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प्रवासी मजदूर खतरनाक तरीके से पार कर रहे हैं यमुना, कभी भी हो सकता है हादसा
Fri, 22 May 2020 01:52 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 22 May 2020 01:52 PM IST
सार
- हरियाणा से उत्तर प्रदेश जाने के लिए यमुना पार कर रहे हैं प्रवासी मजदूर
- रोजाना 12,000-15,000 प्रवासी मजदूर आ रहे हैं सहारनपुर
- प्रवासी मजदूरों को ले जाने के लिए हरियाणा से चल रही हैं 150-200 बसें
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प्रवासी मजदूर
- फोटो : PTI
विस्तार
पिछले दो हफ्तों से करीब दो हजार प्रवासी मजदूर जिसमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, रात के अंधेरे में यमुना नदी पार कर रहे हैं। हरियाणा से उत्तर प्रदेश जाने के लिए ये प्रवासी मजदूर रबर ट्यूब की मदद से यमुना नदी को पार कर रहे हैं।
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स्पेशल ट्रेन और बसों के चलने के बाद भी इन प्रवासी मजदूरों ने ऐसा जोखिम भरा रास्ता अपनाने का फैसला लिया है। प्रवासी मजदूर गैरकानूनी तरीके से नदी पार कराने वालों को 300 रुपये दे रहे हैं। सहारनपुर का रास्ता पैदल चलकर पूरा करने की आशा में ये कूच कर रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी ने बताया कि करीब दो हजार लोग रोजाना अपनी और अपने परिवार की जान को जोखिम में डालकर ऐसा कर रहे हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिस टूटी-फूटी ट्यूब पर ये लोग बैठकर नदी पार करते हैं, वो इतनी खराब हालत में हैं कि कभी भी फट सकती है।
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सहारनपुर के प्रभागीय कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि बाहर से आने वाली प्रवासी मजदूरों की संख्या कल्पना से परे है। रोजाना 12,000-15,000 प्रवासी मजदूर आते हैं जिनमें से 70 फीसदी लोग आधिकारिक माध्यम यानी कि हरियाणा से भेजी जा रही 150-200 बसों के जरिए आते हैं और बचे लोग नदी या जंगल के रास्ते से सहारनपुर की ओर आ रहे हैं।
सहारनपुर पुलिस ने नदी पार करा रहे तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। सहारनपुर के एसएसपी दिनेश कुमार का कहना है कि सहारनपुर में बस वहीं प्रवासी मजदूर को प्रवेश दिया जा रहा है जो हरियाणा सरकार की ओर से जांच कर बैठाए जा रहे हैं।
दिनेश कुमार ने बताया कि इनमें हजारों लोग ऐसे हैं जो जरूरी प्रक्रिया से वंचित हैं और किसी भी माध्यम से सीमा पार कर सहारनपुर आ रहे हैं। सहारनपुर तीन राज्य की सीमाओं से सटा है, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड।
लॉकडाउन के बाद से सहारनपुर में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर आ रहे हैं। कश्मीर और पंजाब से अपने घर जा रहे प्रवासी मजदूर भी सहारनपुर से होते हुए जा रहे हैं। एक मजदूर प्रवासी का कहना है कि मात्र घर जाना ही उनका लक्ष्य है। इसके लिए नदी पार करनी पड़े, पहाड़ चढ़ना पड़े या कितनी दूरी तय करनी पड़े, हम करेंगे। अगर सरकार मदद करेगी तो अच्छा है नहीं तो हम खुद अपने घर चले जाएंगे।