फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   political gossip: newly BJP leader jyotiraditya scindia attitude not liking by fellow leaders

कानों देखी: भगवा पटका पहन चुके ग्वालियर के महाराज का 'स्टाइल' अखर रहा है भाजपा नेताओं को

Fri, 20 Mar 2020 02:03 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 20 Mar 2020 02:03 PM IST
विज्ञापन
political gossip: newly BJP leader jyotiraditya scindia attitude not liking by fellow leaders
ज्योतिरादित्य सिंधिया-जेपी नड्डा - फोटो : Twitter (सांकेतिक)

ज्योतिरादित्य सिंधिंया महाराज अपनी ही पार्टी के कई नेताओं को खटक रहे हैं। भगवाई बने महाराज को लेकर एक भाजपा के नेता ने कहा कि आ गए हैं। अब उन्हें हमारी संस्कृति में ढलना पड़ेगा। बताते हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़े नेताओं से संवाद बेधड़क जारी है, लेकिन वह मझोले नेताओं को अपने कांग्रेस स्वभाव से भाव दे रहे हैं। इसको लेकर मध्य प्रदेश के ही कुछ नेताओं में नाराजगी शुरू हो गई है।

विज्ञापन


विज्ञापन


राज्यसभा के एक सांसद ने कहा कि अगर सिंधिया बाबू में दम होता, तो अपनी जमी जमायी राजनीति का कारोबार छोड़कर हमारे यहां उधार की राजनीति करने आते। सांसद महोदय थोड़ा स्वभाव से अक्खड़ हैं। आगे बोलते हुए कहा कि उन्होंने लोकसभा में राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य की केमिस्ट्री देखी है। उन्हें खुद पक्का यकीन है कि भाजपा में महाराज का लंबा चल पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। कारण साफ है। अभी ग्वालियर, चंबल संभाग में संघ, भाजपा के नेताओं को पीछे धकेल कर सिंधिया सेना को जगह भी बनानी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कांग्रेस के लल्लू जी पार्टी को 'लल्लू' बनाने में जुटे  

कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को बनाया है। अजय कुमार लल्लू के पास जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के करीबी संदीप सिंह का फोन जाता है, तो वह कार्यालय में सीट से उठकर खड़े हो जाते हैं। संदीप प्रतापगढ़ी हैं और जेएनयू के वामपंथ मॉडल की सोच रखते हैं।

बताते हैं इन दिनों कांग्रेस के भीतर कुछ ऐसी खिचड़ी पक रही है कि पार्टी अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रही है। एक तो कांग्रेस के पास यूपी में न तो नेता हैं, और न ही जनाधार। ऊपर से जो बचा खुचा है, उसे भी पार्टी खुद ही जड़ से उखाड़ बाहर कर रही है। जातिगत समीकरण के लिहाज से पहले ब्राह्मण, क्षत्रिय, ओबीसी, दलित, मुसलमान कांग्रेस का वोट बैंक था।

समय के साथ ओबीसी को मुलायम ले उड़े, दलित बसपा की मायावती के साथ चला गया। क्षत्रिय पॉवर पालिटिक्स के हिसाब से फ्लोटिंग कास्ट में बदल गया। अल्पसंख्यकों का कांग्रेस, बसपा, सपा में बंटवारा हो गया। अब बचे ब्राह्मण, जो पहले बड़ी संख्या में कांग्रेस के साथ थे और अब अजय कुमार लल्लू की पार्टी इसी समाज के नेताओं के पर कतर कर कांग्रेस को 'लल्लू' बनाने में जुट गई है।

गोटी फैंकना कोई नीतीश कुमार से सीखे

खबरची भी नीतीश कुमार के कौशल से हैरान हैं। राजनीति की चौसर पर जो भी पासा फेंक देते हैं हिट हो जाता है। लालू को छोड़ा, जार्ज को पकड़ा। जार्ज को छोड़ा शरद को पकड़ा। शरद के साथ लालू को फिर पकड़ा। शरद और लालू को छोड़ा तो भाजपा को पकड़ा। बीच में पीके, पवन वर्मा की तरह कई नेता आते-जाते रहे, लेकिन नीतीश लगातार ऊपर चढ़ते रहे।

न मुख्यमंत्री की कुर्सी गई और न रुतबा। राजनीति के पंडित सोच रहे थे कि शायद सीएए, एनपीआर, एनआरसी की हवा नीतीश का तंबू उड़ा देगी, लेकिन नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव के साथ एक बैठक करने के बाद बिहार के राजनीति की फिर दिशा बदलनी शुरू कर दी है।

अब जीतनराम मांझी महादलित का कुनबा लेकर नीतीश कुमार से जुड़ना चाह रहे हैं। बेरोजगार उपेन्द्र कुशवाहा को भी गलती सुधारने का मौका दिखाई दे रहा है। दिशाहीन कांग्रेस अभी रोशनी खोज रही है।

ऐसे में तेजस्वी यादव के सीएम फेस के नाम पर महागठबंधन को लाचार गठबंधन बनाने की कवायद जारी है। लोजपा के राम विलास पासवान भी नीतीश के इस नए रसायन से हैरान हैं। देखते जाइए साल के अंत तक होता है क्या?

