Politics: राहुल की मैकेनिक विजिट, मोदी की मेट्रो यात्रा, ऐसे बदल रहा लोकसभा चुनावों से पहले सियासी माहौल
Politics: सियासी जानकार कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यही खासियत है कि वह सीधे तौर पर लोगों से मुखातिब होते हैं और लोगों के बीच एक बड़ा संदेश भी देते हैं। लेकिन अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी सीधे तौर पर लोगों से मिलने का सिलसिला शुरू किया है...
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जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे सियासत करने वाले बड़े-बड़े नेता अपने अंदाज में लोगों से सीधे मिलने और संदेश देने का सिलसिला शुरू कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने कुछ दिन पहले दिल्ली के करोल बाग में बाइक बनाने वाले मैकेनिक की दुकान पर जाकर उन लोगों से सीधा संपर्क किया था। उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं से जनता से सीधे मिलने और उनके लिए मददगार के तौर पर खड़े रहने का मंत्र दिया था। शुक्रवार को तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में एक बार फिर से मेट्रो में सफर कर लोगों से सीधे रूबरू हुए और बातचीत की। लोकसभा चुनावों से पहले अनौपचारिक तौर पर लोगों से मुखातिब होकर उनके सुख-दुख में शामिल होने के लिए और भी कई राजनीतिक दलों ने अपनी बड़ी रणनीति बना ली है। कुछ महीनों के भीतर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी तो ग्राउंड स्तर पर इसी तरह की एक बड़ी और विशेष योजना के तहत लोगों से सीधे मुखातिब होने वाली है।
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पीएम मोदी और राहुल सीधे जुड़ रहे लोगों से
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार सुबह दिल्ली विश्वविद्यालय जाने के लिए मेट्रो का सफर किया। दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन तक सफर करने वाले लोगों और युवाओं से बात की। सियासी जानकार कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यही खासियत है कि वह सीधे तौर पर लोगों से मुखातिब होते हैं और लोगों के बीच एक बड़ा संदेश भी देते हैं। लेकिन अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी सीधे तौर पर लोगों से मिलने का सिलसिला शुरू किया है। राजनीतिक विश्लेषक सदानंद पवार कहते हैं कि राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जिस तरीके से लोगों से मुलाकात की उसका सियासी असर भी दिखा है। अब राहुल गांधी कभी ट्रक ड्राइवर से मुलाकात कर रहे हैं तो कभी मैकेनिक से सीधे जाकर उनकी दुकानों पर मुलाकात कर रहे हैं। पवार कहते हैं कि लोगों से इनफॉर्मल तरीके से मिलना और एक प्रोटोकॉल के तहत लोगों से मिलने में जमीन और आसमान का अंतर होता है। वह कहते हैं कि यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी समेत सभी बड़े नेता बखूबी समझते हैं।
सिर्फ मोदी और राहुल ही नहीं अखिलेश ने भी अपनाया है यही फॉर्मूला
लोगों से बगैर किसी प्रोटोकॉल के अचानक जाकर मिलने के जो सियासी मायने और फायदे निकलते हैं, उसे सभी राजनैतिक दल बखूबी समझते हैं। यही वजह है कि सिर्फ नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी ही नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी इसी फॉर्मूले को अपनाया है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि अखिलेश यादव ने अपनी हाल के दिनों में हुई कार्यकर्ताओं की बैठक में स्पष्ट तौर पर यही संदेश दिया था कि वह लोगों के सुख दुख में हर हाल में शामिल हों। इसके अलावा शुक्ला कहते हैं कि अखिलेश यादव अकसर अपने सफर के दौरान साइकिल चलाने वालों से लेकर रेहड़ी फड़ी या दुकान वालों से सीधे तौर पर न सिर्फ मुलाकात करते हैं, बल्कि उनके पास से कुछ न कुछ सामान खरीद कर भी खाते हैं। जीडी शुक्ला कहते हैं कि सीधे तौर पर लोगों से मिलने की राजनीति का यह सिलसिला सुखद तो है ही, लोगों को नेताओं से सीधे तौर पर जोड़ता भी है। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं और लोगों से मुलाकात करते हैं तो उसका असर किसी भी बड़ी रैली या जनसभा में लोगों से सीधे कनेक्ट करने वाले संदेश से कम नहीं होता है।
