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केंद्रीय मंत्री बोले: मुफ्त रेवड़ियां बांटने का वादा कर रहे कुछ राजनीति दल, देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर
Sat, 05 Nov 2022 07:36 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 05 Nov 2022 07:36 PM IST
सार
केंद्रीय रेल और कोयला राज्य मंत्री दानवे ने कहा, केंद्र भी उच्च कीमतों पर खाद्यान्न खरीदता है और फिर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए कम कीमतों पर आपूर्ति करता है, जिससे बजट प्रभावित होता है।
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मराठी अर्थशासत्र परिषद को संबोधित करते रावसाहेब दानवे
- फोटो : ट्विटर/ रावसाहेब दानवे
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विस्तार
केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने शनिवार को उन राजनीतिक दलों पर निशाना साधा, जो चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्त की सुविधाएं और सब्सिडी देने का वादा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे बजट बिगड़ जाएगा और देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। दानवे जेईएस कॉलेज में आयोजित 45वें मराठी अर्थशास्त्र परिषद के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।
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केंद्रीय रेल और कोयला राज्य मंत्री ने आगे कहा कि कुछ राजनीतिक दल सेल फोन और टेलीविजन सेट बांटने का चुनावी वादा करते हैं। इससे राजकोष पर बोझ पड़ता है। दानवे ने कहा, केंद्र भी उच्च कीमतों पर खाद्यान्न खरीदता है और फिर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए कम कीमतों पर आपूर्ति करता है, जिससे बजट प्रभावित होता है।
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उन्होंने आगे यह भी दावा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है और देश पहले 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, अब पांचवें स्थान पर है। उन्होंने देश में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी बात कही। केंद्रीय मंत्री ने कहा, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आई है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति गंभीर है। उन्होंने आगे कहा, शिक्षाविदों को छात्रों को कौशल (स्किल) आधारित शिक्षा देने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वे भविष्य के लिए कुशल नागरिक बना सकें।
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वहीं, सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाले अर्थशास्त्री डॉ. आर.बी. भांडवलकर ने 'गलत' आर्थिक नीतियों के लिए केंद्र पर हमला बोला। उन्होंने कहा, बेरोजगारी में वृद्धि, आर्थिक असमानता और धन का असमान वितरण कुछ प्रमुख समस्याएं हैं, जिनका सामना देश कर रहा है। उन्होंने दावा कि सरकार ने योजना आयोग को नीति आयोग में बदल दिया, जो अर्थव्यवस्था की समस्याओं को हल करने में विफल रहा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार सार्वजनिक क्षेत्र में निजीकरण की ओर बढ़ रही है और रोजगार के अवसरों को खत्म कर रही है।