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Politics: पीएम ने कांग्रेस पर किए हमले, क्षेत्रीय दलों को बख्शा, राष्ट्रीय मुद्दों को केंद्र में रखने की कोशिश

Thu, 08 Feb 2024 05:03 AM IST
यशोधन शर्मा हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Thu, 08 Feb 2024 05:03 AM IST
सार

पीएम ने कांग्रेस के दर्शक दीर्घा में बैठने की भविष्यवाणी की। दूसरी ओर पीएम ने राज्यसभा में कांग्रेस के लड़ाई में दूर-दूर तक नहीं होने का संदेश दिया और उसकी कम से कम 40 सीटें आने की कामना की।

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Politics PM attacks Congress spares regional parties tries to keep national issues at the center
पीएम मोदी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों में ढाई घंटे से भी ज्यादा समय लिया। इस दौरान पीएम का हमला सिर्फ कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार तक सीमित रहा। चाहे भ्रष्टाचार हो या क्षेत्रवाद, पीएम ने एक बार भी कांग्रेस के सहयोगी दलों या दूसरे क्षेत्रीय दलों पर निशाना साधना तो दूर उनका नाम तक नहीं लिया। इसके उलट इन क्षेत्रीय दलों के नेताओं के चर्चित बयानों को भी कांग्रेस पर हमले के लिए ही इस्तेमाल किया।

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सवाल है कि आखिर पीएम ने भाषण कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार तक ही क्यों सीमित रखा?  वह भी तब जब खुद पीएम ने लोकसभा में कहा कि चुनाव से पहले ही कांग्रेस की दुकान में ताला लग गया है। पीएम ने कांग्रेस के दर्शक दीर्घा में बैठने की भविष्यवाणी की। दूसरी ओर पीएम ने राज्यसभा में कांग्रेस के लड़ाई में दूर-दूर तक नहीं होने का संदेश दिया और उसकी कम से कम 40 सीटें आने की कामना की। दरअसल, भाजपा की पूरी कोशिश लोकसभा चुनाव को मोदी बनाम राहुल के बीच जंग का रूप देने की है। भाजपा नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों व इसके नेताओं पर पीएम के हमले के कारण चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों की जगह क्षेत्रीय मुद्दे प्रभावी हों।
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कांग्रेस अब भी मुख्य प्रतिद्वंद्वी
बीते दो लोकसभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर अभी भी कांग्रेस ही भाजपा का मुकाबला कर रही है। देश के 15 ऐसे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं, जहां दोनों के बीच सीधा मुकाबला होता आया है। बीते चुनाव में इन राज्यों की 190 सीटों पर इन्हीं दो दलों के बीच सीधा मुकाबला हुआ था, जिसमें भाजपा 175 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी। इस बार भी इन सभी राज्यों में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस ही रहेगी। कांग्रेस एमपी, छत्तीसगढ़ व राजस्थान में चुनाव हारी है, पर उसे तकरीबन 40 फीसदी वोट मिले।
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सहयोगियों को दूर करने की रणनीति
जदयू के निकलने व तृणमूल कांग्रेस के तेवर दिखाने के कारण इंडिया गठबंधन कमजोर दिख रहा है, हालांकि यह गठबंधन सामाजिक न्याय खासतौर पर आरक्षण, जातिगत जनगणना के सवाल पर भाजपा को घेरना चाहता है। चूंकि, सामाजिक न्याय की राजनीति में कांग्रेस का ट्रैक रिकार्ड खराब रहा है, इसलिए भाजपा कांग्रेस की कमियां गिनाकर उसके सहयोगियों को भी दूर करने की रणनीति पर काम कर रही है।


मोदी बनाम राहुल क्यों?
भाजपा चाहती है कि लोकसभा चुनाव में धारणा यह बने कि एक तरफ पीएम मोदी हैं तो दूसरी ओर राहुल गांधी। लोकप्रियता की दृष्टि से राहुल मोदी से बहुत पीछे हैं। पार्टी को लगता है कि अगर नेतृत्व का सवाल प्रमुख मुद्दा बना तो मोदी की सशक्त और स्वीकार्य छवि का लाभ उसे मिलेगा। दोनों सदनों में पीएम ने परिवारवाद, भ्रष्टाचार, क्षेत्रवाद और उम्मीद के अनुरूप विकास नहीं होने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा। जबकि, कई क्षेत्रीय दलों में भी परिवारवाद, भ्रष्टाचार है।

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