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कृषि कानूनों को 'मुद्दा' बना रहे राजनीतिक दल, जानें अब तक किस-किस पार्टी ने मारी पलटी?
Mon, 07 Dec 2020 05:53 PM IST
अनिल पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनिल पांडेय
Updated Mon, 07 Dec 2020 05:53 PM IST
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किसान आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
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देशभर में कृषि कानूनों को लेकर टकराव चरम पर है। दिल्ली के चारों तरफ किसान डटे हुए हैं और उन्होंने 8 दिसंबर को भारत बंद का एलान किया है। किसानों के इस बंद को कांग्रेस, एनसीपी, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत तमाम दल समर्थन दे रहे हैं। इस बीच भाजपा ने विपक्षी दलों पर पलटी मारने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि जब इन पार्टियों की सरकार थी, तब उन्होंने भी कृषि कानून का समर्थन किया था। अब यही राजनीतिक दल अपनी राजनीति चमकाने के लिए विरोध जता रहे हैं। इस रिपोर्ट में हम जानते हैं कि कृषि कानूनों पर कौन-कौन से राजनीतिक दल मुद्दा बना रहे हैं और उन्होंने अपनी सरकार के दौरान इस मसले पर क्या कहा था?
कांग्रेस ने भी की थी कृषि में विदेशी निवेश की बात
सोनिया गांधी और राहुल गांधी
- फोटो : पीटीआई
गौर करने वाली बात है कि कांग्रेस अब कृषि कानून के विरोध में उतरे किसानों का समर्थन कर रही है, लेकिन एक समय पर उसने खुद कृषि बिल की सिफारिश की थी। साथ ही, कृषि में विदेशी निवेश की भी बात कही थी। गौरतलब है कि कांग्रेस ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में कहा था कि कांग्रेस पार्टी एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट एक्ट यानी एपीएम एक्ट को समाप्त करेगी और किसानों को अपनी फसलों के निर्यात व व्यापार पर सभी बंधनों से मुक्त करेगी।
शरद पवार ने भी मारी पलटी
शरद पवार
- फोटो : ANI
एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी अब कृषि कानून के विरोध में किसानों के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं, लेकिन साल 2004 से 2014 के दौरान जब शरद पवार केंद्र की यूपीए सरकार में कृषि मंत्री थे, उस दौरान उन्होंने कृषि में निजी निवेश की जोरदार वकालत की थी। साथ ही, अगस्त 2010 और नवंबर 2011 के दौरान सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस संबंध में पत्र भी लिखे थे। इन पत्रों में शरद पवार ने लिखा था, 'केंद्र सरकार की ओर से 2003 में तैयार किए गए मॉडल एपीएमसी कानून की तर्ज पर ही राज्यों को भी अपने एपीएमसी एक्ट में बदलाव करना चाहिए। इससे प्राइवेट सेक्टर को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।'
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पंजाब सरकार ने भी लिया यू-टर्न
पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार भी किसानों के पक्ष में खड़ी हुई है, लेकिन सीएम कैप्टन अमरिंदर खुद एपीएमसी एक्ट में बदलाव कर चुके हैं। दरअसल, साल 2017 के दौरान सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एपीएमसी एक्ट में संशोधन किया था और निजी मंडियों के लिए रास्ता साफ कर दिया था। हम कैप्टन अमरिंदर कृषि कानूनों से एमएसपी बंद होने की बात कह रहे हैं।
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आम आदमी पार्टी भी अपनी बात से मुकरी
अरविंद केजरीवाल
- फोटो : एएनआई
बता दें कि नवंबर 2020 के दौरान दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने कृषि कानून का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, लेकिन अब पार्टी किसानों के विरोध के समर्थन में उतर चुकी है।