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कानों देखी: सिसोदिया की गिरफ्तारी का 'सियासी' इंतज़ार, सीबीआई ने तो लटका दी है तलवार

Tue, 08 Nov 2022 02:13 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 08 Nov 2022 02:13 PM IST
सार

कानों देखी: भाजपा के दिल्ली के एक नेता का कहना है कि अब तो आम आदमी पार्टी के नेताओं ने खुद ही प्रचार कर करके मनीष सिसोदिया को सतेंद्र जैन की श्रेणी में ला दिया है। पार्टी के एक पुराने नेता का कहना है कि जब तक सिसोदिया का विकेट नहीं गिरेगा, तब तक आम आदमी पार्टी की सरकार के माथे पर पसीना भी आना मुश्किल है...

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Political gossips: when manish sisodia will be arrested, different views in political circle
उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

मनीष सिसोदिया को लेकर तरह-तरह की चर्चा हैं। यह भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों में है। आप के कई नेताओं को लग रहा है कि 15 नवंबर तक दिल्ली के उपमुख्यमंत्री सिसोदिया शराब घोटाले के आरोप में गिरफ्तार हो जाएंगे। हालांकि कुछ नेताओं को लग रहा है कि सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद एमसीडी का चुनाव उनकी पार्टी जीत लेगी। इस बारे में संघ के एक नेता ने प्रयागराज में हुई बैठक का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सिसोदिया की गिरफ्तारी गुजरात चुनाव के बाद होनी चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क है कि इससे भाजपा को गुजरात में बड़ा फायदा होगा। इस बार के चुनाव में कांग्रेस के बाद वैसे भी आम आदमी पार्टी की टीआरपी है। वहीं भाजपा के दिल्ली के एक नेता का कहना है कि अब तो आम आदमी पार्टी के नेताओं ने खुद ही प्रचार कर करके मनीष सिसोदिया को सतेंद्र जैन की श्रेणी में ला दिया है। पार्टी के एक पुराने नेता का कहना है कि जब तक सिसोदिया का विकेट नहीं गिरेगा, तब तक आम आदमी पार्टी की सरकार के माथे पर पसीना भी आना मुश्किल है।

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कांग्रेस अध्यक्ष खरगे से भी 'पावरफुल' कौन है?

कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से करा लिया। मल्लिकार्जुन खरगे के अध्यक्ष बनने के बाद पहले की तुलना में कांग्रेस फैसले भी तेजी से ले रही है। लेकिन पार्टी के नेताओं में एक पहेली चल रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता 24 अकबर रोड में मिले। उनसे एक नेता ने पूछ लिया कि बताइए अध्यक्ष से ज्यादा पावरफुल कौन है? साथ में शर्त भी लगाई कि सोनिया, राहुल, प्रियंका को छोड़कर। नेता जी सकपका गए। झीनी मुस्कान चेहरे पर तैर आयी और आगे बढ़ गए। लेकिन बात निकली थी तो दूर तलक ही जानी है। छोटे-बड़े नेताओं ने उस चेहरे की तलाश तेज कर दी। जो निकलकर आया आप भी जान लीजिए। कांग्रेस के कई नेताओं ने माना कि पार्टी सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा के बाद सबसे प्रभावी नेता कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल हैं। वेणुगोपाल की इस 'पावर' के पीछे खास तौर पर राहुल गांधी हैं। राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले एक नेता का कहना है कि यही सब देखकर तो अशोक गहलोत ने राजस्थान छोड़ा ही नहीं।

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राघव चड्ढा के चमक रहे हैं सितारे

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा की पार्टी में टीआरपी भी बढ़ रही है और राजनीति में सितारे भी चमक रहे हैं। नई सोच के युवा चड्ढा ने अपनी मीडिया में पकड़ भी मजबूती से बना रखी है। उनके पास एक अच्छी खासी टीम है और चड्ढा को छींक आते ही उनके सोशल मीडिया से लेकर मीडिया मैनेजरों तक को जुकाम हो जाता है। अभी पिछले दिनों एक नेता की दावत में आम आदमी पार्टी के कुछ नेता इकट्ठे हुए थे। अचानक इसमें राघव चड्ढा को लेकर किसी ने चर्चा छेड़ दी। चड्ढा का नाम आते ही नेता ने अपनी भविष्य की राजनीति का हवाला देते हुए सहयोगियों को चुप करा दिया। बोले भी कि सब अच्छा भला चल रहा है, मरवाओगे क्या? वह दिन भी दूर नहीं जब राघव चड्ढा से मिलने का समय मांगना पड़ेगा।

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आदित्य ठाकरे और राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा महाराष्ट्र में प्रवेश करने वाली है। भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी का साथ जनता बड़े जोश से दे रही है। भारी भीड़ का उमड़ऩा जारी है। इसके प्रचार-प्रसार का पूरा जिम्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री और मीडिया का प्रभार देख रहे जयराम रमेश खुद देखते हैं। उन्होंने दिल्ली से कई नेताओं को इसके लिए लगा रखा है। बताते हैं कि भारत जोड़ो यात्रा की सफलता को देखकर शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के वारिस आदित्य ठाकरे इससे जुडऩा चाहते हैं। आदित्य ने ठाकरे परिवार की अनुमति लेकर इस सूचना को राहुल गांधी तक पहुंचा दिया है। वहां से यह सूचना दिल्ली भी आई और कांग्रेस पार्टी के नेता इसे काफी अच्छा मान रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि इससे महाराष्ट्र में कांग्रेस को मजबूती मिलनी तय है।

झारखंड में अभी तो चल रही है एक और लड़ाई

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस समय कांटों भरा ताज पहने हुए हैं। काफी सतर्कता बरतकर चल रहे हैं। वह नौ नवंबर को झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहते हैं। ताकि इसमें दो महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जा सके। इसमें खलिहान और आरक्षण बिल है। बताते हैं हेमंत सोरेन को अपने विरुद्ध चली जाने वाली हर चाल का अंदाजा है। वह राज्यपाल रमेश बैंस के संकेत को भी गंभीरता से ले रहे हैं। राज्यपाल ने हाल में संकेत किया है कि रांची में जल्द ही बड़ा धमाका हो सकता है। राज्यपाल के संकेत का अर्थ हेमंत सोरेन की सरकार के भविष्य से लगाया जा रहा है। इसलिए हेमंत केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय को भी चुनौती दे रहे हैं। उन्हें पता है कि चार महीने पहले से उनकी सरकार विरोधी दल के खास निशाने पर है। आईएएस पूजा सिंघल की गिरफ्तारी के बाद से वह कोई गलती दोहराना नहीं चाहते।

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