माइनिंग प्रोटेक्टिड व्हीकल, बुलेटप्रूफ जैकेट रोड ओपनिंग पार्टी, जैसा कोई भी कवच पुलिस के पास नहीं था

जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Updated Thu, 02 May 2019 01:59 AM IST
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गढ़चिरौली में नक्सलियों द्वारा पुलिस वाहन पर आईईडी धमाका
गढ़चिरौली में नक्सलियों द्वारा पुलिस वाहन पर आईईडी धमाका - फोटो : ANI

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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में नक्सलियों ने इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव ब्लास्ट आईईडी के जरिए पुलिस की गाड़ी उड़ा दी। इस हमले में 15 जवान शहीद हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने महाराष्ट्र सरकार से इस घटना की रिपोर्ट मांगी है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर यह सूचना मिली है कि नक्सल क्षेत्र में जा रहे पुलिस कर्मियों के पास एक भी सुरक्षा कवच नहीं था। यानी माइनिंग प्रोटेक्टिड व्हीकल, बुलेटप्रूफ जैकेट और रोड ओपनिंग पार्टी, ये तीनों सुरक्षा कवच नदारद थे। इससे पहले लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान से एक दिन पहले भी गढ़चिरौली में सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग टीम पर नक्सलियों ने हमला किया था। आईईडी ब्लास्ट की चपेट में सीआरपीएफ के कई जवान आए थे। गढ़चिरौली के आईईडी हमले के बाद नक्सली मारे गए सभी जवानों के हथियार लूट कर ले गए।
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बता दें कि महाराष्ट्र का गढ़चिरौली जिला नक्सलियों का गढ़ माना जाता है। इससे पहले भी नक्सली यहां पर छोटे बड़े हमलों को अंजाम देते रहे हैं। सड़क के दोनों ओर घने जंगल हैं, इसलिए वे आसानी से आईईडी फिट कर देते हैं। बुधवार को हुए आईईडी हमले से पहले नक्सलियों ने गढ़चिरौली के उप जिला कुरखेड़ा में सड़क निर्माण कंपनी के करीब तीन दर्जन वाहन जला दिए थे। नक्सली पिछले साल 22 अप्रैल के दिन सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए अपने 40 साथियों की मौत की पहली बरसी मनाने के लिए एक सप्ताह से चल रहे विरोध प्रदर्शन के अंतिम चरण में थे। वे ताक में थे कि किसी भी तरह से सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाया जाए। 
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, यह बात पुलिस को मालूम थी कि गढ़चिरौली में नक्सली किसी बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसके बावजूद कोई सावधानी नहीं बरती गई। यह इलाका हाई अलर्ट पर था, लिहाजा जवानों को सुरक्षा घेरे में भेजना चाहिए था।
जवानों को कम से कम माइनिंग प्रोटेक्टिड व्हीकल तो मुहैया कराया जाना अनिवार्य था। अगर यह नहीं था तो रोड ओपनिंग पार्टी को वहां मौजूद होना चाहिए था। उसकी हरी झंडी मिलने के बाद ही पुलिस कर्मियों की टीम को आगे भेजा जाता। अगर आरओपी वहां पर तैनात होती तो आईईडी हमले को टाला जा सकता था। सूत्रों का यह भी कहना है कि सभी जवानों के पास एके-47 जैसे स्वचालित हथियार तो थे, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट कुछ ही जवानों के पास थी। ये तीनों लापरवाही बरती गई हैं।
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नक्सली समूहों से जुड़े लोग ग्रामीणों के टच में रहते हैं...

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