भाजपा ने पब्लिक कनेक्ट के लिए बनाया सबसे बड़ा प्लान
लोगों से सीधे तौर पर और इनफॉर्मल तरीके से जुड़ने के क्या फायदे होते हैं, इसे सभी राजनैतिक दल बखूबी समझते हैं। बस अंतर सिर्फ इतना है कुछ राजनीतिक दलों के बड़े नेता सीधे तौर पर और इनफॉर्मल तौर पर लोगों से मुलाकात करते हैं और सियासी तौर पर उसका उनको फायदा भी मिलता है। फिलहाल इस सामान्य और मजबूत पब्लिक कनेक्ट की योजनाओं पर काम करते हुए भाजपा ने कई बड़ी तैयारियां भी की हैं। भाजपा से जुड़े नेताओं के मुताबिक उनमें से बहुत सी तैयारियों के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से भोपाल के दौरान हुई मुलाकात में जिक्र भी किया था। पार्टी की योजनाओं के मुताबिक अगले कुछ दिनों में देशभर के सभी भारतीय जनता पार्टी के बूथ स्तर पर लोगों की मदद के लिए न सिर्फ पढ़ने के लिए लाइब्रेरी और डिस्प्ले बोर्ड तैयार किए जा रहे हैं। बल्कि वार्ड में लोगों की चिकित्सकीय मदद के साथ-साथ पढ़ाई करने की व्यवस्थाओं में भी बूथ स्तर के कार्यकर्ता सीधे तौर पर शामिल होने जा रहे हैं। पार्टी ने इनफॉरमल तरीके से लोगों से मुलाकात करने की अभियान में बीते एक महीने से अपने कार्यकर्ताओं को लोगों के घर-घर जाकर मिलने और उनके साथ भोजन करने की प्रक्रिया को विशेष अभियान के तौर पर शुरू किया था। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद अविनाश राय खन्ना कहते हैं कि उनकी पार्टी का ध्येय भी लोगों की सेवा करना है। उनका प्रत्येक नेता और कार्यकर्ता इसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ता है। उनकी पार्टी लोगों की सेवा चुनाव देखकर नहीं बल्कि हर वक्त करने के लिए न सिर्फ तैयार रहती है बल्कि सबसे आगे खड़ी रहती है।
कांग्रेस ने भी बनाया लोगों से मिलने का बड़ा प्लान
कांग्रेस ने भी लोगों से सीधे तौर पर मिलने का बड़ा प्लान बनाया है। पार्टी से जुड़े नेताओं और रणनीतिकारों के मुताबिक राहुल गांधी जिस तरीके से ट्रक ड्राइवर, मैकेनिक, लोगों को खाना पहुंचाने वाले, ऑटो ड्राइवर, कैब ड्राइवर राह चलते लोगों से मुलाकात कर रहे हैं, वह पार्टी की बदली हुई एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। योजना के मुताबिक राहुल गांधी अगले कुछ महीने के भीतर ऐसे ही बहुत से रोजमर्रा की जिंदगी में कमाने खाने वालों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं ने अपने ब्लॉक स्तर, जिला स्तर और नगर स्तर के कार्यकर्ताओं को लोगों से सीधे मुलाकात कर उनकी समस्याओं में हर हालत में मदद करने के लिए भी कहा है। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पीएल पुनिया कहते हैं कि उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लोगों की मदद के लिए हर वक्त पहले से ही तैयार रहते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना जैसी महामारी के दौरान जिस तरह उनकी पार्टी ने हेल्थ किट के साथ एक व्यक्तिगत चिट्ठी लिखकर लोगों से सीधे संपर्क बनाया, यह उसी का असर है कि लोग कांग्रेस पार्टी के साथ सीधे तौर पर जुड़े रहे हैं।
भारत जोड़ो यात्रा के बाद भी मुलाकात का सिलसिला जारी
पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ऐसे ही न जाने कितने लोगों से इनफॉर्मल तरीके से मुलाकात कर उनके दुख दर्द को समझा था। राजनीतिक जानकार एम सुदर्शन कहते हैं कि निश्चित तौर पर लोगों से इस तरह मिलने का सियासी फायदा होता है। सुदर्शन के मुताबिक कर्नाटक में जो नतीजे कांग्रेस के लिए आए हैं, उसमें आप राहुल गांधी की इस तरह लोगों से मिलने जुलने की प्रक्रिया के योगदान को कम नहीं कर सकते हैं। वह कहते हैं कि सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब लोगों से इतना इनफॉर्मल होकर मिलते हैं, तो उसका बहुत बड़ा सियासी असर पड़ता है। राजनेताओं के मिलने जुलने का यह सिलसिला अब ज्यादा ही बढ़ता हुआ दिख रहा है, तो इसका सियासत में बड़ा असर भी दिखेगा। सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राहुल गांधी और अखिलेश यादव ही नहीं बल्कि अन्य पार्टियों के नेता भी लोगों से अब इनफॉर्मल तरीके और बगैर किसी प्रोटोकॉल के मुलाकातों का सिलसिला शुरू कर रहे हैं।