967 बाघों की संख्या से बढ़ गई है। इसके अलावा, भारत में पहले हिम तेंदुओं जनसंख्या आकलन में लगभग 718 हिम तेंदुओं पाए गए। यह उनके रहने वाले 70 फीसदी क्षेत्र में हैं।


पर्यावरण का नुकसान है खतरनाक
रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरण का नुकसान और जलवायु परिवर्तन मिलकर स्थानीय और क्षेत्रीय पारिस्थितिक तंत्रों में महत्वपूर्ण परेशानियों तक पहुंचने की संभावना को बढ़ाते हैं। जब यह पार हो जाता है,तो पर्यावरण में बदलाव स्थायी हो जाते हैं और उन्हें पलटा नहीं जा सकता। उदाहरण के लिए, चेन्नई में तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार की वजह से इसके आर्द्रभूमि क्षेत्र में 85 फीसदी की कमी आई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के मुताबिक, इन आर्द्रभूमियों की वजह से जल प्रतिधारण, भूजल पुनर्भरण और बाढ़ नियंत्रण में भारी कमी आई है। 
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