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Karnataka: मतदाता डेटा चोरी मामले में निलंबित IAS अधिकारियों को पुलिस का समन, जांच अधिकारी के सामने होंगे पेश
Wed, 07 Dec 2022 05:11 PM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, बेंगलुरु
पीटीआई, बेंगलुरु
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 07 Dec 2022 05:11 PM IST
सार
अधिकारी के मुताबिक, के श्रीनिवास और एस रंगप्पा को बुधवार को जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा गया। हालांकि, उन्होंने पूछताछ के लिए पेश होने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : PTI
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विस्तार
कर्नाटक में कथित वोटर आईडी घोटाले को लेकर राज्य के कांग्रेस नेताओं ने बेंगलुरु स्थित राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने कार्रवाई का भरोसा दिया था। वहीं अब खबर सामने आई है कि मतदाता डेटा चोरी के मामले में निलंबित भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के दो अधिकारियों को तलब किया गया है। इसकी जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने बुधवार को दी।
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अधिकारी के मुताबिक, के श्रीनिवास और एस रंगप्पा को बुधवार को जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा गया। हालांकि, उन्होंने पूछताछ के लिए पेश होने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा है। श्रीनिवास बेंगलुरु शहरी जिले के डिप्टी कमिश्नर थे और रंगप्पा बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के थे, जिन्होंने अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारी के रूप में भी काम किया था, जब कथित चुनावी डेटा चोरी की बात सामने आई।
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कथित तौर पर बड़े पैमाने पर चुनाव डेटा धोखाधड़ी देखी गई थी। इस दौरान दोनों अधिकारी उन निर्वाचन क्षेत्रों के प्रभारी थे, इसके बाद दोनों अधिकारियों को 26 नवंबर को निलंबित कर दिया गया था, चुनाव आयोग ने शिवाजी नगर, चिकपेट और महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची में जोड़ने और हटाने की समीक्षा करने का आदेश दिया था।
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जांच में चिलूमे एजुकेशनल कल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (चिलूमे) का सह-संस्थापक रविकुमार रविकुमार मतदाता डाटा चोरी मामले में मुख्य आरोपी हैं। वह चिलुमे एजुकेशनल कल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट ट्रस्ट चलाता हैं उसपर मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने का आरोप है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि हम जांच करेंगे कि यह ट्रस्ट है या फर्म।
आरोप है कि चिलूमे ट्रस्ट ने कथित तौर पर बीबीएमपी से मतदाता जागरूकता अभियान के लिए मुफ्त में अनुमति ली थी। कांग्रेस ने ट्रस्ट पर बड़ी संख्या में ब्लॉक स्तर के अधिकारी (बीएलओ) नियुक्त करने का आरोप लगाया है, जो आमतौर पर सरकार द्वारा किया जाना चाहिए, और उन्हें पहचान पत्र जारी किया जाता है।
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि बीएलओ ने तब अपने बीएलओ पहचान पत्र का उपयोग कर मतदाताओं का डोर-टू-डोर सर्वेक्षण किया था। कांग्रेस ने आगे कहा कि ट्रस्ट ने अपना काम कुछ अन्य एजेंसियों को भी सब-लीज पर दे दिया है। मामला सामने आने के बाद बीबीएमपी ने चिलूमे ट्रस्ट को दी गई अनुमति को रद्द कर दिया।
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी हस्तक्षेप किया और इस संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की गई। एफआईआर के आधार पर जांच की जा रही है। प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने ट्रस्ट के निदेशक कृष्णप्पा रविकुमार समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है।