काश! रावण की लंका में लग जाती आग

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती को ऐसे अवसर या दलित नेता की तलाश है को आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण की आजाद समाज पार्टी को घुटने के बल बैठा दे। रावण ने नई पार्टी बनाकर मायावती की नींद हराम कर दी है। उत्तर प्रदेश के एक बड़े बसपा नेता का कहना है कि पिछले दो दशक में बसपा का छह-सात फीसदी वोट खिसक चुका है। कई छोटी-छोटी जातियों के नेता ने अपनी पार्टी बनाकर झटका दिया।

ऊपर से रावण तो अब सीधे मुख्य वोटबैंक में सेंध लगा रहा है। इसलिए बसपा अपना कॉडर वोट बैंक मजबूत करने में लग गई है। तीन दिसंबर 1986 को पैदा हुए चंद्रशेखर सहारनपुर में दलितों, ठाकुरों के बीच टकराव के बाद चर्चा में आए थे। दो-तीन साल में दलित युवाओं के नेता बन गए हैं। जहां जाते हैं युवाओं की भीड़ आ रही है।

युवा दलित चिंतक भी रावण के साथ हैं। यू-ट्यूब पर रावण पॉवर न्यूज वीडियो के जरिए देखा जा सकता है। बताते हैं इस नए बदलाव को लेकर मायावती के कान खड़े, भाजपा के सामान्य हैं। कारण साफ है। दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में कमजोर सपा, कमजोर बसपा और जगह ढूंढती कांग्रेस के बीच कमल आसानी से खिल जाएगा। उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री सुनील बंसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह आसानी से समझ में भी आ रहा है।

अमित शाह ने क्यों चुना आपरेशन लोटस के लिए येदियुरप्पा का बेंगलुरु?

पॉवर पॉलिटिक्स समझने वाले सोच रहे थे कि जब भी कमलनाथ सरकार गिरानी होगी तो सिंधिया समर्थक विधायकों को दिल्ली से सटे गुरुग्राम में लाए जाएंगे। लेकिन टीम अमित शाह के सदस्य बताते हैं राजनीति के चाणक्य अमित शाह लोगों की समझ से दूर की योजना बनाते हैं। भाजपा अध्यक्ष नड्डा के बेटे के रिसेप्शन में शिवराज सिंह से चर्चा के बाद अमित शाह ने धर्मेंद्र प्रधान को इस एजेंडे में लगाया। जफर इस्लाम के कंधे पर जिम्मेदारी सौंपी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से बात की।

इस बार आपरेशन लोटस के लिए हरियाणा का गुरुग्राम सही नहीं समझा गया। बताते हैं आपरेशन उत्तराखंड और आपरेशन कर्नाटक के बाद आपरेशन मध्य प्रदेश का पहला एपीसोड गुरुग्राम में हुआ था। वह कांग्रेस के नेताओं की दबाव की राजनीति थी, लेकिन गुरुग्राम में कांग्रेस के नेताओं के सिंधिया समर्थक विधायकों से संपर्क कर लेने की आशंका थी।

जबकि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के राज में ऐसा संभव नहीं था। भाजपा के नेताओं का मानना है कि येदियुरप्पा सही और गलत बाद में देखते हैं, उनकी पहली निगाह लक्ष्य पर रहती है। बताते हैं इसी कौशल से उन्होंने सत्ता पाई। इसी कौशल ने दिग्विजय सिंह जैसा राजनीति के घाघ को भी दाल गलाने का अवसर नहीं दिया।

बादलों के बीच छिपा है शिवपाल और अखिलेश का मिलन

टीम अखिलेश के चंद नेताओं में एक हैं। लेकिन उन्हें अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के इस मिलन में कुछ बड़े कांटे नजर आ रहे हैं। वह साफ कहते हैं कि यह संभावना तो अभी बादलों के बीच में छिपी है। खबरची के अनुसार नेता जी यानी मुलायम सिंह को जन्मदिन की खुशियां देने के लिए अखिलेश ने चाचा शिवपाल के साथ सबकुछ सामान्य होने का संकेत दिया।

यह तस्वीर गाजियाबाद से लेकर गोरखपुर तक चर्चा का केंद्र बन गई। लगभग समाजवादी चाहते हैं कि लाठी (शिवपाल), ऊर्जा (अखिलेश) और बुद्धि (मुलायम) के साथ चलें तो मन की मुराद पूरी हो जाएगी। लेकिन सूत्र बताते हैं इस रास्ते में बड़ा कांटा जिंपल यादव, अपर्णा यादव, प्रतीक यादव और साधना भी हैं।

अखिलेश के लिए चाचा शिवपाल को पार्टी में लाने से पहले परिवार में ही अभी कुछ घमासान को निर्णायक मोड़ देना है। चाचा प्रो. राम गोपाल यादव के साथ भी समीकरण फाइनल करना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed