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सियासत: राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना, बोले- पीएम मोदी चुनाव चुराने के लिए उनका इस्तेमाल कर रहे

Wed, 30 Sep 2026 03:46 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 30 Sep 2026 03:46 PM IST
सार

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका इस्तेमाल चुनाव ‘चुराने’ के लिए करते हैं। इंडिया गठबंधन ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर वापस लेने की मांग की है। खरगे ने मतदाता सूची में 13.3 करोड़ नाम हटने का दावा किया। आखिर एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्ति क्या है? चुनाव आयोग का इस विवाद पर क्या कहना है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Politics: Rahul Gandhi Targets CEC Gyanesh Kumar, Alleges PM Modi Is Using Him to ‘Steal Elections’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाए? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध बुधवार को और तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उन्हें चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार देश के अकेले ऐसे नागरिक हैं, जिन्हें आजीवन व्यापक कानूनी छूट मिली हुई है। यह आरोप ऐसे समय लगाया गया है, जब इंडिया गठबंधन के दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा की।

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राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आजीवन व्यापक कानूनी सुरक्षा क्यों मिली हुई है। इसके जवाब में उन्होंने खुद आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी उनका इस्तेमाल चुनाव ‘चुराने’ के लिए करते हैं। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है। इसी मुद्दे पर इंडिया गठबंधन की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है तथा मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मामलों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
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इंडिया गठबंधन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों की?
इंडिया गठबंधन की बैठक में खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर को लेकर गंभीर सवाल उठाए। खरगे ने दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज की हैं। इन आपत्तियों को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि उसके भीतर होने वाली चर्चा और अलग-अलग राय संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा एसआईआर से जुड़े फैसले नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।

एसआईआर को लेकर खरगे की सबसे बड़ी आपत्ति क्या है?
खरगे ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को वापस लेने की मांग की। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और इससे वास्तविक मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। खरगे ने दावा किया कि 13.3 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि भविष्य के चुनावों में एसआईआर से पहले वाली मतदाता सूची को आधार बनाया जाए। साथ ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधारने की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि किसी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे सूचना, कारण और अपील का प्रभावी मौका दिया जाए।

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पहली बार वोट देने वाले युवाओं को लेकर क्या मांग उठी?
खरगे ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों से नए मतदाताओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में युवा मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पंजीकरण की व्यवस्था सरल होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए। खरगे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 की भावना के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग जरूरी है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव से जुड़ी पूरी प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही की मांग की।

इंडिया गठबंधन की बैठक में कौन-कौन से दल शामिल हुए?
इंडिया गठबंधन की इस बैठक में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार, शिवसेना-यूबीटी, राष्ट्रीय जनता दल, माकपा, भाकपा, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, भाकपा-माले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस, मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, विदुथलाई चिरुथिगल काची, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, केरल कांग्रेस-जेकब और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में एसआईआर, मतदाता सूची में बदलाव, चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची से जुड़े बदलावों की जानकारी सार्वजनिक करने और वैध मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई।

राहुल गांधी के बयान से विवाद कितना बढ़ा?
राहुल गांधी का ताजा बयान मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के लगातार बढ़ते राजनीतिक विरोध का हिस्सा है। विपक्षी दल एसआईआर और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और अपनी प्रक्रिया को कानूनी तथा निर्धारित नियमों के अनुरूप बताता है। इसी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग और तेज हुई है। एसआईआर की वैधता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के लिए मामला स्वीकार किया है। ऐसे में अब विवाद का एक बड़ा हिस्सा मतदाता सूची की प्रक्रिया, चुनाव आयोग की संस्थागत जवाबदेही और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर है।

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