ट्विन टावर पर राजनीति: भाजपा और सपा आमने-सामने, लोगों ने कहा- भाजपा सभी भ्रष्टाचारियों को जेल भेजे
उत्तर प्रदेश सरकार के दोनों डिप्टी सीएम ने ट्वीट कर सपा और अखिलेश यादव पर साधा निशाना। सपा ने कहा कि उनकी सरकार जब आई तो मामला कोर्ट में था।
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नोएडा में भ्रष्टाचार के जीते जागते सबसे बड़े उदाहरण में से एक ट्विन टावर के जमींदोज होने पर सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है। भाजपा ने ट्विन टावर में भ्रष्टाचार को समाजवादी पार्टी का जीवंत प्रमाण बताया। उत्तर प्रदेश सरकार के दोनों उप मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक ने बाकायदा गिराए जाने वाले ट्विन टावर के भ्रष्टाचार में समाजवादी पार्टी को न सिर्फ घेरा है, बल्कि भाजपा के सुशासन की तारीफ भी की है। हालांकि, समाजवादी पार्टी के दोनों उप मुख्यमंत्रियों के इस ट्वीट को बेमतलब का ट्वीट करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी पर ही निशाना साधा है।
नोएडा में गिराए जाने वाले सुपरटेक के ट्विन टावर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने रविवार को सुबह साढ़े छह बजे ही ट्वीट कर समाजवादी पार्टी पर हमलावर हो गए। बृजेश पाठक लिखते हैं कि नोएडा का सुपर ट्विन टावर समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार और अराजकता की नीति का जीता जागता उदाहरण है।
उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार के प्रतीक के तौर पर खड़ी यह अवैध इमारत आज जमींदोज हो रही है। पाठक ने लिखा यही न्याय है और यही सुशासन। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के इस ट्वीट के बाद उत्तर प्रदेश के ही दूसरे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी दिन में पौने बारह बजे सुपरटेक के बनाए गए इस अवैध ट्विन टावर पर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को जिम्मेदार बताया।
मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में भ्रष्टाचार और अराजकता की नीति का इससे बड़ा जीवंत प्रमाण और क्या हो सकता है। वो कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार की इमारत ढहा दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि यही न्याय है और यही सुशासन है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि नोएडा ट्विन टावर को लेकर किए गए उत्तर प्रदेश सरकार के दोनों उप मुख्यमंत्रियों के ट्वीट महज राजनीतिक ट्वीट हैं। चौधरी कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को कुछ कहना है इसीलिए वह कह रही है। उनका आरोप है कि हकीकत में अवैध निर्माण की अनुमति और बनाने का सिलसिला तो उनकी संयुक्त सरकार में हुआ था और वो कहते हैं कि तब क्यों नहीं इस अवैध बिल्डिंग को बनाने के पूरे क्रम को रोका गया। चौधरी कहते हैं कि जब उनकी सरकार आई तब यह मामला पहले से ही हाईकोर्ट में था। उनकी सरकार ने तो बाकायदा इस भ्रष्टाचार की मुहिम में लड़ाई लड़ने वाले आरडब्लूए का साथ दिया।
समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के आरोप-प्रत्यारोप को लेकर आरडब्ल्यूए का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल ने अगर अपनी इच्छाशक्ति जाहिर की होती तो शायद इस तरीके के अवैध निर्माण की अनुमति ही नहीं मिलती। आरडब्लूए से जुड़े और इस अवैध टावर की लड़ाई लड़ने वालों में शामिल आरएन पारेख कहते हैं कि राजनीतिक बयानबाजी सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने के लिए ही की जा रही है।
पारेख कहते हैं कि सरकार का शिकंजा अगर इतना मजबूत होता तो इस अवैध ट्विन टॉवर को मंजूरी देने वाले नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन सीईओ मोहिंदर सिंह, पूर्व एसीओ आरपी अरोड़ा समेत दूसरे बड़े नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी अब तक न सिर्फ जेल में होते बल्कि उनको कड़ी से कड़ी सजा मिल चुकी होती। उनका कहना है यह लड़ाई आरडब्ल्यूए ने जीती है। सरकारें तो महज तमाशा देखती रही। मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गया और आखिरकार उनको न्याय मिला।
राजनैतिक गलियारों में चर्चाएं इस बात को लेकर के जरूर है कि इस पूरे मामले में राजनीतक दल अपने-अपने लिहाज से चीजों को आगे देख रहे हैं। सुपरटेक के एमेरल्ड कोर्ट में रहने वाले अशोक अग्रवाल कहते हैं किसी भी राजनीतिक पार्टी को इसम बेवजह क्रेडिट लेने की आवश्यकता नहीं है।
वह कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भ्रष्टाचार की इमारत गिराई गई है। इसलिए इसमें किसी भी राजनीतिक पार्टी का कोई योगदान नहीं है। वह कहते हैं कि सपा बसपा और भाजपा सरकार में लगातार वह जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क में रहे लेकिन किसी ने कोई भी मदद नहीं की। हालांकि एमेरल्ड कोर्ट की ही रहने वाली कनक अरोड़ा कहती है कि कम से कम भाजपा सरकार में यह इमारत तो गिरी। उनको भरोसा है कि आने वाले दिनों में वह जिम्मेदार अधिकारी भी जेल में जाएंगे और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी।
आरएडब्ल्यू से जुड़े लोगों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी अगर इस पूरे मामले का क्रेडिट लेना चाहती है तो उन सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को जेल के भीतर डालना होगा जिन लोगों ने इस अवैध इमारत को बनवाने में मदद की थी। वो कहते हैं कि सिर्फ इमारत को गिरा देना ही भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार नहीं है बल्कि इस इमारत को बुलंद करने में सहयोग देने वाले नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों से लेकर बिल्डर तक को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
मनोहर लाल शुक्ला कहते हैं कि अभी तो आगे भी बड़ी लंबी लड़ाई लड़नी है। जिम्मेदारों के खिलाफ तो कोई कार्यवाही नहीं हुई है। भारतीय जनता पार्टी के दोनों मुख्यमंत्रियों ने ट्वीट कर योगी सरकार के सुशासन की प्रशंसा की है तो वह उम्मीद करते हैं कि योगी सरकार में ही यह जिम्मेदार भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी न सिर्फ जेल में होंगे बल्कि इनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की होनी चाहिए।